अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएँ : मौन रहना मृत्यु समान है – सुश्री सरोज कंसारी।

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सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री एवं लेखिका, अध्यापिका

नवापारा-राजिम, रायपुर,छ. ग.।

 

 

 

अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाएँ : मौन रहना मृत्यु समान है – सुश्री सरोज कंसारी।

 

                                               (नया अध्याय, देहरादून)

 

जीवन को एक कविता की तरह सुंदर बनाना हमारा उद्देश्य होना चाहिए, ताकि यह सफर सुहाना हो जाए। पर अक्सर, सही समय पर सही काम और फैसला न कर पाने के कारण हर लम्हा बोझिल हो जाता है। समस्या तब और गहरी होती है जब हम रिश्तों को निभाने में लापरवाही बरतते हैं और अपनी ही जिद में किसी से समझौता नहीं कर पाते। सांसारिक जीवन की ये उलझने जब सिर उठाती हैं, तो इन्हें सुलझाना मुश्किल हो जाता है, और जीवन सुख से परे एक संघर्ष की दास्तां लगने लगता है। इस स्थिति को बदलने के लिए, हमें सचेत प्रयास करने होंगे। जीवन को शुद्ध और सार्थक बनाने का मार्ग है: समय पर सही निर्णय लेना, अहंकार छोड़ना, रिश्तों को संवारना और हर पल में संतोष खोजना। जब हम इन सरल सिद्धांतों को अपनाते हैं, तो जीवन का हर पहलू स्वतः ही एक सुंदर कविता की तरह खिल उठता है। सही मानसिकता से उत्साहित होकर देखिए ! जिंदगी में जीने के लिए कई बहाने है। लेकिन अपने स्वार्थ में ही जब होते हैं तो सिर्फ पछतावा ही मिलता है। भले ही हर किसी को खुश करना आसान भी नहीं लेकिन अपनी जिंदगी को सहज व सरल करने के लिए सही कार्य और हर किसी को सद्व्यवहार देना जरूरी है। जीवन के रास्ते हमेशा सीधे नही होते टेढ़े- मेढे़ भी होते हैं। जीवन क्या है? यह हमारी कल्पना से परे है? जैसे-जैसे हम आगे बढते रहते हैं, इस सांसारिक जीवन में तब अच्छे बुरे दोनो अनुभव मिलते हैं। हर पल को खास बनाने का पूरा प्रयास किजिए और कभी भी तनाव न ले। जितना हो सके हर मुश्किल में रास्ता ढूंढिए। मन में हमेशा शुद्ध विचार रखिए। लेकिन, हर किसी के सामने भोले और एकदम सीधे बनने की कोशिश भी करना ठीक नहीं होता है। क्योंकि जैसे आप निश्छल और पवित्र भाव से लोगो से मिलते हैं और सोचते हैं सामने वाले भी आपसे सही नियत से बात कर रहे हैं यह भी जरूरी नहीं। लोगों को पहचानने की समझ रखना भी जरूरी हैं नहीं तो कभी-कभी आपकी अच्छाई भी बहुत घातक साबित होती हैं। फायदा उठाने का लोग मौका देखते हैं, इसलिए समय परिस्थिति देखकर अपने आप को व्यक्त किजिए ।कहां, कैसे, किससे बर्ताव करना हैं यह जानकारी अवश्य रखिए ?क्योंकि दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग हैं हर किसी को समझ पाना आसान नहीं। इसलिए मजबूत बनिए हर समय भावुक मत रहिए। जो गलत है, उनके लिए कठोर कदम उठाना और सबक सिखाना भी बहुत जरूरी होता है। कभी सरल तो कभी कठिन होना पड़ता है। जीवन का यह सफर है। जब हम किसी दुखद स्थिति से गुजर रहे होते हैं और कोई रास्ता नहीं मिलता है, घबराहट होने लगती है। लेकिन, यही जीवन है। जो परिस्थिति है उसी के अनुसार खुद को ढाल लें। और हार मानने की बजाएं, धैर्य से काम लिजिए। मुसीबत से निकलने के लिए दिमाग को पहले शांत किजिए, तब सोचिए! क्या करना है? हर कदम में अपनी ख्वाहिश, रूचि शौक और पसंद को भी त्याग करना पड़ता हैं। बिना समर्पण के जीवन की श्रेष्ठता को प्राप्त नहीं कर सकते। रिश्तों को संभलने के लिए बहुत कुछ सहकर आगे बढ़ना होता हैं। व्याकुलता, बेचनी और एक भय में जिंदगी गुजरती है। जिसे अपनो की फिक्र होती है, उन्हें समेटने और एक सूत्र में बांधकर रखने के लिए, सबसे पहली शर्त होती है- क्रोध, लोभ, भोग-विलास और छल -कपट इन सब से, पूर्ण व्यवहार से दूर रहना होता है। जितना हम लोगो से जुड़ते हैं, उन्हें निभाने की कोशिश करते हैं। समझने की कोशिश में रहते हैं। और झुकते हैं। उतने ही अंतर्मन से खुशियों को महसूस कर पाते हैं। ये सोचकर की हम किसी के लिए, गलत नहीं किए हैं। लेकिन याद रखिए ! बदले में भी आपको वही व्यवहार मिलेगा, लोग सम्मान करेंगे। तारीफ करेंगे और अपना फर्ज भी आपके लिए निभाएंगे। यह जरूरी नहीं। कुछ वादा तोड़ते हैं और कुछ निभाते हैं। कई ऐसे भी होते हैं, जो कभी आपके समर्पण का मोल नहीं समझ पाते हैं। आप उन्हें जितना भी खुश करने की कोशिश कर किजिए ,वे बदले में सिर्फ दर्द ही देंगे। जीवन के हर पल में विविध चुनौतियों का सामना करने के लिए सबसे ज्यादा हमें आत्म विश्वास की जरूरत होती है। जब हम उम्मीद के साथ किसी कार्य को करते हैं, तब अंदर से एक नई ऊर्जा प्रवाहित होती है। जो प्रेरित करती जीवन के हर पल को खुशनुमा बनाने के लिए। हिम्मत से काम लेकर ही, हम अव्यवस्थित जीवन शैली को सुखद बना सकतें हैं। अपने हर पग में हम एक नया ही परिर्वतन देखते हैं जो कभी आश्चर्य से भरा होता हैं, कभी खूबसूरत तो कभी उदासीन होता है। लेकिन, जब हम मान लेते हैं कि क्षणभंगुर जीवन के हर पल को, हमें आनंदित बनाना है। और पुण्य कर्म की ओर अग्रसर रहना है तो सारी दुविधाएं समाप्त होने लगती है। क्योंकि सदा के लिए कुछ भी नहीं तो व्यर्थ में शोक-संताप व भय से ग्रसित होकर हम इस अमूल्य पल को क्यों बर्बाद करें ? खुशी हो या गम बस सहज रहने की कोशिश किजिए। भावनाओं में ही बहते मत रहिए। जहां आपके आंसू, दर्द और जख्म आपके विचार और अच्छे कार्य का सम्मान करने वाले न हों। वहां रो-रोकर शिकायत करने, अपना दुख बताकर दीन- हीन मत बनिए। रूठे लोग, टूटे सपने, अधुरी ख्वाहिश को लेकर ही मत बैठिए। बस, मजबूत रहकर ही आप, जीवन को सही तरीके से जी सकते हैं। याद रखिए! खुद को दुखी, तन्हा और बेबस कभी मत समझिएगा। हमेशा मनोबल बढ़ाइए। खुद की तारीफ किजिए। ख़ुद से खूब प्रेम करते रहना चाहिए। आप सब कर सकतें हैं। यह खुद से वादा किजिए। तन और मन को स्वच्छ रखिए। ज्यादा किसी बात का पश्चताप मत किजिए। जो हो गया और जिसे याद करके दिल दुखे उस पल को हो सके तो भूलने की कोशिश किजिए। सिर्फ दौड़ते मत रहिए। पद, प्रतिष्ठा व धन-दौलत और रूप- रंग यौवन, रिश्ते-नाते और परिवार के पीछे। कभी-कभी थकान हो जाती है इन सभी से। इसलिए कहीं खुले और शांत, प्राकृतिक वातावरण में शांत बैठकर, सब परेशानियों को भूलकर सुकून को महसूस किजिए। खुद की चाहत को जाने। अपनी जरूररत का ख्याल रखिए। जो प्रिय है, उनसे बात किजिए। जिनसे मीठा, सुखद एहसास हो। उनके करीब रहिए। फिर देखिए! कभी जिंदगी बोरिंग नहीं लगेगी। अनावश्याक तनाव नहीं होंगे। अशांत होने से ही सारी परेशानियों का जन्म होता है। जब हम अपने मन के अनुसार कुछ कार्य करने की सोचते हैं और वह नहीं होता तो, क्रोधित और चिड़चिड़े हो जाते हैं। जिससे एक अजीब सी घुटन होती है। प्रेम के अभाव में ही नफ़रत बढती है। आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी में, स्वस्थ जीवन शैली के निर्माण के लिए, हम सभी को प्रयास करना जरूरी है। जरा सोचिए! दुनिया की सारी खुशियां हमारे कदमों में है। और उन खुशियों को उपयोग करने की हममें सामर्थ्य नहीं तो, सारी चीज बेकार है। यह तो सच कि जीवन निर्वहन के लिए, हर इंसान को धन- दौलत की जरूरत पड़ती है। भूखे पेट हम किसी प्रकार की सुख की कल्पना नहीं कर सकते हैं। लेकिन अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति की राह सही होनी चाहिए। गलत ढंग से कमाया गया कोई भी सुख स्थाई नहीं होता। अक्सर हम अपने कार्य या जिंदगी में किसी की दखल पसंद नहीं करते हैं। लेकिन, बेवजह औरों के सफलता के मार्ग में बाधक बनने में कमी नहीं करते हैं। जैसे हम किसी की बकवास, विवाद और बहस को नहीं सुनना चाहते हैं। वैसे ही हमें भी किसी के साथ व्यवहार भी नही करनी चाहिए। कई बार हम अपनी जिंदगी में निरर्थक बातो का जमाव कर लेते हैं, किसी के ऊपर जबर्दस्ती हक जमाकर। जो आपके साथ जुड़ना नहीं चाहते हैं तो उन्हें मजबूर मत किजिए और जो साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें खुद से दूर मत किजिए। आजकल रिश्ते केवल प्रेम और स्नेह पर आधारित नहीं हैं, बल्कि लोग अक्सर अपनी सुख-सुविधा और स्वार्थ के अनुसार जुड़ते और बिछड़ते हैं। काम निकल जाने पर वे तुरंत बदल जाते हैं।

यह जीवन कई उतार-चढ़ावों से होकर गुजरता है, इसलिए हमेशा भावुक (नाजुक) न रहें, कहीं-कहीं कठोर बनना भी जरूरी है। षड्यंत्रों से भरी इस दुनिया में सदैव सतर्क रहें और आँख मूंदकर किसी पर भरोसा न करें, क्योंकि साजिश करने वाले अक्सर हमारे आस-पास ही होते हैं।

पारिवारिक जीवन में मनमुटाव स्वाभाविक हैं, लेकिन नाराजगी ज्यादा दिन उचित नहीं। अगर कोई अपना जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, तो अपनी ज़िद छोड़ दें। मन दुखी होने पर भी ज़्यादा गमगीन न रहें, वरन् शांत रहकर स्थितियों को सहजता से स्वीकारें।

 

नारी शक्ति, अस्मिता की एक सशक्त प्रतीक :

                          सादर!

 

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