गजल

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राजेंद्र रंजन गायकवाड 

(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)

              छत्तीसगढ़

              (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

गजल

जिंदगी से, दोस्ती कर ली मैंने,

हर दर्द को, गले लगा लिया मैंने।

हँसी में छुपा के, रोया बहुत दिन,

सिसकियों से, दोस्ती कर ली मैने

अरमाँ बिखरे, रास्तों पर बार -बार

टूटे सपनों से, महल बना लिया मैंने।

गम ने सिखाया, मुस्कराने का राज,

जहर पी के भी, सच छुपाया मैंने।

हर साँस में, बस एक ही दुआ है “रंजन”

खालिस जिंदगी से प्यार कर लिया मैंने।

“राजेन्द्र” कहता है, दिल की बात सबसे,

दुनिया से लड़ना, अब छोड़ दिया मैंने।

 

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