सी ए शंकर अंदानी
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
देशप्रेम की भावना “स्वतंत्र गजल”
काफिया आ की गूँज
और रदीफ प्रेम।
देशप्रेम
मिट्टी ने दिल में दीप जला दिया — प्रेम,
भारत ने जीवन को सजा दिया — प्रेम।
तिरंगे की शान में सिर झुका रहे,
हर साँस ने अपना धर्म निभा दिया — प्रेम।
सीमा पर वीरों ने लहू बहाया,
माँ भारती का मान बढ़ा दिया — प्रेम।
जाति-धर्म के भेद सभी मिट जाएँ,
एकता का संदेश सुना दिया — प्रेम।
गाँव-गाँव में खुशहाली के फूल खिलें,
मेहनत ने नया सपना दिखा दिया — प्रेम।
नदियाँ, पर्वत, खेत हमारे गौरव हैं,
प्रकृति ने भारत को सजा दिया — प्रेम।
भूखे के घर रोटी पहुँचे, दीप जले,
सेवा ने मानवता को जगा दिया — प्रेम।
ज्ञान की ज्योति हर मन में जलती रहे,
शिक्षा ने अज्ञान मिटा दिया — प्रेम।
भारत की धरती पर शांति सदा रहे,
विश्व को हमने राह दिखा दिया — प्रेम।
देश रहे सर्वोपरि जीवन की राह में,
दिल ने बस भारत को अपना बना लिया — प्रेम।





