नरसिंह अवतार: भगवान विष्णु की अद्भुत लीला

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संजय सोंधी, (संयुक्त सचिव)

भूमि एवं भवन विभाग,  दिल्ली सरकार

 

        नरसिंह अवतार: भगवान विष्णु की अद्भुत लीला

 

भगवान विष्णु के चौथे अवतार, नरसिंह, की कथा भक्ति और शक्ति का अनोखा संगम है। यह अवतार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और उनके दुष्ट पिता हिरण्यकशिपु के वध के लिए लिया गया था।

 

हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान पाया था कि न कोई मनुष्य, न पशु, न दिन, न रात, न धरती पर, न आकाश में, न अस्त्र से, न शस्त्र से उसका वध कर सकेगा। इस वरदान के अहंकार में उसने स्वयं को भगवान मानना शुरू कर दिया और अपने पुत्र प्रह्लाद को, जो विष्णु भक्त था, मारने का प्रयास किया। भगवान विष्णु ने संध्या के समय (न दिन, न रात), घर के द्वार (न धरती, न आकाश) पर, अपने नाखूनों (न अस्त्र, न शस्त्र) से, आधे मनुष्य और आधे सिंह (न मनुष्य, न पशु) के रूप में प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का वध किया। इस तरह उन्होंने वरदान की every शर्त को पूरा करते हुए अधर्म का नाश किया और भक्त की रक्षा की।

 

यहाँ यह बात दिलचस्प है कि भगवान विष्णु के अवतारों की संख्या को लेकर पुराणों में भिन्न-भिन्न मत हैं। श्रीमद्भागवत पुराण में 24 अवतारों का वर्णन है, जिनमें से 23 हो चुके हैं। वहीं, विष्णु पुराण में केवल 10 अवतार माने गए हैं, जिनमें से 9 अवतार हो चुके हैं और कल्कि अवतार भविष्य में होना है।

नरसिंह जयंती हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।

 

भारत में नरसिंह अवतार को समर्पित प्रमुख मंदिर

 

1. श्री वाराह नरसिंह मंदिर, सिम्हाचलम (आंध्र प्रदेश): विशाखापत्तनम में स्थित यह मंदिर अपनी द्रविड़ शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहाँ भगवान नरसिंह स्वयं प्रकट हुए थे। मंदिर का गर्भगृह एक प्राकृतिक गुफा में है और देवता की मूर्ति हमेशा चंदन के लेप से ढकी रहती है, जिसे साल में केवल एक बार ही दर्शन के लिए खोला जाता है।

2. नरसिंह जी मंदिर, मुल्थान (राजस्थान): राजस्थान के अलवर जिले में स्थित यह मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर बना हुआ है। कहा जाता है कि भगवान नरसिंह यहाँ प्रकट हुए थे और यहाँ की मूर्ति स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है।

3. यादगिरिगुट्टा मंदिर, तेलंगाना: हैदराबाद के पास स्थित यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ भगवान नरसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध करने के बाद विश्राम किया था। मंदिर तक पहुँचने के लिए 1200 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

4. नरसिंह मंदिर, जोशीमठ (उत्तराखंड): उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह मंदिर बहुत ही प्राचीन है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना की थी। यहाँ भगवान नरसिंह की मूर्ति का चेहरा बहुत ही उग्र है।

5. नामबि नरसिंह मंदिर, तमिलनाडु: तमिलनाडु के महाबलीपुरम में स्थित यह मंदिर एक विशाल ग्रेनाइट चट्टान को काटकर बनाया गया है। यह रथ के आकार का मंदिर अपनी शिल्पकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

6. नरसिंह मंदिर, पुरी (ओडिशा): पुरी के जगन्नाथ मंदिर के परिसर में स्थित यह मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि यहाँ भगवान जगन्नाथ हर स्नान यात्रा के बाद नरसिंह रूप में विश्राम करते हैं।

7. लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर, धर्मपुरी, तेलंगाना में स्थित है। यह गोदावरी नदी के दक्षिणी तट पर है और विष्णु के नरसिम्हा अवतार को समर्पित प्राचीन मंदिर है। 850 ईसा पूर्व से अस्तित्व में, यह दक्षिण काशी के नाम से जाना जाता है। दो मूर्तियां हैं: पाटा और कोट्ठा नरसिम्हा। भक्त यहां स्वास्थ्य, धन और समस्याओं से मुक्ति पाते हैं। वार्षिक जतरा मार्च-अप्रैल में मनाया जाता है।

8. नरसिंह मंदिर, नूणमठ (पंजाब): पंजाब के संगरूर जिले में स्थित यह मंदिर एक प्राचीन तीर्थ स्थल है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ भगवान नरसिंह ने कुछ समय बिताया था।

9. नरसिंह मंदिर, मंगलगिरि (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। यहाँ की मुख्य मूर्ति पंचमुखी नरसिंह की है, जो बहुत ही दुर्लभ है।

10. नरसिंह मंदिर, कदिरी (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित यह मंदिर बहुत प्राचीन है। मान्यता है कि यहाँ के देवता बहुत जागृत हैं और भक्तों की मन्नतें जल्दी पूरी करते हैं।

11. नरसिंह मंदिर, शोणितपुर (असम): असम के तेजपुर में स्थित यह मंदिर हिरण्यकशिपु की राजधानी शोणितपुर में होने का दावा करता है। यहाँ एक ऐसा पत्थर है जिस पर भगवान नरसिंह के पंजे के निशान हैं।

12. नरसिंह मंदिर, ज्वालापुर (उत्तराखंड): उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित यह मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहाँ भगवान नरसिंह की ज्वाला के रूप में पूजा की जाती है।

 

ये मंदिर भक्तों के लिए केवल पूजा के स्थल ही नहीं, बल्कि भगवान की शक्ति और करुणा के प्रतीक हैं।

(यह लेख लेखन सहायक जितेंद्र सिंह की सहायता से लिखा गया है।)

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