सम्पादक रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी
(नया अध्याय)
कालीमाई दिवारा यात्रा पहुंची सिद्धपीठ कालीमठ, कल धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा समापन।


ऊखीमठः आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अद्भुत संगम मानी जाने वाली भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अपने अंतिम पड़ाव सिद्धपीठ कालीमठ पहुंच गई है। यात्रा के कालीमठ पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा गया है। ढोल-दमाऊं की गूंज, देवी जयकारों और पारंपरिक लोकगीतों के बीच श्रद्धालुओं ने माता के दिवारा का भावपूर्ण स्वागत किया। भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा ने पैदल मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न गांवों में श्रद्धालुओं को दर्शन देकर कालीमठ पहुंची है। यात्रा के दौरान ग्रामीणों ने देवी के दिवारा की विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। कालीमाई की यह दिवारा यात्रा वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें स्थानीय जनमानस की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। दिवारा यात्रा के सिद्धपीठ कालीमठ पहुंचने के बाद आज सायंकाल विशेष पूजा-अर्चना, देवी स्तुति और जागरण का आयोजन किया जायेगा। वहीं कल विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर दिवारा यात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा। समापन अवसर पर हवन, देवी आरती तथा प्रसाद वितरण का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कालीमाई दिवारा यात्रा समिति अध्यक्ष लखपत राणा बताया कि यह यात्रा क्षेत्र में सुख, शांति और प्राकृतिक संतुलन की कामना के उद्देश्य से भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण भी है। यात्रा के समापन को लेकर कालीमठ में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति भाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष 7 दिसम्बर को 15 वर्षो बाद भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया था। दिवारा यात्रा महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने बताया कि भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा ने कालीमठ घाटी, मदमहेश्वर घाटी सहित अगस्तमुनि, रूद्रप्रयाग, धारी देवी, श्रीनगर सहित विभिन्न स्थानो का भ्रमण कर श्रद्धालुओं की कुशलक्षेम पूछकर आशीर्वाद दिया तथा मकर संक्रान्ति पर्व पर अलकनंदा व भागीरथी के संगम स्थल देवप्रयाग में तीर्थ दर्शन व तीर्थ स्नान के बाद दिवारा यात्रा अपने तप स्थल सिद्धपीठ कालीमठ पहुंच चुकी है तथा बुधवार को विशेष पूजा – अर्चना के बाद प्रथम चरण की दिवारा यात्रा का समापन होगा।







