सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा/राजिम, (रायपुर), छ.ग.
(नया अध्याय, देहरादून)
हौसले की रौशनी !
(कविता)
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हे मनुज,
तू एक मुसाफिर है,
जिन्दगी एक सफ़र है।
तेरे हौसले में ही तो रौशनी है,
हर मुश्किल के बाद एक नई जिंदगी है।
जो ठान लिया तूने, वो मुकम्मल होगा,
बस धीरज रख,
ये सफर भी आसान होगा।
हर जज्बा अंदर ही होता है,
बस उसे जगाने की देर है।
मुश्किलों से नजरें मिलाकर चलोगे
तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाएंगे।
संभलना भी हुनर है,
खुश रहने का हुनर खुद में पालो,
कुछ नया सृजन कर, जिंदगी को संभालो।
डर कर न रुकना, तू आगे बढ़ते जाना,
हर अंधेरी रात के बाद सवेरा है आना।






