प्रा.डॉ. शंकर घनशामदास अंदानी
(आचार्य, सी ए.)
अहिल्या नगर, महाराष्ट्र
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
दीपावली का प्यार
दीप जले तो घर-आँगन में उजियारा छा जाए,
दीपावली का प्यार सभी के दिल को भा जाए।
माँ के हाथों की मिठास में ममता मुस्काए,
पिता के स्नेह की छाया हर दुख दूर भगाए।
भाई-बहन के प्रेम से रिश्तों में रंग भरें,
हँसते-हँसते सारे मिलकर खुशियों के दीप धरें।
दादी की मीठी बातों में संस्कारों की ज्योति,
बच्चों की प्यारी हँसी में खिलती नई प्रभाती।
रूठे हुए रिश्ते फिर से प्रेम से जुड़ जाएँ,
मन के सारे शिकवे-गिले दीपों संग मिट जाएँ।
हर घर में हो प्रेम, कहीं न कोई अकेला हो,
हर निर्धन के जीवन में खुशियों का मेला हो।
मंदिर की घंटी बोले, मन में श्रद्धा जागे,
सेवा का एक दीप जलाकर मानवता आगे भागे।
अंधकार चाहे जितना हो, प्रकाश हार न माने,
सच्चाई की राह पर चलना दीप हमें सिखलाए।
प्रेम बाँटें, खुशियाँ बाँटें, यही पर्व की शान,
दीपावली का प्यार बने हर दिल की पहचान।
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