संवाददाता कन्नौज (उ. प्र.): दीप सिंह
(नया अध्याय)
रामखेड़ा की किसान पंचायत: खेतों की पीड़ा से बदलाव की पुकार।
कन्नौज: जनपद के छिबरामऊ ब्लॉक स्थित ग्राम रामखेड़ा में शुक्रवार को आयोजित किसान पंचायत केवल एक संगठनात्मक बैठक नहीं थी, बल्कि यह ग्रामीण भारत की उस बेचैनी की सशक्त अभिव्यक्ति थी जो आज खेती-किसानी के सामने खड़ी चुनौतियों से उपजी है। भारतीय किसान यूनियन भानु, प्रतिनिधि मंडल कन्नौज के तत्वावधान में आयोजित इस पंचायत में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर अपने अनुभव, समस्याएं और अपेक्षाएं खुलकर सामने रखीं।
दोपहर एक बजे से तीन बजे तक चली इस पंचायत में राष्ट्रीय संगठन मंत्री अमन यादव, राष्ट्रीय सचिव आरपी ठाकुर, कानपुर मंडल अध्यक्ष अमित कुमार राजपूत तथा नवनियुक्त तहसील अध्यक्ष युवा मोर्चा हिमांशु यादव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। किसानों ने सबसे प्रमुख रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि सरकारी निर्देशों के बावजूद पहले से लगे मीटरों को अब तक पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित नहीं किया गया है। किसानों ने मांग की कि पुराने मीटरों को बहाल किया जाए और इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि ग्रामीण उपभोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव न बने।
पंचायत में खाद संकट भी गंभीर चिंता का विषय बना रहा। किसानों ने बताया कि यूरिया और डीएपी की उपलब्धता आज भी बड़ी समस्या है। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था आधुनिक तकनीक की दिशा में सकारात्मक कदम अवश्य है, किंतु ग्रामीण अंचल के अनेक किसान अभी तकनीकी संसाधनों और डिजिटल प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे में खाद की उपलब्धता को पहले की तरह सरल, सहज और सुलभ बनाए रखने की मांग स्वाभाविक रूप से मुखर हुई।
किसानों की चर्चा केवल तात्कालिक समस्याओं तक सीमित नहीं रही। पंचायत में यह स्पष्ट स्वर उभरा कि जब तक फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित नहीं होगा और खेती मानसिक तनाव से मुक्त नहीं होगी, तब तक आधुनिक कृषि व्यवस्था का सपना अधूरा रहेगा। किसानों ने आय दोगुनी करने के सरकारी संकल्प को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने, कृषि ऋण माफी तथा स्वतंत्र किसान आयोग के गठन की मांग रखी। उनका मत था कि ऐसा आयोग किसानों को अपनी उपज का मूल्य निर्धारण करने का अधिकार देगा और सरकार को सीधे खरीद व्यवस्था लागू करने की दिशा में प्रेरित करेगा।
बैठक में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पक्ष भी सामने आया। किसानों ने चिंता जताई कि कुछ असामाजिक तत्व किसान संगठनों के नाम का दुरुपयोग कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इस विषय पर पदाधिकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन देकर आवश्यक कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया। यह संकेत है कि किसान केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने संगठन की विश्वसनीयता और सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रति भी सजग हैं।
पंचायत के दौरान संगठन विस्तार की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी। हिमांशु यादव को ग्राम अध्यक्ष रामखेड़ा से पदोन्नत कर तहसील अध्यक्ष युवा मोर्चा बनाया गया। जयप्रकाश को तहसील सचिव, रणवीर सिंह यादव और जगमोहन सिंह को जिला सदस्य, सुरेंद्र फौजी को ग्राम अध्यक्ष रामखेड़ा, अरविंद यादव को ग्राम प्रवक्ता, कुबेर यादव और प्रदीप कुमार को ग्राम सदस्य तथा महाराम एवं भूरे सिंह को ग्राम उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। साथ ही लगभग दो दर्जन किसानों ने संगठन की सदस्यता ग्रहण कर सामूहिक शक्ति को और मजबूत किया।
बैठक में चिंटू राठौर, रावेंद्र शर्मा, विनय गुप्ता, अरशद खान, रामकुमार यादव, रामानंद गुप्ता, आलोक यादव, लक्ष्मण सिंह, मोहम्मद फैजान, प्रशांत, नासिर और बिट्टू यादव सहित अनेक किसान और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
रामखेड़ा की यह किसान पंचायत इस बात का प्रमाण बनी कि गांव का किसान आज केवल अपनी समस्याएं गिनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाधान की दिशा में संगठित होकर अपनी आवाज को मजबूत कर रहा है। पंचायत के अंत में किसानों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। यही संकल्प भविष्य की ग्रामीण चेतना और कृषि परिवर्तन की नई दिशा का आधार बन सकता है।







