19वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 2025: सांख्यिकी का महत्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान।

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संजय सोंधी (उप सचिव) 

भूमि एवं भवन विभाग,

 दिल्ली सरकार

 

 

19वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 2025: सांख्यिकी का महत्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान।

 

भारत में प्रत्येक वर्ष 29 जून को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है, जो प्रख्यात सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालानोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जाता है। यह दिन सांख्यिकी के महत्व और सामाजिक-आर्थिक नीति निर्माण में इसके योगदान को रेखांकित करता है। सांख्यिकी, डेटा संग्रहण, विश्लेषण और व्याख्या की एक वैज्ञानिक पद्धति है, जो नीति निर्माताओं को तथ्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। यह सरकार, उद्योग और समाज के लिए योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और संसाधनों के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का उद्देश्य विशेष रूप से युवा पीढ़ी में सांख्यिकी के प्रति जागरूकता पैदा करना और प्रो. महालानोबिस के कार्यों से प्रेरणा लेना है। वर्ष 2025 के लिए 19वें राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का थीम “डेटा-संचालित शासन और सतत विकास” है, जो डेटा के उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाने और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य डेटा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को बढ़ाना है ताकि नीति निर्माण और मूल्यांकन में सुधार हो सके।

 

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के विलय से 2019 में गठित हुआ, भारत में सांख्यिकीय डेटा संग्रह और विश्लेषण का आधार-स्तंभ है। एनएसओ सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों जैसे रोजगार, उपभोक्ता व्यय, आवास, स्वास्थ्य, और शिक्षा में बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण आयोजित करता है। यह संगठन मासिक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI), और आर्थिक जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देता है। एनएसओ की संगठनात्मक संरचना में सीएसओ समन्वय और मानक स्थापित करता है, जबकि एनएसएसओ क्षेत्रीय स्तर पर डेटा संग्रह के लिए जिम्मेदार है। प्रो. महालानोबिस द्वारा 1950 में स्थापित एनएसएसओ ने वैज्ञानिक नमूना सर्वेक्षण पद्धतियों को अपनाकर भारत में डेटा संग्रह को क्रांतिकारी बनाया। मैंने स्वयं 2011-2016 के दौरान बिलासपुर उप क्षेत्रीय कार्यालय में सहायक अधीक्षक अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए इन सर्वेक्षणों के महत्व को निकट से देखा। मैं स्वयं विभिन्न सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षणों और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के लिए बिलासपुर संभाग में डेटा संग्रह कार्य में शामिल था।एनएसओ नीति निर्माण में डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायता करता है, जैसे कि गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा नीतियों को लागू करने में|

 

प्रो. महालानोबिस द्वारा 1931 में स्थापित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) सांख्यिकी और संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र है। कोलकाता में स्थित यह संस्थान विश्व स्तर पर अपनी सांख्यिकीय पद्धतियों और शोध के लिए प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (एनएसएसटीए) और अन्य विश्वविद्यालय सांख्यिकी में विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। ये संस्थान डेटा विज्ञान, मशीन लर्निंग और बिग डेटा विश्लेषण जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, जो भविष्य की सांख्यिकीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण हैं।

 

सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई), और कृषि सांख्यिकी में डेटा संग्रह के दौरान कई चुनौतियाँ सामने आती हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंच, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता, और डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौतियाँ हैं। अनौपचारिक क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का 80% से अधिक हिस्सा है, का सटीक मापन कठिन है। इसके अलावा, डेटा संग्रह में समयबद्धता और तकनीकी संसाधनों की कमी भी बाधाएँ उत्पन्न करती है। मैंने बिलासपुर में कार्य करते समय अनुभव किया कि Field कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी के कारण डेटा संग्रह में कठिनाइयाँ होती थीं।

 

आजकल, NSO (नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस) डेटा संग्रह के लिए टैबलेट, मोबाइल ऐप्स, GPS और क्लाउड टेक्नोलॉजी का उपयोग करता है। यह तकनीक डेटा की सटीकता, गति और विश्लेषण को बेहतर बनाती है। साथ ही, डिजिटल सर्वेक्षण और ऑनलाइन पोर्टल्स के माध्यम से भी डेटा एकत्र किया जाता है।

 

सांख्यिकी राष्ट्र निर्माण का आधार है, क्योंकि यह नीतियों को तथ्य-आधारित और प्रभावी बनाता है। भविष्य में, बिग डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, और रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण जैसे नए क्षेत्र सांख्यिकी के दायरे को और विस्तृत करेंगे। हालांकि, डेटा की गोपनीयता, साइबर सुरक्षा, और डेटा साक्षरता जैसी चुनौतियाँ भी सामने आएंगी। आम जनता की भूमिका भी महत्वपूर्ण है; उन्हें डेटा के महत्व को समझना चाहिए और सर्वेक्षणों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सांख्यिकी केवल संख्याएँ नहीं, बल्कि एक बेहतर और समावेशी भारत के निर्माण का मार्ग है।

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