सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा-राजिम
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, देहरादून)
आलेख
‘करुणा का सुख ‘दोहरा’ है—सामने वाले का दर्द कम होता है और हमारी अपनी शांति गहरी’
– सुश्री सरोज कंसारी
—————————————
दया और करुणा हमें हमारी अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के घेरे से बाहर निकालती हैं। जब हम दूसरों के दर्द को महसूस करते हैं, तो हमारे व्यक्तिगत दुख छोटे पड़ने लगते हैं। यह ‘बड़ा परिप्रेक्ष्य’ ही हमारे मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है…दैवीय गुणों को धारण करके ही आत्मीय आनंद की प्राप्ति संभव है। आज सर्वत्र मानवीय भावनाएं धूमिल होती जा रही हैं, मनुष्यता अब दुर्गुणों से युक्त हो गई है। जन्म-मरण के इस चक्र में उलझा इंसान सुख की चाह में न जाने कितने दुखों को पार कर जाता है। विपरीत हालात का सामना करते हुए सही-गलत की सूझबूझ पर विचार न कर पाने, आगे बढ़ने की होड़ में जाने-अनजाने में पाप की दलदल में फंसते जा रहे हैं। दौलत की भूख मिटाने के लिए रिश्तों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जहां मानवता के कल्याण की दिशा में अग्रसर होने की सीख हमारे सत्य-सनातन धर्म, ज्ञानी ऋषि-मुनि, महात्मा-तपस्वी सदियों से देते आ रहे हैं, उन्हें भूलकर आज झूठ, घूसखोरी, छल-कपट, बैर, क्रोध-ईर्ष्या, भोग-विलास और नशे में चूर अपने ही अपनों को मारने-काटने के लिए आतुर हैं। विश्व पटल पर अशांति का वातावरण है, चेहरे में उदासी की अजीब सी लकीरें हैं। चारों तरफ हाहाकार है, निर्दोष की बेवजह हत्या-बलात्कार, बम-बार, परमाणु की ढेर लगाकर खुद को मौत के आगोश में रखे हैं। कब प्रलय हो जाए, कह नहीं सकते! आविष्कार और विकास के नाम पर एक षड्यंत्र का जाल बिछा है। तरक्की के नाम पर भ्रष्टाचार, बेईमानी हर जगह व्याप्त है। झूठे वायदे और प्रचार विज्ञापन के जरिए विदेशी कंपनियां लूट रही हैं। देश की सुरक्षा के ढाल, युवा आज सभ्यता और संस्कृति को भूलकर आधुनिक दिखने और दिखावटी दुनिया में जी रहे हैं। मेहनत करना छोड़, शॉर्टकट रास्ते से काली कमाई कर आतंक, अत्याचार और लूट करने में तनिक भी संकोच नहीं कर रहे हैं। सोचिए! यही हाल रहा तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य क्या होगा? पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे, आज के युग में चारों तरफ इंटरनेट का जाल बिछा है, जिसे सही दिशा में प्रयोग कर सफलता की सीढ़ी चढ़ने की बजाए अधिक मात्रा में इसके दुरुपयोग हो रहे हैं। आज सबसे ज्यादा अपराध इस सोशल प्लेटफॉर्म पर हो रहे हैं। सामूहिक रूप से गैंग बनाकर एक मिशन के तहत विभिन्न अपराधिक कार्यों को बारीकी से अंजाम दे रहे हैं। कैद हैं दुनिया इस मोबाइल में, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यू-ट्यूब के जरिए घर बैठे लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऑनलाइन की दुनिया में हर कदम पर हादसों का मेला है, हर पल इंसान को गुमराह करने का यह एक मजबूत माध्यम बन गया है। कौन, कब और कहां से कैसे फंसा दे, अंदाजा लगाना मुश्किल है? कोई भी मनुष्य जन्म से बुरे नहीं होते, सुखद भविष्य के कल्पनाओं को संजोए सभी बड़े होते हैं। कोई भी दिल से बुरे बनना नहीं चाहते, हर किसी की इच्छा होती है कि एक मर्यादित और सम्मानजनक ज़िन्दगी मिले…सुखी परिवार, मित्र हो, सामाजिक जीवन निर्वहन करे और पद, प्रतिष्ठा, दौलत, शोहरत भरपूर हो, रोटी, कपड़ा और मकान की पूर्ति हो। लेकिन महंगाई, गरीबी, अशिक्षा, जनसंख्या वृद्धि, बेरोजगारी और भी कई समस्याओं के कारण कभी मानसिकता विचलित हो जाती है। मेहनत से सब ख्वाहिशें पूर्ण न होते देख, अधिकांश लोग गलत दिशा में चल पड़ते हैं और पाप की दुनिया में कदम रखने के बाद पीछे मुड़कर देखने का समय नहीं मिलता। क्योंकी इनके जीवन का लक्ष्य सिर्फ भौतिक सुख-सुविधाएँ अर्जित करना होता है। कभी-कभी परिवार के लोगों को भी भनक नहीं लगने देते, वे इतने रुपए-पैसे कहां से लाते हैं? और जब आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, तो ज्यादा पूछना जरूरी नहीं समझते…इंसान तो गलती का पुतला है, मनुष्य जीवन का सफर करते हुए कभी न कभी गलती हो ही जाती है। पर, सिर्फ़ परिस्थिति को कसूरवार मानकर गलती करते रहने से ज़िन्दगी नरक बन जाती है। इसलिए जीवन में परम आनंद की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि सुधार के प्रयास करते रहें और धीरे ही सही, कोशिश कीजिये कि जानबूझकर कोई ऐसी गलती न हो, जिससे किसी का अहित हो। वैसे भी, मानव जीवन का ध्येय आत्मा को शुद्ध रखकर परमात्मा को प्राप्त करना है, लेकिन इस मद-माया मोह के इस संसार में स्व का पूर्ण रूप से सुधार संभव नहीं। नैतिक मूल्यों को अपनाकर दैवीय गुणों को धारण कर, अपने साथ-साथ वैश्विक शांति स्थापित करने में हम योगदान जरूर दे सकते हैं। दैवीय गुण अर्थात अंतरात्मा की पवित्रता है, सृष्टि के हर कण में ईश्वर का वास है। सांसारिक जीवन यापन करते हुए इसमें पूर्ण रूप से न उलझकर ईश्वर के प्रति आस्था, भक्ति, विश्वास रखना और विधि के विधान को स्वीकार करना, रोग, शोक, संताप, भय से परे होकर आत्मकल्याण की दिशा में कार्य करना, आत्मा की शक्ति को पहचानकर मानव से महामानव बनने का प्रयास करते रहना, मन, वचन और कर्म से सात्विक भाव रखना। अगर मनुष्य के रूप में हम दिव्य गुणों को अपनाने में सफल होते हैं, तो मानवता के इतिहास में एक स्वच्छ, सुंदर और मर्यादित जीवन के नव अध्याय का निर्माण होगा, जो भावी पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर होगी। कोई भी काम असंभव नहीं, जरूरत है तो किसी सकारात्मक और श्रेष्ठ विचार को पढ़कर उस पर अनुकरण करने की। जीवन की राह में कई घटनाएं होंगी, लेकिन उस स्थिति में मन को शांत रखें, संयमित होकर सूझबूझ से काम लें। अक्सर देखा जाता है कि किसी प्रकार के अनहोनी होने पर हम अपना सुध बुध खो बैठते हैं, शोक से व्याकुल हो जाते हैं। यही वजह है कि आंतरिक रूप से हम कमजोर होते जाते हैं…जब सुख के दिन हों और आवश्यकता से अधिक भोग की वस्तु एकत्रित हो जाए, किसी चीज की कमी न हो, आप धन धान्य से पूर्ण हों, तब सरल और सहज रहें। मन में दया, करुणा, क्षमा, सहयोग, स्नेह, करुणा और दान के भाव रखें। घमंड न कीजिये कभी, किसी से कुछ लेते रहने की बजाए जरूरतमंद को देते रहें। चाहे स्नेह, प्रेम, अपनापन, वात्सल्य, सहयोग, जो हर इंसान के पास होता है, बांटने से कम नहीं होते, बल्कि बढ़ते हैं। हमेशा अपनी मर्यादा में रहें और व्यक्तित्व को निखारते रहें। साहस, हिम्मत, निर्णय क्षमता और कर्तव्य पालन करते हुए सत्य का साथ न छोड़ें, दृढ़ता से कर्मभूमि में लीन रहें…माता-पिता, गुरु, साधु-संतों, ज्ञानी पुरुषों की आज्ञा का पालन करें, हर किसी के प्रति वफादार रहें, ईमानदारी की राह पर चलें, हर किसी को सम्मान दें। अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए त्याग, तपस्या और समर्पण करने में पीछे न हटें, लालच न करें, जो भी पास है, उसमें संतुष्ट रहें, सदैव प्रसन्नचित रहें, नम्र बनें, उत्साह और उम्मीद को कभी खोना नहीं। कितने भी तेज गम की आंधी क्यों न आए, संस्कृति और सभ्यता को धूमिल न करें, बल्कि इसके रक्षक बनें। दैवीय गुणों को अपनाकर ही दुख के पहाड़ को लांघ सकते हैं, आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। दया वह निवेश है जिसका मुनाफा ‘आत्म-शांति’ है; किसी के घाव भरते ही सुकून सबसे पहले हमारे अपने हाथों को मिलता है।
Pसन्देश – जब आप दयालु होते हैं, तो आप अपने आसपास एक ऐसा वातावरण निर्मित करते हैं। यह सुरक्षित वातावरण अंततः आपकी अपनी मानसिक शांति को सुरक्षित करता है।
—————————————






