डॉ0 हरि नाथ मिश्र
पूर्व विभागाध्यक्ष-अँगरेजी,
का0 सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
अयोध्या, (उ0प्र0)
(नया अध्याय, देहरादून)
श्रमिक (दोहे)
शक्ति-स्रोत हैं श्रमिक सब, यही देश के प्राण।
करें परिश्रम ये सदा, जिससे हो कल्याण।।
खून-पसीना एक कर, फसल उगा मजदूर।
देते जन-जन को यही, प्रचुर अन्न भरपूर।
इनकी सेवा का नहीं, होता कोई मोल।
कभी-कभी तो ये सहें, स्वामी-कड़ुवे बोल।।
शरद-गरम-वर्षा रहे, चाहे जो हो काल।
सह कर मौसम-मार को, करें कर्म हर हाल।।
सभी श्रमिक का मिल करें, आओ हम सम्मान।
गौरव हैं ये देश के, और यही हैं शान।।
श्रमिक देवता तुल्य हैं, इनको करें प्रणाम।
इनके श्रम से ही बढ़े, सदा देश का नाम।
श्रमिक-दिवस शुभ आज है, सबमें हर्ष अपार।
इनको खुशियाँ बाँट कर, सुखी रहे संसार।।







