मेदिनीनगर में लोकार्पित हुआ करुण पुकार  कार्यक्रम में हुए शामिल औरंगाबाद के साहित्यकार 

Spread the love

 

ब्यूरो मेदिनीनगर।

 

 

मेदिनीनगर में लोकार्पित हुआ करुण पुकार 

कार्यक्रम में हुए शामिल औरंगाबाद के साहित्यकार 

   

 

      औरंगाबाद 14/10/25 मेदिनीनगरः के होटल ब्लू बर्ड में हिन्दी साहित्य भारती, पलामू के तत्वावधान में प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी, समकालीन जवाबदेही के सम्पादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार, औरंगाबाद के शिक्षाविद शंभु नाथ पाण्डेय, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, डॉ. रामाधार सिंह,छंदशास्त्री श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, कुमार मनीष अरविंद, सुरेन्द्र कुमार मिश्र, प्रेम प्रकाश भसीन, धनञ्जय जयपुरी और बलराम पाठक के कर कमलों से संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता छंदशास्त्री श्रीधर प्रसाद द्विवेदी एवं संचालन कवि राकेश कुमार ने किया। संबोधन के क्रम में मुख्य अतिथि इंदर सिंह नामधारी ने कहा कि अंधकार है वहाँ जहाँ आदित्य नहीं है।मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है। यह कहते हुए उन्होंने कवयित्री रीना प्रेम दुबे की कविताओं की सराहना करते हुए उनके एक गीत का पाठ किया।पलामू में नियमित साहित्य सृजन होना इस बात का द्योतक है कि पलामू साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी और जीवंत है। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेन्द्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि साहित्य के माध्यम से व्यक्ति मानव बनता है। रीना प्रेम दुबे की करुण पुकार की रचनाएं पढ़ने से लगता है कि कवयित्री ने लोगों के दर्द को शिद्दत से महसूस किया है तथा उसकी सफल अभिव्यक्ति की है।पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने कहा कि मुझे यह देखकर गर्व की अनुभूति हो रही है कि एक शिक्षिका के द्वारा उत्कृष्ट काव्य रचना किया गया है।संवेदनाओं का पुट एवं भाषा का प्रवाह इनकी रचनाओं को पठनीय व सार्थक बनाता है। साहित्यकार कुमार मनीष अरविंद ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी देश की राष्ट्रभाषा हिंदी का नहीं होना विचारणीय है। हमें अपनी भाषा के शुद्ध रूप का प्रयोग करना चाहिए। रीना प्रेम दुबे ने अपनी रचनाओं में शुद्धता का प्रयास किया है। इनकी कविता में भावों की अभिव्यक्ति मन को छूती है।औरंगाबाद के शिक्षाविद शंभुनाथ पांडेय ने कहा कि हमें साहित्य के अतिरिक्त अन्य क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी साहित्य से जोड़ना चाहिए क्योंकि साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है और समाज के प्रत्येक लोगों तक साहित्य को पहुंचाने की कोशिश होनी चाहिए। सुरेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि रीना प्रेम दुबे की रचनाओं में भावों की भूख दिखाई देती है और करुण पुकार में भावों की बौछार है। अध्यक्षता करते हुए श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि विधाता ने क्षमा, दया, करुणा आदि समस्त भावों को साकार करने के लिए नारी का सृजन किया। और नारी के रूप में रीना प्रेम दुबे ने करुण पुकार में इन समस्त भावों को सफलतापूर्वक निरूपित किया है।समारोह को डॉ. रामाधार सिंह, प्रेम प्रकाश भसीन, धनञ्जय जयपुरी, बलराम पाठक, उमेश कुमार पाठक रेणु, प्रभात मिश्र सुमन, सुरेश विद्यार्थी, अनुज कुमार पाठक, नीरज कुमार पाठक, डॉ. नीरज कुमार द्विवेदी ने भी कवयित्री रीना प्रेम दुबे को बधाई देते हुए करुण पुकार काव्य-संग्रह की सराहना की। डॉ. राम प्रवेश पण्डित ने सरस्वती वंदना की जबकि अतिथियों का स्वागत सत्येन्द्र चौबे ‘सुमन’ ने किया। पुस्तक का परिचय कराते हुए प्रखर वक्ता परशुराम तिवारी ने कहा कि करुण पुकार काव्य संग्रह में सिर्फ करुण पुकार ही नहीं है बल्कि करुणा की धार भी है। कवयित्री अपनी रचनाओं में सिर्फ करुण पुकार ही नहीं करती वरन समस्या समाधान के लिए स्वयं जूझती हुई दिखती हैं। धन्यवाद ज्ञापन मार्गदर्शक रमेश कुमार सिंह ने किया। इस मौके पर राम लखन दुबे, विनोद तिवारी, लालदेव प्रसाद, धनञ्जय पाठक, प्रेम प्रकाश दुबे, प्रियरंजन पाठक समर्पण, प्रेमकांत तिवारी, उदयभानु तिवारी, पीयूष राज, रिशु प्रिया, एम जे अज़हर, अमीन रहबर, गणेश पांडेय, मनीष मिश्र नन्दन, पंकज श्रीवास्तव, शीला श्रीवास्तव, सरोज देवी, माया देवी, सुकृति, बॉबी, आर एन झा, ममता झा, रमेश पांडेय, अनुपमा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव सहित कई साहित्यकार व साहित्यप्रेमी उपस्थित हुए। इस भव्य आयोजन हेतु कवि संगम त्रिपाठी संस्थापक प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा ने बधाई दी है।

  • Related Posts

    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    Spread the love

    Spread the love  आशीष कुमार चौहान (एनएसई  प्रबंध निदेशक एवं सीईओ)                 (नया अध्याय, देहरादून)   भारत का बजट 2026-27 साथ-साथ चल सकते…

    स्मृतियों की राह में कविता.

    Spread the love

    Spread the love  राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर               (नया अध्याय, देहरादून) _____________________ स्मृतियों की राह में कविता. _____________________ कविता नहीं है राख का ढ़ेर …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    • By User
    • February 5, 2026
    • 2 views
    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    स्मृतियों की राह में कविता.

    • By User
    • February 5, 2026
    • 11 views
    स्मृतियों की राह में कविता.

    आशाओं की छतरी

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    आशाओं की छतरी

    थोड़ा सा इश्क में

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    थोड़ा सा इश्क में

    वासंतिक छवि(दोहे)

    • By User
    • February 5, 2026
    • 12 views
    वासंतिक छवि(दोहे)

    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?

    • By User
    • February 5, 2026
    • 5 views
    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?