मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश भट्ट
(नया अध्याय, देहरादून)
युवा कांग्रेस नेता गोपाल भट्ट ने जारी बयान में कहा।
अल्मोड़ा: SSJU में लगातार अनियमितताएँ, छात्र हित की अनदेखी—कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन जवाब दें
पिछले तीन वर्षों में लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों के कारण सवालों के घेरे में है। जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति सतपाल बिष्ट दे इस्तीफा
आज तक एक भी समस्या का समाधान नहीं कर पाए कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
BCI ने विधि संकाय की मान्यता 2 वर्षों से अनुमित नहीं दी लॉ पाठ्यक्रम की मान्यता का मामला सामने आया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मान्यता मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जिस दस्तावेज के आधार पर यह दावा किया जा रहा है, उसे सार्वजनिक नहीं किया गया है जिससे सत्र पहले ही लेट हो चुका हैं।
विश्व विद्यालय छात्रों का BCI को नाम पर अतिरिक्त शुल्क लिए जाने की बात भी सामने आई है। हमने छात्रों ने संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की थी,
इसलिए लगातार छात्र संख्या घट रही हैं विश्वनीयता विo विo कम होते जा रही हैं।
16 अगस्त को आयोजित B.Ed Entrance Exam की Answer Key जारी होने के बाद कई विद्यार्थियों द्वारा प्रश्नों और उत्तरों को लेकर आपत्तियाँ दर्ज कराई जा रही हैं। यदि परीक्षा बनाने और आयोजित कराने की पूरी प्रक्रिया विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में होती है, तो ऐसी आपत्तियाँ और कथित गलतियाँ आखिर क्यों सामने आ रही हैं? विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में इतनी लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।
विश्वविद्यालय में समय पर प्रवेश नहीं, परीक्षाओं में देरी, परिणामों में देरी, विकास कार्यों में अनियमितताओं के आरोप, शिक्षक रोस्टर को लेकर सवाल, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एवं तैनाती से जुड़े विवाद और विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारियों को लेकर लगातार गड़बड़ियां होते आई है।
मल्टी-पर्पज कार्यों सहित ऐसे कार्य, जो निर्धारित शैक्षणिक दायित्वों से अलग हैं, अतिथि शिक्षकों से करवाए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। यदि इन सब मानकों के विपरीत कार्यों के लिए कुलपति को विशेषाधिकार प्राप्त हैं तो उनका उपयोग छात्र हित, शैक्षणिक गुणवत्ता और विश्वविद्यालय के विकास के लिए होना चाहिए,।
आज स्थिति यह है कि Mass Communication, BBA सहित स्वीतपोषित कई पाठ्यक्रमों में पर्याप्त नियमित शिक्षकीय व्यवस्था को लेकर सवाल हैं, जबकि विद्यार्थियों से पूरी फीस ली जा रही है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित कक्षाएँ, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम मिलना उनका अधिकार है।
विश्वविद्यालय की छात्र संख्या लगातार न्यूनतम स्तर की ओर जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्षों में छात्र हित में ऐसी कौन-कौन सी ठोस उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं, जिनसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत हुई हो?
ठेकेदारी, खरीद, निर्माण कार्य, नियुक्तियाँ और अन्य वित्तीय मामलों में यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है तो पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने में विश्वविद्यालय प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
कुलपति से सवाल सीधे हैं—
छात्रों से पूरी फीस लेकर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समय पर परीक्षा-परिणाम क्यों नहीं मिल रही हैं।
BCI मान्यता से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
B.Ed Entrance Exam की Answer Key बड़े स्तर पर गड़बड़ियां आपत्तियाँ क्यों सामने आ रही हैं?
शिक्षक व्यवस्था और अतिथि शिक्षकों से संबंधित इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं?
विकास एवं खरीद कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित क्यों नहीं की जा रही?
कोर्ट के आदेशों की अनसुनी क्यों।।
और सबसे महत्वपूर्ण—
यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इन सभी मामलों में पूरी तरह सही है, तो वह प्रत्येक आरोप और सवाल का दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक रूप से जवाब क्यों नहीं देता?
कुलपति जी को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि विश्वविद्यालय की वर्तमान स्थिति की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी कौन लेगा।
अब बहाने नहीं, जवाब चाहिए।
अब आश्वासन नहीं, छात्र हित में ठोस कार्रवाई चाहिए।
यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र हित में काम करने में असमर्थ है और लगातार विवादों का समाधान नहीं कर पा रहा है, तो कुलपति को अपना पद छोड़ना चाहिए।
SSJU को राजनीतिक संरक्षण या व्यक्तिगत हितों का केंद्र नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य का विश्वविद्यालय बनाना होगा।
छात्र हित सर्वोपरि — पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य। छात्र हित में छात्रों की गूंज संघर्ष जारी रहेगा।।।







