राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, देहरादून)
संस्मरण 31
गणतंत्र की चुनौतियां
आज 77 वें भारतीय गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर भारत एक ओर अपनी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता, लोकतांत्रिक निरंतरता और विकास की गति का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी ओर कई गंभीर चुनौतियाँ भी सामने हैं। हर भारतीय को अपने अतीत और वर्तमान के साथ राष्ट्र के भविष्य के लिए अपने स्तर पर सकारात्मक पहल/ प्रगति करने की नितांत आवश्यकता है।
वर्ष 1977 (17 साल) में मैं पहली बार NCC का यूनिफॉर्म में सागर परेड ग्राउंड में मार्च पास्ट कर रहा था, उसके कई दिन पहले दिल धड़क रहा था कि कैसे परेड में आगे बढूंगा। समय गुजरा और वर्दी की आन बान शान के आकर्षण से सीधे जिला जेल अधीक्षक नियुक्त होकर 1997 में संपूर्णानंद अखिल भारतीय जेल प्रशिक्षण केंद्र लखनऊ में देश का सर्वोत्तम जेल अधिकारी का सम्मान प्राप्त कर जून 2022 में केंद्रीय जेल अधीक्षक पद से सेवा निवृत्त हुआ।
26 जनवरी 26 गणतंत्र दिवस इस साल की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” पर केंद्रित है, जो राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना को रेखांकित करती है, लेकिन वास्तविकता में देश को कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझना पड़ रहा है।यहाँ भारत के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ संक्षेप में दी गई हैं जैसे आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ती आर्थिक असमानता और अमीर-गरीब की खाई का और चौड़ा होना। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ/शुल्क, भू-आर्थिक टकराव (geoeconomic confrontation), और अनिश्चितता के बीच निर्यात और निवेश पर दबाव।
बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव, रुपये की स्थिरता, और बैंक जमा राशि जुटाने में कठिनाई। महंगाई, बेरोजगारी (खासकर युवाओं में), और ग्रामीण-शहरी असंतुलन अभी भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
साथ ही सामाजिक और संवैधानिक चुनौतियाँ मौलिक अधिकारों (RTI, अनुच्छेद 14, 21, 32 आदि) के प्रति जागरूकता और उनके सक्रिय उपयोग की कमी, जिससे सामाजिक-आर्थिक नुकसान हो रहा है। संविधान की भावना और मूल्यों का क्षरण (erosion of constitutional values) – जैसे संघीय ढांचे में केंद्र का अत्यधिक हस्तक्षेप, सांस्कृतिक विविधता पर दबाव। सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक ध्रुवीकरण का जारी रहना।
पर्यावरण और जलवायु संकट – स्वस्थ पर्यावरण को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सुरक्षा और भू-राजनीतिक चुनौतियाँ जैसे पड़ोसी देशों (खासकर पाकिस्तान और चीन) के साथ तनाव, सीमा विवाद, और 2025 में हुए संघर्षों का असर प्रमुख है।
वर्तमान में साइबर सुरक्षा को भारत का सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है (WEF Global Risks Report 2026 के अनुसार) वैश्विक युद्धों, गठबंधनों में बदलाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भारत की विदेश नीति, घरेलू राजनीति और अर्थव्यवस्था के बीच की रेखाएँ धुंधली हो रही हैं।
लोकतंत्र और संस्थागत चुनौतियाँ
लोकतंत्र की संस्थाओं (न्यायपालिका, मीडिया, चुनाव आयोग आदि) पर बढ़ता दबाव और स्वतंत्रता का सवालहै। राजनीतिक अस्थिरता और आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़े तनाव। आपातकाल जैसे अतीत के सबकों के बावजूद, संसदीय लोकतंत्र पर समय-समय पर गंभीर चुनौतियाँ आती रहती हैं।
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संस्थागत परिपक्वता, संवैधानिक निरंतरता, और नागरिकों की चेतना रही है – जो कई अन्य गणतंत्रों से इसे अलग बनाती है।
77 वें गणतंत्र दिवस पर यह मौका है कि हम उपलब्धियों के साथ-साथ इन चुनौतियों का सामना करने के लिए संकल्प लें, ताकि संविधान की प्रस्तावना में वर्णित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को और मजबूत किया जा सके।
जय हिंद! जय संविधान







