राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
हां मैं रोज लिखता हूं,,
(कविता )
दिखावे और शोर से कोसों दूर है सफ़र मेरा,
खामोशी की छांव में, सज रहा है घर मेरा।
नहीं जरूरत जमाने को कुछ कर बताने की,
मेरी कहानी है खुद से खुद को ही बनाने की।
रोज दिल पर उतरते हैं आधे -अधूरे विचार,
चुपचाप देखता हूं, बदलता अपना संसार।
एक दो रचना लिखकर, सबक रोज लेता हूं,
वक़्त के समंदर में नैया सहजता से खेता हूं।
रफ्तार चाहे धीमी हो, पर कदम डिगते नहीं,
असली हस्ताक्षर कभी बाजारों में बिकते नहीं।
आज मैं चुपचाप हूं, कल इतिहास बताएगा,
मेरा मौन ही एक दिन खुशी का राग गाएगा।
सफ़र में शोर नहीं करता, बस आगे बढ़ता हूं,
एक नई गजल, एक नया लेख रोज गढ़ता हूं।






