विकसित भारत की त्रिवेणी: नवाचार, स्वावलंबन और विरासत का संगम

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डॉ.यल.कोमुरा रेड्डी

असिस्टेंट प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष

         हिन्दी विभाग

यस.आर.आर. शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय

करीमनगर, तेलंगाना।

 

 

                         (नया अध्याय, देहरादून)

विकसित भारत की त्रिवेणी: नवाचार, स्वावलंबन और विरासत का संगम

नवंबर 30, 2025 की ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने बताई राष्ट्र की सामूहिक शक्ति की गाथा

 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ देश की सामूहिक शक्ति, उपलब्धियों और सांस्कृतिक चेतना को जन-सामान्य के सामने लाने का एक सशक्त माध्यम है। नवंबर 2025 के इस संबोधन में, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय प्रगति को नवीन सोच (नवाचार), स्वयं पर निर्भरता (आत्मनिर्भरता), और पुरानी धरोहर (विरासत) के त्रिवेणी पर खड़ा दिखाया।

1. अंतरिक्ष और रक्षा में ऐतिहासिक प्रगति

संबोधन का आरंभ ही राष्ट्रीय गौरव की गाथाओं से हुआ। रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के बड़े कदमों को रेखांकित किया गया:

विमानन क्षेत्र में क्रांति: हैदराबाद में विश्व की सबसे बड़ी मुख्य इंजन मरम्मत और रखरखाव सुविधा का उद्घाटन, जो विमानों के रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण के क्षेत्र में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

नौसेना की स्वावलंबन: पूर्णतया भारतीय डिज़ाइन वाले जलपोत आईएनएस ‘माहे’ का नौसेना में शामिल होना, देश की समुद्री सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री ने इसे नौसेना द्वारा स्वयं पर निर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ते कदम के रूप में सराहा।

युवा सामर्थ्य और नवीनता: स्काईरूट के इनफिनिटी परिसर को भारत की नई सोच और युवा शक्ति का प्रतिबिंब बताया गया।

2. विफलता से विजय: नई पीढ़ी का साहस

प्रधानमंत्री ने पुणे के नौजवानों द्वारा इसरो की ड्रोन प्रतियोगिता का उदाहरण दिया, जिसने पूरे राष्ट्र को एक अमूल्य सीख दी। मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में बिना ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के ड्रोन उड़ाने की चुनौती में ड्रोन बार-बार गिरे, लेकिन युवाओं ने हार नहीं मानी।

“वह तो विफलता से निकलकर बनाए गए विश्वास की सफलता थी।”

उन्होंने इस प्रयास को चंद्रयान-2 की विफलता के बाद चंद्रयान-3 की सफल चंद्रमा पर उतरने (लैंडिंग) की घटना से जोड़ा। यह कहानी दर्शाती है कि विफलता, अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि अगले प्रयास का प्रारंभिक बिंदु है। नौजवानों का यह लगन ‘विकसित भारत’ की सबसे बड़ी शक्ति है।

3. कृषि और ‘मधुर क्रांति’ की मिठास

कृषि क्षेत्र में भारत ने 357 मिलियन टन अनाज उत्पादन का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया, जो पिछले 10 वर्षों की तुलना में 100 मिलियन टन अधिक है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने ‘मधुर क्रांति’ यानी मधुमक्खी पालन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण पर विस्तार से बात की।

• उत्पाद और पहचान: जम्मू-कश्मीर के रामबन सुलाई शहद को भौगोलिक संकेत टैग मिलने से उसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी।

• सामुदायिक सहयोग: कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ा में ‘ग्रामजन्य’ संस्था द्वारा शहद को ब्रांडेड उत्पाद बनाना और तुमकुरु की ‘शिवगंगा कालंजिया’ द्वारा किसानों को मधुमक्खी पेटियाँ देना, सामूहिक शक्ति के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

• परंपरा का आदर: नागालैंड की खियामनि-याँगन जनजाति द्वारा ऊँची चट्टानों से शहद निकालने की सदियों पुरानी, जोखिम भरी परंपरा और मधुमक्खियों से ‘अनुमति’ लेने का भाव, प्रकृति के साथ भारत के सुंदर तालमेल को दर्शाता है।

इस ‘शहद मिशन’ के तहत देश का शहद उत्पादन दोगुना हुआ और निर्यात तीन गुना बढ़ा है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है।

4. धरोहर और सांस्कृतिक जागरण

संबोधन में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और मानवीय धरोहर को भी स्थान मिला:

• गीता और महाभारत का अनुभव: कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र और अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में विश्व भर के लोगों की भागीदारी भारतीय संस्कृति के दिव्य प्रभाव को दर्शाती है।

• मानवता की मिसाल: प्रधानमंत्री ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गुजरात के जाम साहब, महाराजा दिग्विजय सिंह जी द्वारा हजारों पोलिश यहूदी बच्चों को शरण देने की महान मानवीय पहल को याद किया, जिसकी प्रतिमा हाल ही में इजराइल में स्थापित हुई है। यह भारत की शांति और दया की भावना का प्रतीक है।

• एक भारत-श्रेष्ठ भारत: चौथे ‘काशी तमिल संगमम’ की शुरुआत ‘तमिल सीखो’ विषयवस्तु (थीम) के साथ हो रही है। यह मंच ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त करता है और तमिल संस्कृति को देश का गौरव बताता है।

5. ‘स्थानीय के लिए आवाज़’ का वैश्विक प्रदर्शन

प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान विश्व नेताओं को दिए गए उपहारों का जिक्र करके ‘स्थानीय के लिए आवाज़’ को वैश्विक पटल पर स्थापित किया। ये उपहार भारतीय शिल्प, कला और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते थे:

नेता/देश भेंट शिल्प/क्षेत्र

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति नटराज की काँस्य प्रतिमा तंजावुर, तमिलनाडु (चोल काल की)

कनाडा के प्रधानमंत्री चाँदी के अश्व की प्रतिकृति उदयपुर, राजस्थान

जापान के प्रधानमंत्री चाँदी की बुद्ध की प्रतिकृति करीमनगर, तेलंगाना

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री पीतल की उरली (Brass Urli) मन्नार, केरल

यह पहल न केवल हमारे कारीगरों की प्रतिभा को पहचान दिलाती है, बल्कि भारत में बने उत्पादों के प्रति जनता के बढ़ते प्रेम को भी दर्शाती है, जिसे त्योहारों की खरीदारी में स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।

6. खेल और शारीरिक तंदुरुस्ती की नई संस्कृति

 

खेलों में भारतीय महिला टीमों का शानदार प्रदर्शन छाया रहा: अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट विश्व कप, महिला कबड्डी विश्व कप, बधिर ओलंपिक में 20 पदक, और सबसे अधिक प्रेरणादायक – दृष्टिबाधित क्रिकेट विश्व कप जीतना।

 

इसके अलावा, देश में सहनशक्ति वाले खेल की नई संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया, जैसे लंबी दूरी की दौड़ (मैराथन), साइकिल दौड़ (बाइकेथॉन), और चुनौतीपूर्ण आयरनमैन ट्रायथलॉन। यह नई लहर ‘तंदुरुस्त भारत’ आंदोलन को एक नई दिशा दे रही है, जिसमें युवा अपनी शारीरिक सीमाओं की परख कर रहे हैं।

7. निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन एक शक्तिशाली संदेश देता है कि भारत अपनी पुरानी धरोहर (गीता, काशी-तमिल संगमम, मानवता) और आधुनिक विकास (मरम्मत सुविधा, अंतरिक्ष, प्राकृतिक खेती) के बीच एक सही संतुलन साध रहा है। यह ‘मन की बात’ केवल उपलब्धियों का विवरण नहीं था, बल्कि देशवासियों को स्वयं पर निर्भरता, नवीन सोच और सामूहिक प्रयास के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने वाला एक आह्वान था।

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