तीसरे विश्व युद्ध की आहट तो नहीं है इजराइल-ईरान संघर्ष।

Spread the love

 

नरेन्द्र शर्मा परवाना।

 

 

तीसरे विश्व युद्ध की आहट तो नहीं है इज़राइल-ईरान संघर्ष।

 

 

एक ओर पश्चिम के समर्थन और तकनीकी ताकत के साथ युद्ध मैदान में इजराइल है तो दूसरी ओर धार्मिक क्रांति का नेतृत्व करता हुआ, एशियाई भू-रणनीतिक गठजोड़ में मजबूत ईरान है। इन दोनों राष्ट्रों के बीच वर्षों से सुलगती दुश्मनी जून 2025 में चरम पर पहुंची तो, इज़राइल ने ईरान के संवेदनशील परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बमबारी की, और बदले में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से इज़राइल के कई शहरों पर हमला किया। अब यह संघर्ष केवल इन दो देशों की लड़ाई नहीं रह गया बल्कि इसके चारों ओर एक ध्रुवीकृत वैश्विक व्यवस्था सक्रिय हो चुकी है, जो किसी भी क्षण तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति की ओर ले जा सकती है।

 

 ऐतिहासिक घृणा और वर्तमान धमाका

ईरान और इज़राइल के संबंध कभी सामान्य नहीं रहे। 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति के बाद से यह दुश्मनी और तीव्र हुई। इज़राइल को ईरान “ज़ायोनी शासन” कहता है और उसे क्षेत्रीय खतरा मानता है। वहीं इज़राइल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए सीधा ख़तरा समझता है।

बीते वर्षों में सीरिया, गाज़ा, लेबनान में छद्म युद्ध, हिज़्बुल्ला और हमास जैसे संगठनों को समर्थन, और साइबर युद्धों ने दोनों देशों के संबंधों को और ज़हरीला बना दिया है। अब यह टकराव सैन्य और नागरिक दोनों स्तर पर हानिकारक हो चुका है।

 

 वैश्विक ध्रुवीकरण की राजनीति कौन किसके साथ

 

इजराइल के पक्ष में-

 

अमेरिका – इजराइल का परंपरागत और सामरिक सहयोगी, जिसे मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति और लोकतांत्रिक प्रभाव बनाए रखना है।

 

यूरोपीय देश (जर्मनी, यूके, फ्रांस)- तकनीकी और सुरक्षा समझौते के साथ-साथ यह देश आतंकवाद के विरुद्ध इज़राइल के पक्ष में खड़े हैं।

 

भारत – हालांकि भारत तटस्थ नीति पर चलता है, लेकिन रक्षा, साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग के चलते इजराइल से उसके गहरे संबंध हैं।

 

ईरान के पक्ष में-

 

रूस – अमेरिका को संतुलित करने और पश्चिम एशिया में प्रभाव बढ़ाने हेतु ईरान को रणनीतिक समर्थन देता है।

 

चीन  बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत ईरान में निवेश और ऊर्जा-आधारित गठजोड़ के कारण चीन ईरान का संरक्षक बन चुका है।

 

हिज़्बुल्ला, हमास, यमन के हूती विद्रोही है ये क्षेत्रीय गुट ईरान के वैचारिक व सामरिक विस्तारवाद के प्रतिनिधि हैं।

इन राष्ट्रों का सहयोग केवल सामरिक नहीं, बल्कि आर्थिक, वैचारिक और भू-राजनीतिक प्रभाव विस्तार से भी जुड़ा है।

 

 वैश्विक प्रभाव-क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?

 

युद्ध की श्रृंखला – यदि अमेरिका, रूस, चीन इस क्षेत्रीय संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो जाते हैं, तो यह सीधा (NATO) नाटो और एससीओ (SCO) जैसी शक्तियों के आमने-सामने खड़े होने जैसा होगा।

 

तेल आपूर्ति पर संकट- खाड़ी क्षेत्र के अस्थिर होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होगी, जिससे विकासशील देशों में महंगाई, व्यापार घाटा और मंदी जैसी स्थितियां उत्पन्न होंगी।

 

पर्यावरणीय हानि- रेडियोधर्मी सामग्री, गोला-बारूद से प्रदूषण, और रासायनिक हथियारों के प्रयोग से पर्यावरणीय आपदा जन्म ले सकती है।

 

शरणार्थी संकट- जैसे सीरिया में देखा गया, वैसे ही लाखों लोग लेबनान, गाज़ा, और ईरान से पलायन करेंगे, जिससे यूरोप और एशिया पर दबाव बढ़ेगा।

 शांति स्थापना के लिए क्या कर सकते हैं वैश्विक संगठन

 

संयुक्त राष्ट्र – अब तक केवल “आपात बैठकें” और “निंदा प्रस्ताव” ही सामने आए हैं। स्थायी सदस्य देशों की आंतरिक राजनीति इसकी निष्क्रियता का कारण है।

 

जी 20 और ब्रिक जैसे समूह- ये संगठन यदि आर्थिक निर्भरता के आधार पर ईरान-इजराइल को वार्ता के लिए बाध्य करें, तो कुछ पहल संभव हो सकती है।

 

भारत और यूरोप की भूमिका- एक संतुलित शक्ति के रूप में भारत जैसे देश गोपनीय वार्ताएं और शांति समितियों के माध्यम से एक नया समाधान प्रस्तुत कर सकते हैं।

 

 सामरिक संतुलन का संकट

 

इजराइल-ईरान संघर्ष उस दिशा की ओर इशारा करता है जहां तकनीक, धर्म, राष्ट्रवाद और वैश्विक प्रभुत्व की लालसा मानवता को पीछे छोड़ रही है। यह केवल एक सीमित युद्ध नहीं, बल्कि विश्व सामरिक संतुलन का संकट बन चुका है। यदि अभी भी वैश्विक संगठन और जनमत जागरूक नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में मानवता इतिहास नहीं, विनाश का दस्तावेज बन जाएगी।

 महावाक्य:

“जब राष्ट्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन मानव जीवन की कीमत पर करते हैं, तब केवल सीमा नहीं टूटती-संवेदनाएं, सभ्यता और समरसता भी बिखर जाती हैं। अब युद्ध नहीं, संवाद ही दुनिया का नया अस्त्र होना चाहिए।”    (विभूति फीचर्स)

  • Related Posts

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    Spread the love

    Spread the love  डॉ. सत्यवान सौरभ (पी-एच.डी., राजनीति विज्ञान, कवि, लेखक एवं सामाजिक चिंतक) बरवा, हिसार–भिवानी (हरियाणा)                           …

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    Spread the love

    Spread the love  ब्यूरो फिरोजपुरः  राजीव कुमार                      (नया अध्याय)   https://www.transfernow.net/dl/20260204Th1wQTGp         फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    • By User
    • February 4, 2026
    • 11 views
    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 4 views
    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    गौरैया

    • By User
    • February 4, 2026
    • 7 views
    गौरैया

    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 9 views
    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।