‘गम की इस दुनिया में खुशियाँ चंद बूंदों जैसी अनमोल हैं, इन्हें संजो लो, इससे पहले कि ये ओझल हो जाएं!’

Spread the love

 

सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका

नवापारा-राजिम

रायपुर, (छत्तीसगढ़)

 

 

                (नया अध्याय, देहरादून)

 

आलेख

‘गम की इस दुनिया में खुशियाँ चंद बूंदों जैसी अनमोल हैं, इन्हें संजो लो, इससे पहले कि ये ओझल हो जाएं!’

                 – सुश्री सरोज कंसारी

     ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬

 

खुशी जब भी दस्तक दे, उसे जी भर कर जी लो। ये पल-पल कम होती सांसें गवाह हैं कि कल कभी नहीं आता। हमारा सर्वप्रिय और सर्वोपरि भारत देश एक ऐसा देश है जहां हर पग पर खुशियों की नई सौगात होती है। हर दिन एक त्योहार होता है जो लोगों को एकता के सूत्र में पिरोकर आपस में प्रेम, सौहार्द और अपनेपन का परिचय देता है। मिल-जुलकर अपनी परंपरा का निर्वहन बखूबी करते हैं। परिवारिक भाव से रहते हैं, मन में उत्साह और नई उमंग लेकर किसी भी पर्व को मनाते हैं। कई महत्वपूर्ण पर्व हैं होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, हरेली आदि वैसे ही समय-समय पर मेला मड़ई के आयोजन कर छोटी-छोटी बातों में खुशियों की वजह ढूंढ लेना भारतीय संस्कृति की विशेषता है। छत्तीसगढ़ की एक शक्तिशाली समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा रही है। धान का कटोरा कहलाने वाली छत्तीसगढ़ महतारी की गोद में यह धरा मेहनतकश किसानों के पसीने की बूंद से पल्लवित और पुष्पित होकर धानी चुनर ओढ़कर सदा ही इठलाती है। “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” की उक्ति को चरितार्थ करते हुए विभिन्न स्थानों के कलाकार पारंपरिक गीत और नृत्य को कर्मा, ददरिया, सुवा, पंथी राउत नाचा और पंडवानी के माध्यम से लोक संस्कृति और कला को निखार रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर यह धरा यहां के लोगों को अन्न-धन जल से तृप्त करती है। सीधे-साधे भोले-भाले यहां के लोग अपनी प्राचीन परंपरा को सहेजकर रखे हुए हैं, जिसकी बोली-भाखा मन को मोह लेती है। आसपास कई दर्शनीय स्थल होने के कारण दूर-दराज के लोगों का आना-जाना रहता है…छत्तीसगढ़ का प्रयाग धर्म नगरी राजिम एक पावन तीर्थ के रूप में विख्यात है। जहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और यहां की सौंधी माटी की महक, स्नेह, प्रेम और अपनापन पाकर यहीं रच बस जाते हैं। पैरी-सोढुर और महानदी के संगम तट पर स्थित भगवान कुलेश्वर महादेव और राजीव लोचन मंदिर श्रद्धालुओं के केंद्र बिंदु हैं, जिसके दर्शन से वे धन्य होते हैं। बारह मास यहां भक्ति, श्रद्धा और आस्था की गंगा बहती है। पूजन, कथा, पिंडदान के लिए भीड़ लगी रहती है। प्रतिवर्ष माघ मास की पूर्णिमा को होने वाले मेले की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। जहां हजारों की संख्या में मेलार्थी आते हैं। मनोरंजन की एक अनोखी दुनिया होती है, पूरे पंद्रह दिन। साथ ही विभिन्न दुकानें सजती हैं, जिससे आर्थिक मजबूती प्राप्त करते हैं विक्रेता। साधु-संतों के अमृत वचनों से धर्म-आध्यात्म और ज्ञान की गंगा बहती है। भजन-कीर्तन, यज्ञ-हवन में भक्तगण लीन हो जाते हैं। सुबह से दूरस्थ स्थानों से दर्शनार्थी आते हैं, नदी में पुण्य स्नान के बाद मंदिर दर्शन करते हैं। नदी स्थल पर भंडारे में निशुल्क भोजन की व्यवस्था होती है। वहीं महोत्सव स्थल में विश्राम के लिए बड़े-बड़े डोम बने होते हैं। संध्या के समय लाईटिंग से पूरे मेला स्थल जगमग रोशनी से जुगनू की तरह चमकते हैं। वहीं लक्ष्मण झूले की रोशनी उसमें चार चांद लगा देती है। शाम को संध्या आरती होती है, मुख्य मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दर्शकों को बांधकर रखती है। जिसमें हर दिन एक से बढ़कर एक कलाकार विशाल मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर गदगद हो जाते हैं। झूमते-नाचते कार्यक्रम का आनंद लेते हुए कैसे समय होता है, पता ही नहीं चलता। दर्शनार्थियों के लिए रात्रि कालीन ठहरने की व्यवस्था होने से कुछ दूर के लोग अधिक रात होने पर ठहर जाते हैं। मेला शब्द सुनते ही हृदय में खुशियों की नई तरंग प्रस्फुटित होती है। मानव मन सदा ही आनंद की तलाश में रहता है। यही वजह है कि थकान भरे मन को उत्सव से नई ऊर्जा प्राप्त होती है। जिसमें डूबकर वे अपनी मानसिक थकान दूर कर सुकून के उस पल को सब कुछ भूलाकर जीते हैं। मेला कहने पर ही मानस पटल पर अनायास ही लोगों की भीड़ के दृश्य दिखने लगते हैं। जहां दूरस्थ स्थान के विभिन्न धर्म-संप्रदाय, जाति, मजहब, भाषा और बोली के लोग एक स्थान पर एकत्रित होते हैं। भले ही एक दूसरे से अंजान होते हैं, लेकिन अपने में व्यस्त और मस्त, भेदभाव की कोई लकीर नहीं होती। कहीं झूले में बच्चे मग्न होकर खिलखिलाकर हंसते हैं। वहीं पानी पूरी, भेल, आइस्क्रीम का लुफ्त उठाते युवा वर्ग के झुंड झूले में झूलते हुए कहीं आकाश को छूने की तमन्ना करते हैं, तो कभी गोल-गोल घूमते-चिल्लाते हर प्रकार से आनंदमय माहौल होता है। चूड़ी, बिंदी, कंगन, पायल, झुमके को निहारती महिलाएँ होती हैं…जूते-चप्पल, घड़ी, कपड़े, बर्तन, खिलौने देखते हर वर्ग के लोग। वहीं पर मौत के कुआं देखकर दांतो तले उंगली दबा लेते हैं..कितना सुखद और मनोहारी होता है वह दृश्य, जहां सिर्फ प्रेम की बौछार होती है। नफ़रत की एक बूंद भी वहां नहीं पड़ती। मेले की तरह यह जीवन भी होता है, जैसे मेला साल में एक बार आता है और हमें ढेर सारी खुशियों के पल देकर चला जाता है। रह जाती हैं सिर्फ उसकी यादें और बातें। मेले से लौटकर हम फिर से अपनी दुनिया में कर्मक्षेत्र में लीन हो जाते हैं। दुगुने उत्साह से कार्य करते हैं, जिससे हमें सीख मिलती है कि मनुष्य जन्म भी एक बार मिलता है, जीने के लिए। जिसके हर पल को जीने की कला हममें होनी चाहिए। सारे गम और उदासी को भूलकर अपने आसपास ही खुशियां ढूंढ लेना ही जिंन्दगी है। चाहे अपने हों या बेगाने, उनमें सिर्फ अपनापन होना चाहिए…हर सुबह एक नया अवसर होता है, चौबीस घंटे में कुछ फुर्सत के पल निकालें। अपनों के संग हंसी-ठिठोली करें। खुलकर हंसें, मुस्कुराहट को अपने जीवन का हिस्सा बना लें। अपनी पसंद के कार्य कीजिये। और खुद से वादा करें कि इस अनमोल जीवन को बर्बाद नहीं करेंगे। जो भी आपके सानिध्य में हो, उन्हें जीने की वजह दें। अकेले ही आते हैं इस दुनिया में, लेकिन अपने व्यवहार से ही लोगों के दिल में स्थान बनाने में सफल होते हैं। कटुता किसी को पसंद नहीं, इसलिए इस ज़िन्दगी में मिठास भरने का प्रयास कीजिए। अजनबी दुनिया की भीड़ को चीरकर अपनी एक अलग पहचान बनाइए। उदासी को पास न आने दीजिए। मन, वचन और कर्म से शुद्ध, सात्विक रहें, यह जीवन हर सांस में एक आस है। न जाने कब टूट जाए? उससे पहले ही सतर्क और सचेत रहें। खुशियां बिखरी पड़ी हैं चारों तरफ, उसे दोनों हाथों से समेट लें, सहेजकर रखें, अपनों के स्नेह को। क्योंकि जो बीत गया पल, वो कभी न आएगा लौटकर। क्योंकि हम सब मुसाफिर हैं, आने और जाने का क्रम चलता रहेगा, लोग मिलेंगे और बिछड़ेंगे। किसी बात को लेकर दिल छोटा न करें, खुले दिमाग रखें, स्वतंत्र विचार भरे मन में। एक बहुत ही मधुर संदेशप्रद गीत है, जिसे बार-बार गुनगुनाने का मन होता है… कोई भी खुशी जब आती है, उसे जी भर जी लेना चाहिए…पल-पल घटती सांसें कहती हैं कल का इंतजार न कर, गम की इस दुनिया में खुशियां बूंद भर हैं, उसे जाने न दे। जो करना है आज ही करे, रूठे नहीं किसी से। क्योंकि आज जो हमें मिले हैं, वे वक्त के साथ न जाने कहाँ -कहाँ जाएंगे? “यह नश्वर शरीर और संसार की तमाम सुख-सुविधाएँ मात्र एक झूठी काया और क्षणभंगुर मोहमाया हैं। अंततः सब यहीं छूट जाना है, इसलिए अपनी आत्मा को भक्ति और सद्गुणों से पवित्र बनाइए, क्योंकि केवल आत्मा ही अजर-अमर और अविनाशी है।

 

सन्देश –

जीवन में जब भी छोटी-सी खुशी आए, उसे पूरे दिल से जी लेना चाहिए। हमारी घटती हुई सांसें हर पल यही याद दिलाती हैं कि कल के भरोसे मत बैठो। दुखों के इस विशाल सागर में खुशियाँ तो बस चंद बूंदों की तरह हैं, इन्हें व्यर्थ न जाने दो बल्कि हर लम्हे को यादगार बना लो।”

           —————————————

  • Related Posts

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    Spread the love

    Spread the love  डॉ. सत्यवान सौरभ (पी-एच.डी., राजनीति विज्ञान, कवि, लेखक एवं सामाजिक चिंतक) बरवा, हिसार–भिवानी (हरियाणा)                           …

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    Spread the love

    Spread the love  ब्यूरो फिरोजपुरः  राजीव कुमार                      (नया अध्याय)   https://www.transfernow.net/dl/20260204Th1wQTGp         फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    • By User
    • February 4, 2026
    • 9 views
    एपस्टीन फाइल्स: लोकतंत्र का आईना या सत्ता का कवर-अप?

    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    फिरोजपुर में काउंटर इंटेलिजेंस की तरफ एक तस्कर को काबू कर उसके पास से एक किलो 736 ग्राम हेरोइन और दो ग्लॉक पिस्तौल किए बरामद। 

    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 6 views
    कलेक्टर ने कानड़ क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों का किया निरीक्षण किया।

    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 4 views
    जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन।

    गौरैया

    • By User
    • February 4, 2026
    • 7 views
    गौरैया

    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।

    • By User
    • February 4, 2026
    • 9 views
    डाक्टर शमशेर सिंह बिष्ट की 80वीं जयन्ती को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित।