विद्यार्थी और ज्योतिष ज्ञान।

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सुमन शर्मा, (अध्यापिका), दिल्ली सरकार।

 

           विद्यार्थी और ज्योतिष ज्ञान।

 

विद्यार्थियों के लिए वर्तमान में जीवन जीने के इतने अधिक अवसर/क्षेत्र खुल गए हैं कि विद्यार्थी, अभिभावक और स्वयं अध्यापक भी असमंजस्य में फंस जाते हैं।

एक विद्यार्थी को अपने जीवन में किस विषय या कार्यक्षेत्र का चुनाव करना चाहिए, जिससे वह जीवन को सफलतापूर्वक जी सके। हमने देखा है कि प्राय: लोग अपने कार्य, व्यवसायों, संबंधों और अलग-अलग जीवन स्थितियों से असंतुष्ट रहते हैं। एक अच्छी खासी उम्र गुजारने के बाद अपने व्यवसाय को और संबंधों को और स्थितियों को बदलते ही रहते हैं।

जीवन के मध्य में आकर ये बदलाव उन्हें ये महसूस कराता हैं कि अब तक उन्होंने अपने जीवन को खराब ही किया हैं।

समय, ऊर्ज़ा, कार्यकुशलता, मेहनत सब बर्बाद की हैं क्योंकि अंतिम रूप से हम वहीं जाकर ठहरते हैं जहाँ हमारा प्रारब्ध लिखा होता हैं। इस संदर्भ में मुझे लगता हैं कि ज्योतिष की भूमिका महत्वपूर्ण हैं l मैं यहाँ अपने प्रबुद्ध साथियों को अंधविश्वासी होने को नहीं कह रही।

पर हाँ, अगर कुछ जानकारियों के साथ हमारा जीवन बेहतर हो सकता हैं तो मेरे विचार से हमें वो जानकारियाँ प्राप्त करके प्रयोग कर लेनी चाहिए क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति एक सुखद व सफल जीवन चाहता हैं। आइए देखते हैं ज्योतिष विद्यार्थियों की मदद कैसे कर सकती हैं ? यहाँ मैं ज्योतिष की कुंडली अध्ययन शाखा के विषय में बात कर रही हूँ।

ज्योतिष एक विशुद्ध विज्ञान हैं। आमतौर पर सामान्य लोगों को इस विषय की जानकारी नहीं हैं इसलिए समाज के एक बड़े वर्ग के लोग इसे अंधविश्वास मान लेते हैं।

मोटे-मोटे रूप में आपको बताना चाहूंगी कि कुंडली के पहले भाव से हम व्यक्ति के व्यक्तित्व, पाँचवे भाव से शिक्षा, दसवें भाव से रोजगार और 11 वें भाव से आय के विषय में जानकारी प्राप्त करते हैं।

कुंडली की बारीकियों में न जाते हुए एक सामान्य उदाहरण द्वारा समझते हैं। यथा – एक व्यक्ति की कुंडली में मेष लग्न हैं। अब मेष राशि का मालिक मंगल हैं। मंगल सेनापति हैं। मतलब – व्यक्ति का सुगठित शरीर होगा, उसमें नेतृत्व के गुण होंगे, उसमें आत्मविश्वासी होगा, व्यक्ति सीधी-सीधी बात कहने वाला होगा, शारीरिक सक्रियता को महत्व देता होगा आदि-आदि।

स्पष्ट हैं अगर विद्यार्थियों को आरंभ से ही ऐसी सामान्य जानकारियाँ हो तो निश्चित रूप से विद्यार्थी, अध्यापक एवं अभिभावक स्वयं की आत्म-पहचान को अधिक स्पष्टता और विस्तार के साथ समझ सकेंगे।

प्राय: जीवन संबंधी निर्णयों के असफल होने के आधारभूत कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं –‘आत्म-पहचान’ का ठीक से निर्माण न होना। यदि एक विद्यार्थी आरंभ से ही अपने व्यक्तित्व को समझ पाए – मतलब अपनी आंतरिक व बाहरी शक्तियों व कमजोरियों को जान ले, अपनी व्यवहारिक प्रवृत्तियों व अभिवृत्तियों को जान ले तो ये जानकारी उसके व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में क्रांतिकारी प्रभाव दिखाएगी। इसी प्रकार कुंडली हम व्यक्ति की शिक्षा प्राप्ति की प्रक्रिया तथा रोजगार के क्षेत्र में संभावित सफलता प्राप्ति के विषय में जानकारी प्राप्त करके अपने विद्यार्थियों, अध्यापकों व अभिभावकों यानि कि समाज व राष्ट्र की मदद कर सकते हैं। इसी श्रृंखला में शेष फिर ……..

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