“संगठन का सृजन: जहाँ नेतृत्व की दृष्टि जागे, वहाँ समूह की शक्ति जागे, – सुश्री सरोज कंसारी।

Spread the love

 

सुश्री सरोज कंसारी

मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत

कवयित्री, लेखिका एवं अध्यापिका

समाज-सेविका, नवापारा-राजिम

रायपुर, छत्तीसगढ़।

 

 

 

 

“संगठन का सृजन: जहाँ नेतृत्व की दृष्टि जागे, वहाँ समूह की शक्ति जागे, – सुश्री सरोज कंसारी।

—————————————

                        (नया अध्याय, देहरादून)

 

 “नेतृत्व अर्थात् अव्यवस्थित भीड़ को संगठित कर लक्ष्य की प्राप्ति हेतु तैयार करना।” मायूस मन को प्रोत्साहित करना, दुखी चेहरे को ख़ुशी देना। निजी स्वार्थों को परे रखकर, बेबस, असहाय या वंचित लोगों के सामूहिक हित के लिए निडरता से संघर्ष करना और उन्हें सशक्त बनाना। अव्यवस्थित लोगों की भीड़ को संगठित करके किसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानसिक रूप से तैयार करना स्वयं में एक कला है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हारी हुई हर बाजी को जीतने के लिए, किसी के मन-मस्तिष्क को गहराई से टटोलकर, उन्हें उस कार्य हेतु पूर्ण रूप से अनुकूल बनाना ही मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।

 

नेतृत्व यानी कठिन से कठिन परिस्थिति में हार न मानना। असंभव की सीमा से आगे जाकर अस्त-व्यस्त और रूठे सहमे लोगों के अधिकार के लिए लड़ना और साहस के साथ हर जोखिम को उठाने के लिए तैयार रहना। सबसे पहले ये जानना जरुरी है। नेतृत्व अर्थात् कठिनतम परिस्थितियों में भी हार न मानना और असंभव की सीमाओं से आगे बढ़कर अस्त-व्यस्त व निराश लोगों के अधिकारों के लिए लड़ना तथा हर जोखिम उठाने को तत्पर रहना। नेतृत्व एक ऐसी कला है जिसमें किसी महत्वपूर्ण कार्य हेतु योजना बनाना, लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना, लोगों को संगठित करना तथा सफलता के लिए हर मोड़ पर मार्गदर्शन देना शामिल है। एक नेता अपने ओजस्वी विचारों से निष्क्रिय और पथभ्रष्ट व्यक्तियों को सही दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। ऐसा विश्वसनीय व्यक्तित्व होना आवश्यक है जिसमें पूर्ण आत्मविश्वास, दूरदर्शिता, मानवीय संवेदनाएँ, स्पष्टवादिता और निर्णय लेने की अटूट क्षमता होती है, जिस पर इन्सान आँख बंद करके भी विश्वास कर सके। वास्तविक नेतृत्व की संभावना उस व्यक्ति में होती है जो किसी भी समस्या के समाधान हेतु स्पष्ट और संदेह-रहित विकल्प प्रस्तुत कर सकता है। जो लोग नेतृत्व के सही अर्थ हुकूमत नहीं, वरन् मार्गदर्शन को नहीं समझ पाते, वे इसका दुरुपयोग करते हैं तथा अंत में, असफल हो जाते हैं। केवल आदेश देकर, कटु शब्दों का प्रयोग कर तथा अधीनस्थ लोगों की समस्याओं की अनदेखी कर एकतरफा निर्णय थोपते हैं। इस निरंकुश शैली से लोगों का मनोबल गिरता है तथा उद्देश्य अधूरा रह जाता है, क्योंकि किसी भी सामूहिक प्रयास में हर एक सदस्य महत्वपूर्ण होता है। भेदभाव, रवैया और अहम्, सिर्फ़ हुकूमत चलाने वाले कभी नेतृत्व के लायक नहीं हो सकते हैं। एक सफल नेतृत्वकर्ता का आचरण एकदम संयमित होना चहिए। जिसके आदेश को आदर्श समझकर, उसके अधीन व्यक्ती स्वमेव उसके आज्ञा पालन के लिए उत्सुक (कथनी) और कार्यों (करनी) में कोई अंतर नहीं होता। अपने दिए गए वचन पर अडिग होकर, जिनमें कार्य करने की कला होती है। विश्वास की जोड़ भी उनके साथ होती हैं सार्वजनिक हित के उद्देश्य की पूर्ति ही जिनका लक्ष्य होता है व सभी के हित के लिए अपने हर सुख का त्याग करने का भाव जरुरी हैं जिनका सभी एकमत होकर अनुसरण कर सकें। निर्णय लेने की जिनमें त्वरित क्षमता हो जो एक बार फैसला करे उस पर ही गतिशील हो किसी बाधा या विपत्ति से डरकर रुकें नहीं जिनमें सूझबूझ निर्देशन सूचना प्रसारण की अद्भुत गुण हो जो हर असंभव कार्य को करने के लिए अग्रसर हों… जिनमें सभी को साथ लेकर चलने का हुनर हो, जो एक-दूसरे की तकलीफ को समझें और सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहें। जिन्हें अपने दायित्वों के निर्वहन का सही बोध हो और जो मानसिक रूप से परिपक्व हों। कार्य कराने की जिनकी शैली सुंदर और व्यवहार मधुर हो, तथा जो अपने अधीन कार्य करने वालों का सम्मान करना जानते हों। जो अपने अधीन लोगो का सम्मान करें। हर क्षेत्र में एक आदर्श नेतृत्व की आवश्यकता होती है। जिनके पास सूक्ष्म निरीक्षण की एक बेहतरीन हुनर होती है। और वे अपने कार्य से एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं तथा उद्देश्य की पूर्ति होती है। जिससे संगठन का हित होता है। नेतृत्व एक अवसर देता है। आपको अपनी मेहनत से नया इतिहास लिखकर समस्या का बेहतरीन समधान करने का समय के अनुसार नेतृत्वकर्ता बदलते हैं। किसी एक का हुकूमत सदा ही नहीं होता इसलिए जब तक आपको मौका मिला है। आप ऐसे कार्य करें जिससे लोग आपके कार्य का अनुशरण करें। एक अनूठी शैली से हर असहज बात को सहज बना दें। जब उस पद से बाहर हो तो आपकी कार्यप्रणाली यादगार हो। और लोग मिसाल दें। जब लोग आपको किसी उद्देश्य के लिए चुनते हैं। आप पर उनकी आस्था श्रद्धा और विश्वास होती हैं कमजोर असहाय लोगों का हित कर आप अपने लिए आशीर्वाद संग्रहीत करते हैं। जो इस दुनियां की सबसे बडी दौलत है। साथ मिलकर कार्य कराने के लिए एकदम शांत एकाग्र और धैर्य रखना बहुत जरूरी होता है। कई ऐसे भी लोग होते हैं जो पद में आते ही अपने आप को अन्य लोगों से बड़ा समझने लगते हैं। अहम् भाव आ जाता है। दुर्व्यवहार से लोगों के दिल से उतर जाते हैं। फ़िर कोई भी उद्देश्य सफल नहीं होता। ध्यान रखें! यहाँ कोई किसी से कम नहीं होता, बस अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते रहना चाहिए तथा जिनसे उम्मीदें जुड़ी हैं, उन्हें कभी नहीं तोड़ना चाहिए। सही मायनों में, नेतृत्व यानी व्यक्तियों को सही मार्ग दिखाना, उनको समझना तथा संतुलन का भाव रखकर कार्य करना है।

जयतु भारतम्।

 

नारी शक्ति, अस्मिता की एक सशक्त प्रतीक 

 सादर !

 

  • Related Posts

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    Spread the love

    Spread the love  डॉ. सत्यवान सौरभ (पी-एच.डी., राजनीति विज्ञान, कवि, लेखक एवं सामाजिक चिंतक) बरवा, हिसार–भिवानी (हरियाणा)                           …

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    Spread the love

    Spread the love  ब्यूरो फिरोजपुरः  राजीव कुमार                      (नया अध्याय)   https://www.transfernow.net/dl/20260204Th1wQTGp         फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    • By User
    • February 4, 2026
    • 11 views
    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 4 views
    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    गौरैया

    • By User
    • February 4, 2026
    • 7 views
    गौरैया

    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 9 views
    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।