खुलकर हँसो! जीवन को बहने दो!

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दार्शनिक कविवर सूर्य

 

        (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

कविता :

खुलकर हँसो! जीवन को बहने दो!

—————————————

खुल कर हँसो तो!

महसूस करोगे कि भीतर सब शांत हो गया है।

 

हँसी, मुस्कुराहट ही 

वह असल ताकत है

जो मन को हल्का रखती है 

और जीने का हौसला देती है।

 

अनावश्यक विचारों से

ज़रा आजाद होकर तो देखो।

 

जीवन को सहज बहने तो दो

मन को रोज हल्का, खाली करो।

 

खुलकर हँसो! जीवन को बहने दो!

 

 

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