“स्वयं में स्थित”

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युगपुरुष कविवर सूर्य

आध्यात्मिक विचारक-दार्शनिक-मानवतावादी  

(भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक समानता के संरक्षक)

 

               (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

               “स्वयं में स्थित”

          (आध्यात्मिक-व्यावहारिक कविता

        ======================

 

माफ करना और शांत रहना।  

यही तुझे ताकतवर बनाता है।

 

मन का साक्षी अब होता जा तू,  

असंग रह, बह मत उसके साथ।

  

बस देखता जा तू यह सारा खेल,  

जो हानि और लाभ से भी है परे।

 

संसार में रह पर संसार तेरे भीतर न रहे।

यही समझ, सुलझन व यही ध्यान की है बात।

 

जिस घड़ी मन को तूने समझ लिया,  

उसी घड़ी से खुशी खिल उठे दिन-रात।

 

 

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