राजेंद्र रंजन गायकवाड़
(सेवा निवृत केन्द्रीय जेल अधीक्षक)
छत्तीसगढ़।
संस्मरण 19
हिंदी फिल्म और धर्मेंद्र,
(श्रद्धांजलि)
बचपन से मुझे धर्मेंद्र जी की फिल्म बहुत पसंद थीं। उन्हें बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ कहा जाता है, ने अपने 60 से ज्यादा साल के करियर में सैकड़ों फिल्में कीं। उनकी फिल्में एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और रोमांस के बेहतरीन मिश्रण से भरी हैं। मुझे उनकी सबसे अच्छी 10 फिल्में लगी जिनमें सबसे पहले शोले (1975) रमेश सिप्पी की क्लासिक वेस्टर्न, जहां धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया। दोस्ती, बदला और डायलॉग्स की अमर कहानी के साथ शानदार गाना,, ये तूने क्या,, साथ मेरा छोड़ दिया,, छोड़ी दोस्ती,,,
दूसरी फिल्म थी, चुपके चुपके (1975) जिसमें हुलास के साथ कॉमेडी का शानदार नमूना। धर्मेंद्र का प्रोफेसर का रोल हास्य और बुद्धिमत्ता से भरपूर। तीसरी फिल्म सत्यकाम (1969) हृषिकेश मुखर्जी की यह फिल्म नैतिकता और सिद्धांतों पर आधारित है। धर्मेंद्र का सत्यकाम का किरदार सराहनीय लगा जिसे मैने अपने जीवन का आदर्श रोल माना।
चौथी फिल्म हक़ीकत (1964) चेतन आनंद की युद्ध-ड्रामा फिल्म, जहां धर्मेंद्र ने पहली बार लीड रोल किया। भारत-चीन युद्ध की भावुक कहानी और यादगार कैफ़ी आज़मी जी के गीत। मैं ये सोचकर, उसके घर चला था,,, कि आवाज देकर रोक लेगी मुझको,,,
फिर पांचवे नंबर पर सीता और गीता (1972) हीरू दागा की डबल रोल वाली कॉमेडी-ड्रामा। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी कमाल की। छठवें नंबर मेरी पसंदीदा फिल्म थी फूल और पत्थर (1966) धर्मेंद्र की डेब्यू जैसी ब्रेकथ्रू फिल्म। एक्शन और रोमांस का मिश्रण सुपरहिट फिल्म रही।
सातवें नंबर पर मेरा गाँव मेरा देश (1971) राज खोसला की देशभक्ति वाली फिल्म। धर्मेंद्र का एक्शन हीरो रोल यादगार। मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए,,, उनकी आठवीं फिल्म जो मुझे बहुत अच्छी लगी द बर्निंग ट्रेन (1980) रवि चोपड़ा की डिसास्टरफिल्म। धर्मेंद्र का हीरोइक रोल और सस्पेंस थ्रिल और बेहतरीन गीत
इसके बाद नौवीं फिल्म थी यादों की बारात (1973) नसीर हुसैन की म्यूजिकल ड्रामा। परिवार और बदले की कहानी में धर्मेंद्र का इमोशनल भूमिका,,चुरा लिया तुमने जो दिल को
नजर नहीं चुराना सनम ,
बचपन अर्थात मैने 6 साल की उम्र में पूरे परिवार के साथ सावन के महीने में (राखी के दिन) दशमी अनुपमा फिल्म (1966) देखी जो हृषिकेश मुखर्जी की संवेदनशील फिल्म में धर्मेंद्र का प्रेमी का किरदार गहरा और प्रभावशाली था। ये फिल्में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं।
भारत ही नहीं विदेशों में भी सिनेमा प्रेमियों के दिल में धरम जी सदा अमर रहेंगे। (नया अध्याय, देहरादून)







