नारी को पूजो नहीं, तो कम से कम अपमानित मत करो। यही धर्म है!

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सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका

अध्यक्ष – दुर्गा शक्ति समिति

गोबरा नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)

 

 

            (नया अध्याय, देहरादून)

 

 लेख 

नारी को पूजो नहीं, तो कम से कम अपमानित मत करो। यही धर्म है!

                     :सुश्री सरोज कंसारी 

  ———————————————————–

 

बेटी घर की मुस्कान है, माँ त्याग की मूरत है,

विदुषी ज्ञान की देवी है, नारी ही तो सूरत है।

स्वार्थ-वासना में डूबा जो, पशु से भी नीचे गिरा,

नारी का सम्मान ही असली धर्म है, यही शास्त्रों ने कहा।

 

आज का युग जानवरों का युग है। हमारी नारी के अनेक रूप हैं: बेटी, बहू, स्त्री, माँ, विदुषी, जो आदिकाल से पूजनीय है। नारी का अपमान करना इस दुनिया का सबसे बड़ा पाप है। इंसानियत की सारी हदें पार कर, देश की बेटियाँ एक-एक कर हैवानियत की बलि चढ़ रही हैं। कभी सूनी सड़कों पर, कभी जंगल-झाड़ियों में, उनके जिस्म को नोंचकर बोटी-बोटी कर फेंका जा रहा है। वहशी दरिंदे आज संयम, मर्यादा और कानून का डर भूलकर सरेआम भीड़ के बीच भी एक बेटी को चाकू से गोदकर लहूलुहान कर देते हैं। और बाकी लोग? मूक दर्शक बनकर चीखती-कराहती, मदद के लिए पुकारती बेटी को बचाने के बजाय वीडियो बनाते हैं, फोटो खींचते हैं और उसे वायरल कर देते हैं। बेशर्मी की भी हद होती है। धिक्कार है ऐसे लोगों पर!

 

हिंदुस्तान की बेटी, बहू और माँ वंदनीय, पूजनीय और देवी स्वरूप मानी जाती है, यह हम सब भाषणों में कहते हैं। सिर्फ भाषण देते हैं और वाहवाही लूटते हैं। यदि 130 करोड़ जनता एक होकर हिंदुत्व के संगठन को सही मायने में प्रदर्शित करे, तो किसी माई के लाल की हिम्मत नहीं होगी कि ऐसी बेहूदा हरकत करे। यहाँ तो कोई किसी बेटी की आबरू लुट जाने पर उसे चर्चा का विषय बना देता है। दो मिनट मौन और जगह-जगह मोमबत्ती जलाकर ऐसे श्रद्धांजलि देते हैं, मानो इन्हें बहुत शोक है, मानो ये देश की बेटियों के रखवाले हैं। और कुछ ही दिनों में वही घटना फिर दोहराई जाती है। समझ नहीं आता कि यह खूनी मंजर कब थमेगा? भारत की बेटी कब सुरक्षित होगी? कब तक बेटियाँ बुरी नजर का शिकार होती रहेंगी और कब तक अखबारों की सुर्खियों में कानूनी दाँव-पेच ही चलते रहेंगे?

 

जिहादियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं, क्योंकि वे जान चुके हैं कि मासूम लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाकर अपने कब्जे में लेना बहुत आसान है। देश में सिर्फ कानूनी कार्यवाही होती है, तुरंत सजा की कोई व्यवस्था नहीं। और यहाँ के लोग डीजे बजाकर नाचना तो अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन लाखों की भीड़ में भी एक बेटी की पुकार इन्हें सुनाई नहीं देती। धमकी से डरकर या कानूनी कारवाई से बचने के लिए एक होकर जान बचाने का साहस इनमें नहीं है। इसलिए ये आतंकी संगठन अपने इस मिशन में कामयाब होते जा रहे हैं। और न जाने हर दिन कितनी बेटियाँ बेमौत मर रही हैं।

 

कहते हैं कि किसी भयानक हादसे या अनहोनी को देख-सुनकर सतर्क और जागरूक रहने की सीख मिलती है। श्रद्धा को प्रेम में फँसाकर, उसे पूरी तरह बर्बाद कर, लव जिहाद का घिनौना खेल खेला गया। उसके जिस्म के 35 टुकड़े कर फ्रीजर में रखे गए और एक-एक टुकड़े को अलग-अलग जगह फेंका गया, ताकि कोई सबूत न मिले। यह घटना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। अभी कुछ दिन पहले राजधानी रायपुर में एक 16 साल की नाबालिग को, प्रेम प्रस्ताव न मानने पर, भरी भीड़ में रॉड से मारकर घायल किया गया। वह मदद के लिए दौड़ती रही और वह बेरहम दरिंदा बाल पकड़कर उसे तब तक मारता रहा जब तक वह अधमरी न हो गई। लेकिन मजाल है कि कोई आगे बढ़कर उसे बचाने का प्रयास करता।

 

समझ से परे है कि श्रद्धा तो प्यार में अंधी हो गई और अपने माता-पिता के अरमानों को कुचल गई। अफरोज/इमरान को कोई अफसोस नहीं हुआ। लेकिन वह जाते-जाते देश की हर बेटी को संदेश दे गई: अपने आत्म-सम्मान को बचाकर रखना। सीता सी पवित्र रहना। अनमोल है तुम्हारा जीवन, किसी के प्यार में बहक न जाना। वरना ये दरिंदे सभ्य, शिक्षित और समझदार बेटियों को बर्बाद करते ही रहेंगे।

 

एक और किस्सा साक्षी ने दोहराया। वह तो प्यार में अंधी और बाहरी दुनिया से बेखबर दोनों हो गई। बहुत अफसोस की बात है कि इतना दर्दनाक हादसा और हैवानियत का मंजर देखकर भी वह क्यों नहीं समझ पाई? सब कुछ जानकर भी बेटियाँ वही गलती दोहराती हैं, सबक नहीं लेतीं। और अपनी जिद, फैशन और मनमानी की वजह से प्रेम के दिखावटी मोह में अपना सब कुछ सौंप देती हैं। यह तो मूर्खता है।

 

बचपन से जवानी तक बेटी नाजों में पलती है। जरा सी खरोंच आ जाने पर पूरा घर सिर पर उठा लेती है। डरती है, सहम जाती है, माँ का पल्लू पकड़कर चलती है। ममता की गोद से उतरने के बाद पढ़ाई-लिखाई करने या अपना भविष्य बनाने के लिए वह बड़े उत्साह से घर से बाहर निकलती है। वह भी जानती है माँ का दुलार क्या है, अपना आत्म-सम्मान क्या है। लेकिन घर की दहलीज लाँघते ही किसी के प्यार के चक्कर में पड़कर क्यों वह बरसों से संभाल कर रखी अपनी मर्यादा को पल भर में पार कर जाती है? बहकावे में आकर अपना जिस्म सौंप देती है और अपनी जिंदगी तबाह कर लेती है।

 

भारत की बेटी को अब समझना ही होगा कि जब भी घर से निकले, मन को नियंत्रित करके निकले। समझे कि यह दुनिया शतरंज की चाल है, यहाँ न जाने किस रूप में हैवान खड़े हैं। इसलिए फैशन और आधुनिकता की होड़ में, दोस्ती, मौज-मस्ती और मनोरंजन के नाम पर सूनी जगहों, होटलों और क्लबों में जाने से पहले, किसी के साथ अपनी हर बात शेयर करने और गैरों-अजनबियों को अपना बनाने से पहले विचार करे। कहीं आप बहक तो नहीं रही हैं? कोई आपको धोखा देने की नीयत से तो करीब नहीं आ रहा? अपने माता-पिता से छुपकर, झूठ बोलकर फिल्म देखने को कहीं आप बेताब तो नहीं? अगर आप इन सब बातों की उपेक्षा करती हैं, तो निश्चित ही आप बर्बादी की खाई में गिरने वाली हैं। एक ऐसी दलदल, जहाँ एक बार गिर गईं तो निकलना मुश्किल है। प्यार करने से पहले किसी की नीयत को भाँपने की क्षमता आपमें होनी चाहिए।

 

याद रखना ही होगा अब बेटियों को कि यह कलयुग है, हर कदम पर एक रावण है जो चीरहरण के लिए तैयार बैठा है। अब श्रृंगार कर जिस्म के नुमाइश का समय नहीं, बल्कि संयमित होकर हथियारों से सुसज्जित होने का समय है। आत्मनिर्भर बनने के साथ हर हुनर सीखना ही होगा। और अपनी आबरू की रक्षा के लिए हाथों में बैग, मोबाइल, पानी की बोतल के साथ ही तीर-धनुष, कराटे, भाला और त्रिशूल चलाने की शिक्षा लेना बहुत जरूरी है। कोई कृष्ण नहीं आएंगे आपको बचाने, इसलिए आत्मरक्षा के लिए दुर्गा, काली और चंडी का अवतार धारण करने का समय है। माता-पिता द्वारा दी गई आजादी का इतना भी फायदा मत उठाइए कि उनकी परवरिश शर्मिंदा हो जाए।

 

भारत की बेटी हो, किसी इमरान या साहिल की बाँहों में बर्बाद मत होना। माता-पिता का विश्वास मत खोना। हिंदुस्तान को शर्मिंदा न होना पड़े, मेरे देश की बहादुर बेटियो। लव जिहाद के चक्कर में मत फँसना। दुश्मन की चाल को नाकाम कर दो। पवित्रता का चोला पहनकर लव जिहादियों का अब सर्वनाश कर दो। हिंदुत्व का मान तुम्हें बढ़ाना है। भारत माता को तुम पर नाज हो, ऐसा काम सदा करना। चंद पल की खुशियों के लिए जीवन भर का गम गले से न लगाना। किसी रोमियो के प्रेम में पड़ने से पहले हर बेटी लव जिहाद के बारे में अच्छी तरह जान ले। उनके बुरे इरादों को पहचान ले। उसके बाद भी न समझे तो आपकी मर्जी। फिर दुनिया की कोई भी शक्ति आपको इस भयानक रोग से नहीं बचा सकती। लव जिहाद अर्थात् किसी गलत उद्देश्य की पूर्ति के लिए योजना बनाकर अपने प्रेम के जाल में मासूम लड़कियों को फँसाने के लिए चिकनी-चुपड़ी बातें करना, शादी का प्रलोभन देना, आदर्श हिंदूवादी होने का ढोंग करना, साजिश करना और लड़की को धर्म-परिवर्तन के लिए विवश कर उसका शोषण करना। इस कार्य को वे बहुत ही बारीकी से करते हैं। एहसास नहीं होने देते कि वे कोई षड्यंत्र कर रहे हैं। पहले लड़की के बारे में पूरी जानकारी एकत्रित करते हैं: कहाँ रहती है, क्या करती है, किसके साथ आती-जाती है? उसके व्यवहार आदि के बारे में जानकारी लेते हैं। फिर धीरे से करीब आकर इतनी सफाई से अपने मकसद को अंजाम देते हैं कि कोई भी लड़की मकड़ी के जाल की तरह फँस जाती है, जहाँ से निकलने का कोई रास्ता ही नहीं। आज हर बेटी को जानना जरूरी है कि लव जिहाद एक बेहद खतरनाक आँधी है, जिसमें न जाने आज तक कितनी ही मासूम बेटियाँ उलझकर मौत की घाट उतर गईं। ताकि आने वाली युवा पीढ़ी को इस दूषित षड्यंत्रकारी कार्य में लिप्त होने से बचाया जा सके। माता-पिता, गुरु और बड़े जो कहते हैं, वे कभी गलत नहीं होते। लेकिन आज युवावस्था में पहुँचने के बाद अधिकतर लोग भटक जाते हैं, बहक जाते हैं। उनका कहना नहीं मानते और वही करते हैं जो वे चाहते हैं। उनकी जिद और अश्लील व्यवहार उन्हें ले डूबता है। बाद में अफसोस के लिए अवसर नहीं मिलता। समय रहते संभल जाइए, इसी में भलाई है। सुनो बेटियो! लव जिहाद भयानक भूकंप है, जो सिर्फ प्रलय को जन्म देता है।

जानवरों का युग है ये, इंसानियत मर न जाए,

नारी सृष्टि का आधार है, ये बात घर-घर पहुँच जाए।

पूजो नहीं तो मत पूजो, पर अपमानित मत करना,

जिस घर में नारी रोए, वहाँ देवता भी वास न करना।

 

आज का युग सचमुच जानवरों का युग होता जा रहा है। इंसान के भीतर की संवेदना, करुणा और मर्यादा धीरे-धीरे मर रही है। स्वार्थ, वासना और हिंसा ने मनुष्य को पशु से भी नीचे गिरा दिया है। हमारी नारी केवल एक देह नहीं, वह सृष्टि का आधार है। उसके अनेक रूप हैं: बेटी के रूप में वह घर की मुस्कान है, बहू के रूप में वह कुल की मर्यादा है, पत्नी के रूप में वह जीवन का संबल है, माँ के रूप में वह त्याग की मूर्ति है, और विदुषी के रूप में वह ज्ञान की देवी है। आदिकाल से ऋषि-मुनियों ने नारी को पूजनीय कहा है, क्योंकि नारी के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है। जिस समाज में नारी का अपमान होता है, वह समाज भीतर से खोखला हो जाता है। नारी का तिरस्कार करना केवल एक स्त्री का अपमान नहीं, बल्कि पूरी मानवता, संस्कृति और धर्म का अपमान है। इसलिए शास्त्र कहते हैं: नारी का अपमान इस दुनिया का सबसे बड़ा पाप है। जिस घर, समाज या देश में नारी रोती है, वहाँ देवता भी वास नहीं करते।

 

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