“हर परीक्षा में वही उत्तीर्ण होते हैं, जिन्होंने उत्तम विचारों को केवल सुना नहीं, बल्कि उन्हें जिया है।” — सुश्री सरोज कंसारी।

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सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री, लेखिका 

नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)

 

 (नया अध्याय, देहरादून)

 

                          आलेख

 

                    “हर परीक्षा में वही उत्तीर्ण होते हैं, जिन्होंने उत्तम विचारों को केवल सुना नहीं, बल्कि उन्हें जिया है।”        -सुश्री सरोज कंसारी।

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वही पथिक मंजिल को पाते हैं, जिन्होंने ज्ञान को केवल पढ़ा नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व में ढाला है। भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के परीक्षा संबंधी चर्चा करोड़ों विद्यार्थियों के लिए प्राणवायु के समान है।

              1. परीक्षा के दबाव से निपटने के लिए मोदी जी की प्रेरणादायक बातें: निडर होकर परीक्षा को हराएं, जीवन परीक्षाओं से भरा है। कठिनाई में राह बनाने की कला ही विद्यार्थी का गुण होना चाहिए । अध्यापक, अभिभावक और विद्यार्थी को अपने आचरण का मूल्यांकन करते रहना चाहिए। परीक्षा हर इंसान के जीवन की नाजुक घड़ी होती है, इसके लिए तैयारी हो या न हो, घबराहट होती ही है। कई प्रश्न उमड़ते हैं और कभी-कभी सोचकर ही मानसिकता बिगड़ जाती है और समर्थ होते हुए भी हम ठीक से किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाते और बाद में अफसोस करते हैं। हर बच्चे की पढ़ने-रटने और स्मृति क्षमता अलग होती है, लेकिन अगर समय प्रबंधन कर समय पर अपनी तैयारी करें और सहजता से ले, कोशिश करते रहे तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है। भय के कारण भी कई बार गलती हो जाती है, ऐसे में प्रेरित करने वाले सकारात्मक विचार मन में नई ऊर्जा भरते हैं। मोदी जी के मन की बात में विद्यार्थियों के जीवन को नया मोड़ देने, उनके कल्पनाओं को साकार करने और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने का अचूक मंत्र है। हर वर्ष परीक्षा संबंधी चर्चा विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है, कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जिसे हर विद्यार्थी को ध्यान रखना चाहिए। आज के विद्यार्थी कल देश की मजबूत नींव, सजग पहरेदार बनेंगे, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है परीक्षा। निडर होकर परीक्षा को हराएं, जीवन परीक्षाओं से भरा है, कठिनाई में राह बनाने की कला ही विद्यार्थी का गुण होना चाहिए। परीक्षा में पास होने के लिए कई प्रकार के दबाव होते हैं, जिसे झेलने के लिए सामर्थ्यवान बनना चाहिए। हर तरह के दबाव से अपनी विपरित परिस्थिति से हमें जीतना है और आगे बढ़ना है, यह संकल्प आवश्यक है। उतना स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए जिससे मानसिक शक्ति ही कम हो जाए। प्रत्येक अभिभावक को भी समझना है कि अपने बच्चे की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए। जीवन में यदि चुनौतियाँ न हो तो जीवन प्रेरणाहीन, चेतनाहीन हो जाएगा। कंपीटिशन होना ही चाहिए, परिवार में भी दो बच्चों के बीच भेदभाव करने से भाई-बहन के बीच कड़वाहट के बीज घुलते हैं, द्वेष भाव जागृत हो जाते हैं, इसलिए उनसे समान प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। प्रेरक प्रसंग के माध्यम से विद्यार्थियों में सहयोग के गुण विकसित करते हुए कहा कि एक बार दिव्यांग बच्चों के बीच दौड़ की प्रतियोगिता हो रही थी, उनमें से एक प्रतिभागी गिर गया, जब उसके आगे-पीछे वाले बच्चों को पता चला तो सभी रुक गए, उसके पास आए, उनकी कुशलता पूछे और उसके खड़े होने पर फिर दौड़े, यही है वास्तविक प्रतिस्पर्धा। दो मित्रों के यदि एक के सौ में नब्बे अंक आए तो आपके लिए क्या अंक कम हो जाएंगे? नहीं, सौ ही बचेंगे, इसलिए खुद से प्रतिस्पर्धा करें। हमें प्रतिभावान दोस्तों को ढूंढना चाहिए, ईर्ष्या भाव नहीं रखना चाहिए। दोस्तों के बीच ऐसे प्रेम भी होता है, एक अगर फेल हो गया और दूसरा अधिक अंक से पास हुए तो अपने मित्र के लिए वो भी खुशी नहीं मनाता, दोस्ती लेन-देन का खेल नहीं, नि:स्वार्थ होती है, अपने लिए तेजस्वी तपस्वी दोस्त चुनना चाहिए। परीक्षा में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, एक संगीत के शिक्षक पूरे विद्यालय के तनाव को कम करने में सहयोगी हो सकते हैं। टीचर और विद्यार्थी का नाता निरंतर बढ़ते रहना चाहिए, ऐसा होने से परीक्षा के दिनों में तनाव ही नहीं होंगे, अगर स्टूडेंट अपने मन की बात शिक्षक से करते रहेंगे तो सफल होने के कई विकल्प मिलेंगे।

   3. परीक्षा में सफलता के लिए अभिभावक और शिक्षकों की भूमिका : माता-पिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, परीक्षा में जाते समय बच्चे को सुपाच्य आहार दें, उन्हें ज्यादा रोक-टोक न करें, अपनी मस्ती में जीने दीजिए, बच्चे को जैसे रोजमर्रा की जीवनशैली होती है, वैसे ही सहज रहने दें, ज्यादा टेंशन न दें । परीक्षा हॉल में कुछ समय पहले जाएं, आराम से बैठें, गहरी सांस लें, इधर-उधर की बात न सोचें, जब प्रश्न पत्र आएगा आप कांफर्ड रहेंगे । परीक्षा कोई घबराहट का विषय नहीं, प्रश्न एक बार पूरा पढ़ लीजिए, तय कर लें कितने समय तक एक प्रश्न हल करना है, जो सरल है उसे पहले बनाते चलें। आज के यूथ में कंप्यूटर, मोबाइल के कारण लिखने की आदत कम हो गई है, लेकिन परीक्षा में लिखना होता है, इसके लिए निरंतर तैयारी रखें, प्रतिदिन लिखें और पढ़ें । अगर आपको तैरना आता है तो गहरे पानी से भी पार हो सकते हैं, वैसे ही पहले से साल भर तैयारी करेंगे तो कभी परीक्षा का भय नहीं रहेगा । पढ़ाई और स्वस्थ जीवन शैली के बीच संतुलन बनाए, यदि हम स्वस्थ नहीं रहेंगे तो परीक्षा में बैठेंगे कैसे? इसलिए अपनी नींद भी पूरी करें, समय नियोजन करें, डेली एक्सरसाइज कीजिए । किताब लेकर घूमते हुए पढ़ना उपयोगी होता है। कैरियर चुनाव में निश्चिंत रहें, अपने आप पर भरोसा रखें, ख़ुद की क्षमता को जानते नहीं इसलिए दूसरों के एडवाइज पर निर्भर रहते हैं । अनिश्चितता से बचना चाहिए, जो काम हाथ में लिए हैं उसमें जी-जान से जुट जाएं । अध्यापक, अभिभावक और विद्यार्थी को अपने आचरण का मूल्यांकन करते रहना चाहिए, इसका जीवन में बहुत प्रभाव पड़ता है और हर विद्यार्थी को झूठ बोलने से बचना चाहिए, तभी आपके माता-पिता और शिक्षक आप पर विश्वास करेंगे । टीचर भी अपने सभी विद्यार्थी को समान व्यवहार दें और जो कमजोर है उन पर विशेष मेहनत कीजिए। भारत देश की हर सरकार को गरीबी से जूझना पड़ता है, लेकिन गरीबी तब हटेगी जब हर इंसान सोचेंगे कि मैं गरीबी को परस्त करके रहूँगा, हमें देश की अपार संसाधनों पर विश्वास करना पड़ेगा, सही-गलत की पहचान करना आवश्यक है, एक बात याद रखनी चाहिए, सभी सामर्थ्य बच्चे में है, बस उसे सही दिशा देनी है । देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर वर्ग के लोगों का सर्वांगीण विकास हो रहा है, ऐसे कर्मठ, दूरदर्शी, सुझबुझ से काम लेने वाले योद्धा, वीर सपूत पाना सौभाग्य का विषय है, देश प्रगति के पथ पर अग्रसर हो और भावी पीढ़ी देश की बागडोर संभाल सके, इसके लिए शिक्षा महत्वपूर्ण मध्यम है, इसलिए विद्यार्थी वर्ग में पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत करने, अभिभावकों और शिक्षकों का उनके प्रति दायित्व को परीक्षा चर्चा में मोदी जी ने बहुत ही बारीकी से बताया है, जिस पर अमल करके बच्चे प्रतिभावान् बनेंगे और मन से परीक्षा का भय समाप्त होकर उन्हें भविष्य में क्या करना चाहिए, उसमें सहयोग मिलेगा। परीक्षा के लिए हर पल तैयार रहना, विषय का बारीकी से अध्ययन, निरंतर अभ्यास, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, लगन, कठोर परिश्रम, आलस्य का त्याग ही विद्यार्थी को जीवन के हर पग में हर परीक्षा में सफलता दिला सकती है, आवश्यकता है तो अच्छी बातों पर चिंतन कर उसका अनुकरण करने की।

निष्कर्ष: “परीक्षा के लिए प्रत्येक क्षण तैयार रहना। विषय का बारीकी से अध्ययन, निरंतर अभ्यास व विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, लगन, कठोर परिश्रम, आलस्य का त्याग ही विद्यार्थी को जीवन के हर पग में हर परीक्षा में सफलता दिला सकती है, आवश्यकता है तो अच्छी बातों पर चिंतन कर उसका अनुकरण करने की।” 

जयतु भारतम् ! 

 

       नारी शक्ति एवं अस्मिता की सशक्त प्रतीक

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