राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
(लेख)
ढोंग-धतूरा संस्कृति कैसे रोके?
आजकल पाखंड, अंधविश्वास, और दिखावे की संस्कृति को समाज से समाप्त करने के लिए व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। इस कुप्रथा को रोकने के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:
– शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) का प्रसार
– बच्चों को बचपन से ही तार्किक सोचना सिखाएं।
– स्कूलों में केवल किताबी ज्ञान न देकर ‘क्यों और कैसे’ पूछने की आदत विकसित करें।
– विज्ञान के चमत्कारों और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझाएं।
-कड़े कानूनों का निर्माण और क्रियान्वयन:
– ढोंगी बाबाओं, तांत्रिकों और जादू-टोना के नाम पर ठगने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनने चाहिए।
साथ ही अंधविश्वास विरोधी कानूनों (जैसे महाराष्ट्र का जादू-टोना विरोधी कानून) को पूरे देश में सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
मीडिया और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी स्पष्ट हो, टीवी चैनलों पर अंधविश्वास, भूत-प्रेत और तथाकथित चमत्कारी विज्ञापनों के प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर अफवाहों और पाखंड को बढ़ावा देने वाले अकाउंट्स और वीडियो को रिपोर्ट और ब्लॉक किया जाना चाहिए। वैचारिक और सामाजिक जागरूकता अभियान ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में नुक्कड़ नाटक, विज्ञापनों और सभाओं के जरिए लोगों को जागरूक किया जाए।
लोगों को यह समझाया जाए कि मानसिक या शारीरिक बीमारी का इलाज तांत्रिक नहीं, बल्कि डॉक्टर कर सकते हैं। दिखावे (VIP संस्कृति और आडंबर) पर रोक धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में फिजूलखर्ची और बड़े-बड़े दिखावों की जगह सादगी को महत्व दिया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिष्ठित लोगों को खुद आडंबरों से दूर रहकर एक मिसाल पेश करनी चाहिए।







