“अंधेरे को मिटाने की चिंता छोड़िए, बस प्रकाश फैलाने पर ध्यान दो।” — सुश्री सरोज कंसारी।

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सुश्री सरोज कंसारी

मानवीय संवेदनाओं से ओत-प्रोत

कवयित्री, लेखिका एवं अध्यापिका

समाज-सेविका, नवापारा-राजिम

रायपुर, छत्तीसगढ़।

 

 

                 (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

“अंधेरे को मिटाने की चिंता छोड़िए, बस प्रकाश फैलाने पर ध्यान दो।” — सुश्री सरोज कंसारी।

          —————————————

 

हमारे प्रत्येक कर्म में, प्रकृति का सम्मान और मानवता का संवर्धन निहित हो, क्योंकि जो सृजन के काम आता है, वही युगों तक जीवित रहता है। अंधकार का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता है…वह सिर्फ़ प्रकाश की अनुपस्थिति है। दरारें ही वह मार्ग हैं, जहाँ से प्रकाश भीतर प्रवेश करता है। यह तो वास्तविकता है कि एक बार टूटकर पुनः जुड़ना बहुत ज़्यादा कठिन होता है, किंतु निरंतर प्रयास ही जीवन को सुख और समृद्धि की ओर ले जाते हैं। याद रखें, तनाव के क्षणों में भले ही हमें लगे कि ये सभी रास्ते बंद हो गए हैं, लेकिन मन के द्वार सदा खुले रहते हैं। अपने गमगीन हृदय को खुशियों से फिर से भरने के लिए, बस स्वयं को उत्साहित, सक्रिय और जागरूक रखने की अति आवश्यक है। जब तक हम जीवित हैं, अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण की शक्ति हमारे भीतर मौजूद है। संवेदनशीलता मेरा गुण है; मैंने सुख-दुख को न केवल देखा है, बल्कि गहराई से महसूस भी किया है। जीवन से हार मान लेना दुर्बलता है। न जाने कितने पुण्य कर्मों के बाद हमें यह मानव तन प्राप्त हुआ है, इसे चिंता की अग्नि में जलाकर राख कर देना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। इस जीवन को संभावनाओं और मुस्कुराहटों से संवारें। समाधान बाहर नहीं, आपके भीतर है। अंतर्कलह त्यागें और अपनी असीम ऊर्जा को पहचानें। धैर्य, साहस व सकारात्मकता वह हथियार हैं, जिनसे हारी हुई बाजी भी जीती जा सकती है। याद रखें, आप परिस्थितियों से मजबूर इंसान नहीं, बल्कि शक्ति का पुंज हैं। घबराएं नहीं, डटकर सामना करें—जीवन वाकई बेहद खूबसूरत है। भविष्य अनिश्चित है। पर, आप शांति, प्रेम व करुणा के साक्षात् दूत हैं। ख़ुद की क्षमताओं को पहचाने और निर्भीक होकर मानवता के पथ पर चलें। आप इस धरती के प्राणी हैं, जिनका कार्य संसार में सद्भाव और समन्वय स्थापित करना है। आप बाधक नहीं, मार्गदर्शक हैं। आपकी सकारात्मकता ऐसी है कि दूसरों की कड़वाहट अथवा दुर्व्यवहार आपको विचलित नहीं कर पाते। एक संवेदनशील हृदय होने के नाते आप दूसरों की पीड़ा को अपनी समझकर उसे दूर करने का प्रयास करते हैं। क्रूरता तथा भेदभाव को त्यागकर, दया और सहानुभूति को अपनाना ही आपकी असली शक्ति है। अपनी इस असीम ऊर्जा से संसार को आलोकित करते रहिए…याद रखिए, आपका जन्म एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ है। यह बहुमूल्य जीवन तर्क-वितर्क, घृणा, क्रोध या नकारात्मकता में व्यर्थ करने के लिए नहीं है। गम की गहराइयों में डूबे रहने से भविष्य अंधकारमय हो जाता है। हम यहाँ घुट-घुट कर जीने, किसी के अनुचित दबाव को सहने या भयभीत होकर समझौता करने के लिए नहीं आए हैं। हमारा वास्तविक लक्ष्य खुद को इतना सशक्त बनाना है कि हम औरों के आँसू पोंछ सकें और परिवार, समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन कर सकें…अतीत की गलतियों पर हीनता का भाव पालना उचित नहीं। जो बीत गया उसे भूलकर, अपने मनोबल को बढ़ाएं और वर्तमान को सुधारें। नकारात्मकता को केवल सकारात्मक कर्मों से ही पराजित किया जा सकता है। सांसारिक जीवन में मानसिक और शारीरिक चुनौतियाँ अनिवार्य हैं, कभी हम एकांत खोजते हैं, तो कभी भीड़ में अपनो को। किंतु सत्य यही है कि हमें हर परिस्थिति के साथ सामंजस्य बिठाकर निरंतर संघर्ष करना है। चिंताओं से भरा मन एक भारी बोझ की तरह होता है, जो जीवन की यात्रा को थका देता है। खुद को बेबस न समझें, आप स्वतंत्र हैं। इस दुनिया की भागदौड़ में उलझने के बजाय सादगी को अपनाएँ। वही काम करें जिससे आपके हृदय को असली खुशी, सुकून और हिम्मत मिले। ये याद रखिए, इस धरा पर, हम सब कुछ समय के मेहमान हैं। अंत में, हमारे साथ कुछ नहीं जाएगा, सिवाय हमारे अच्छे कामों के। इसलिए, नेक इंसान बनिए और जीवन का अर्थ सार्थक लें। मन की अच्छाई और आत्मा की पवित्रता ही आपके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए। सबका हो कल्याण। मानवता सर्वोपरि। साधुवाद!

 

       नारी शक्ति, अस्मिता की एक सशक्त प्रतीक

 

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