सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री एवं लेखिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“जो हमारे पास है उसकी कद्र करना, जीवन जीने की हिम्मत को लगातार बढ़ाते रहना ही सबसे बेहतर है”
: सुश्री सरोज कंसारी।
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हर पल अपने अंतर्मन की सुनें और मन को शांत रखने की कोशिश करते रहें। यदि मन शांत होगा, तो जीवन की हर चीज सुखद, सरल और सौम्य लगेगी। हमारा मकसद जीतना नहीं, जिंदगी को समझना होना चाहिए। जो जीवन की इस नदी में बहना जान लेते हैं, उनके लिए समुद्र तक का सफर मुश्किल नहीं होता, बल्कि आसान हो जाता है। प्रत्येक मनुष्य को जीवन के हर क्षेत्र में अपनी शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक क्षमता का प्रयोग सतर्क, जागरूक, सक्रिय और हिम्मत से करना चाहिए। साधारण रूप में किसी बात को न लें। प्रत्येक कर्म और व्यवहार का संबंध हमारी आत्मा से जुड़ा होता है। जो संयम से करते हैं उसमें आत्म-सुधार होता है। हर क्षण को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग ढूंढिए! क्योंकि जब तक अवसर है, तभी तक हम इसे आनंदित कर सकते हैं… इसे व्यर्थ करना नादानी है। लक्ष्य से भटक जाना…जीवन निराश हो जाता है… जो उद्देश्यपूर्ण जीवन जीते हैं उन्हीं का हर पल सार्थक होता है। व्यर्थ चिंता से मन में बोझ भारी होता है। हर एक बात को पूरी तरह समझकर उस पर चिंतन कर कोई परिणाम निकालिए। याद रखिए! दुनिया में हर कदम पर हमें एक नया आश्चर्य देखने और सुनने को मिलेंगे और मानसिकता किसी बात से संतुष्ट सुखी होगी तो किसी बात पर विचलित होगी। समय के अनुसार सब घटित होता है। बस हमें अपने आचरण में सहजता रखना जरूरी है। जो भी करें उसमें ईमानदारी हो। आपके मुख से निकले हर शब्द अमूल्य हों जो दूसरों के लिए प्रेरक हों। किसी को कष्ट हो ऐसी बातें कभी मत कहिए, चाहे सुख हो या दुख। अपने कार्य व्यवहार पर नियंत्रण रखिए। जो जानते हैं उसे पूर्ण मनोयोग से कीजिए और नहीं जानते उसकी जानकारी लीजिए। उचित ज्ञान के बिना कोई निर्णय मत कीजिए। खुद को बेहतर करने का अवसर मत छोड़िए। जिम्मेदारियों के बीच भी अपनी दिनचर्या और सोच सही और व्यवस्थित कीजिए। अच्छे कार्य के लिए प्रत्येक क्षण तैयार रहें। जीवन की इस विविधता में हमें सामंजस्य बनाए रखने के लिए कुछ बातों को उपेक्षित कर चलना पड़ता है। छोटी-छोटी बातों से मन को दुखी न करते रहे। खुद को बनाने के लिए हर दिन प्रयास कीजिए… आगे बढ़ते हुए कभी मन में द्वंद मत रखिए। निर्भीक और निश्चित होकर रहने के लिए काम, क्रोध और भोग विलास पूर्ण जीवन से जितना हो सके, बच कर रहें। मन की सोच ही जीवन को गति देती है। कर्म जैसे-जैसे करते हैं, हमें परिणाम भी वैसे ही मिलता है। संघर्षपूर्ण जीवन से भले ही थकान हो…परन्तु, जीने का असली सबक समस्याओं से जूझकर, जोखिम लेकर और ठोकरों से ही पाते हैं। सचेत मन से हर द्वंद दूर होते हैं। सच्चे मन से किसी कार्य की शुरुआत कीजिए और अंत तक प्रयास कीजिए। मेहनत जो करते हैं, उसका जीवन ही सफल है। सदा रास्ते सरल नहीं होते, बस मन में भाव हो आगे जाने की। मानव जीवन सच में अनिश्चित है, सदैव हमारा वर्चस्व नहीं रहेगा। जीवन से एक दिन सब कुछ हार जाना है। तो जीतने के लिए गलत कदम मत उठाइए। नफरत, बैर और क्रोध, दुश्मनी व छल, षड्यंत्र के बिना ही कर्म पथ पर चलें। सांसारिक जीवन को सुखी-समृद्ध करने के लिए प्रयास जरूरी हैं। मानसिक शांति नष्ट हो जाए इतनी भी लालसाएँ उचित नहीं। अंतर्मन को इस सांसारिक जीवन की चिंताओं से मुक्त रखेंगे। प्राप्त के प्रति कृतज्ञता रखें। ये ज़िन्दगी जीने के साहस को निरंतर प्रबल करते जाएँ। संसार की इस यात्रा में खोने और पाने का कोई अस्तित्व नहीं है। मनुष्य यहाँ रिक्त हस्त आता है और केवल अपने अनुभवों की यात्रा पूर्ण कर प्रस्थान कर जाता है।
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