सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका
रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
“जख्म हर किसी के पास हैं, बस मरहम बनो”
: सुश्री सरोज कंसारी
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जब हम किसी दर्द से गुजरते हैं, तब एहसास होता है कि दर्द की घड़ी कितनी भारी होती है। जीवन का प्रत्येक पल मुश्किलों से भरा होता है। आँखों में नमी, दिल में बेचैनी और मन में निराशाओं का अंबार होता है। जो दर्द में हैं, उन्हें ही पता है कि जख्म कितना गहरा है। शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी व्यक्ति जख्मी होते हैं। हर दिल में न जाने कितने जख्म होते हैं। जिन्दगी के हर मोड़ पर एक नई परेशानी होती है। जख्म देने वालों की कमी नहीं, आज मरहम लगाने वालों की जरूरत है। जिंदगी के हर पग पर आपको गमगीन लोग मिल जाएंगे, जो एक बूंद खुशियों के लिए न जाने कितने दर्द सहते हैं। कोई अधूरी ख्वाहिश के साथ जीता है। किसी को दूर तक चलने के बाद भी मंजिल नहीं मिलती। कोई अपनों से ठुकराया हुआ है। आज एक-दूसरे का साथ निभाने में लोग पीछे हैं।
कभी किसी के जख्म पर मरहम लगाकर देखिए ! मन को सुकून मिलेगा। आपके भी दर्द कम होंगे। हर समस्या का समाधान है, पहले हम सहयोग के लिए आगे तो आएं। हमें अपनी ज़िन्दगी से, औरों से शिकायतें बहुत हैं, पर क्या हम सच में किसी के काम आते हैं? उनके आंसू पोछते हैं? हृदय का दर्द सुन पाते हैं? किसी की भावनाओं को समझ पाते हैं? अनकहे दर्द को देख पाते हैं? शायद हम पहले अपना सुख और स्वार्थ देखते हैं, फिर किसी से उम्मीद क्यों करें कि कोई आपका साथ दे, समझे, सुने? दर्द तो सभी को होता है, हम अपना ही अधिक क्यों महसूस करते हैं? हम औरों की करुण पुकार सुनने में असमर्थ हो रहे हैं, यही वजह है कि अपने दुख में अकेले हैं। जो सभी के दर्द में शामिल होते हैं, उन्हें सांत्वना देते हैं, दुख में साथ देते हैं, हिम्मत बढ़ाते हैं, उनके साथ सभी का प्यार और आशीर्वाद होता है।
देने वाले हमेशा अमीर होते हैं। सबसे बड़ा धर्म किसी के दर्द में मरहम लगाना होता है। दुख दूर करने से मानसिक शांति मिलती है। दुख में किसी को अपने होने का एहसास देना भी बहुत बड़ा सहारा होता है। दर्द को सुन लेने से उन्हें कुछ राहत मिलती है। हाँ, छोटी-छोटी मदद करके भी हम जीवन को सरल और सुखी बना सकते हैं। जख्मों को कुरेदने से बेहतर है उनमें मरहम लगाना। जितना हो सके खुशियाँ बांटते रहिए। किसी की आलोचना मत कीजिए। अपने हर पल को सही कार्य में लगाइए। समस्या तो हर किसी के पास है, हो सके तो आप समाधान बनिए। दुखी मन में बहुत सी उलझनें होती हैं। उन पर शब्दों के कटु प्रहार मत कीजिए। मीठे शब्दों से प्यार का स्पर्श दीजिए। दुख में मन को मजबूत रखने का साहस दीजिए। जीने की नई उम्मीद देते रहिए।
काव्य:
”इन्सानियत जिन्दा रहनी चाहिए,
बीज इस धरा पर बोया जो।
इन्हीं पौधों से फिर सुंदर,
एक बाग बनकर रहेगा।”
मनुष्यों द्वारा किए गए छोटे-छोटे नेक प्रयास और सद्भावना के बीज, भविष्य में एक सुन्दरम्, शांतिपूर्ण एवं अखंड वैश्विक समाज का निर्माण अवश्य करते ही हैं। इंसान स्वयं को सबसे बड़ी हानि स्वयं ही पहुंचाता है। यदि हम क्षमा करते रहेंगे, तो मन सदा हल्का रहेगा।






