सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री-लेखिका-शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा/राजिम,
रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
“कलम की ताकत !”

(कविता)
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कलम की ताकत को भी पहचानो,
जो है सच कागज पर लिख डालो।
झूठ से अब सब पर्दा तुम उठा दो,
मन को अपना पारदर्शी यंत्र बना लो।
जज्बातों को अपनी स्याही से उतारो,
अल्फाजों से सबके दिलों को छू लो।
दकियानूसी रिवाजों को उखाड़ फेंको,
लेखन को ही अपनी आवाज बना लो।
नई सोच से अब इतिहास रच डालो,
किसी के दर्द की मरहम भी बनो।
स्व से ऊपर होकर सब कार्य करो,
दलगत राजनीति से हरदम दूर रहो।
भ्रष्टाचारियों की धज्जियाँ उड़ा दो,
स्वाभिमान अपना कभी भी न बेचो।
नेकी को अपनी अब पहचान बना लो,
भेदभाव की हर दीवार तुम गिरा दो।
हृदय को झंकृत करे वो साज़ बना लो,
शब्दों के मेल से नया एहसास जगा दो।
हर उलझन में राह अपनी बना लो,
डर से जूझकर जीत को जिद बना लो।
सुंदर स्वच्छ सी अपनी छवि बना लो,
भावनाओं के समंदर में गोते लगा दो।
ख्वाबों से निकल हकीकत में जी लो,
मजबूरी में यूँ ही न जीवन गुजारो।
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