नौ वर्ष की आयु से मां दुर्गा की प्रतिमा गढ़ रहे मुजफ्फरपुर जिले के उज्ज्वल कुमार सहनी, कला और श्रद्धा का अद्भुत संगम।

Spread the love

 

ब्यूरो मुजफ्फरपुर (बिहार): कुमार संदीप

 

            (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

नौ वर्ष की आयु से मां दुर्गा की प्रतिमा गढ़ रहे मुजफ्फरपुर जिले के उज्ज्वल कुमार सहनी, कला और श्रद्धा का अद्भुत संगम।

 

 

        मुजफ्फरपुरः   साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की पावन धरा मुजफ्फरपुर ने सदैव प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों को जन्म दिया है। इसी सांस्कृतिक विरासत को अपनी सृजनशीलता से समृद्ध कर रहे हैं मुजफ्फरपुर जिले के अखाराघाट अंतर्गत नाजीरपुर निवासी प्रकाश सहनी के सुपुत्र उज्ज्वल कुमार सहनी। उनकी कलात्मक अभिरुचि और मां दुर्गा के प्रति अगाध श्रद्धा का अनुपम परिचय इस बात से मिलता है कि वे मात्र नौ वर्ष की आयु से ही प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर अपने हाथों से मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण कर उनकी आराधना करते आ रहे हैं।

 

     उज्ज्वल कुमार सहनी ने बताया कि बचपन में विभिन्न स्थानों पर आयोजित दुर्गा पूजनोत्सवों में मां भगवती की मनोहारी प्रतिमाओं के दर्शन करते हुए उनके अंतर्मन में भी प्रतिमा निर्माण की अभिलाषा जागृत हुई। इसी बालसुलभ प्रेरणा ने धीरे-धीरे उनकी रुचि को साधना का स्वरूप प्रदान कर दिया। मां दुर्गा की प्रतिमा स्वयं गढ़ने और विधिवत पूजा-अर्चना करने की उनकी इच्छा आज एक सुंदर परंपरा बन चुकी है।

 

                उनके लिए प्रतिमा निर्माण केवल एक कलात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और आत्मिक संतोष से जुड़ी साधना है। मिट्टी को आकार देकर मां भगवती की प्रतिमा साकार करना उनकी लगन, धैर्य और सृजनात्मक प्रतिभा का परिचायक है।

 

     इस वर्ष भी शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उज्ज्वल कुमार सहनी गायत्री शक्तिपीठ के समीप मां दुर्गा की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में तल्लीन हैं। उनकी यह साधना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, जो यह संदेश देती है कि जब किसी कार्य के प्रति श्रद्धा, लगन और समर्पण का भाव हो, तो बाल्यावस्था में अंकुरित हुई छोटी-सी अभिलाषा भी कालांतर में विशिष्ट पहचान बन सकती है।

 

                उज्ज्वल कुमार सहनी की यह कला न केवल मां भगवती के प्रति उनकी अटूट आस्था को अभिव्यक्त करती है, बल्कि मुजफ्फरपुर की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपरा को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है। निश्चय ही, ऐसे युवा अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक निष्ठा के माध्यम से भारतीय परंपराओं की ज्योति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

  • Related Posts

     शांत रहो, पर कमजोर नहीं

    Spread the love

    Spread the love  सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका नवापारा/राजिम रायपुर, (छत्तीसगढ़)                         (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)             …

    नवी पिल्ले : न्याय के लिए संघर्ष को मिला नोबल सम्मान।

    Spread the love

    Spread the love  विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ (पूर्व मुख्य अभियंता) भोपाल, मध्य प्रदेश                 (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)   नवी पिल्ले : न्याय के लिए…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    आधुनिक गढ़वाली कविता पर विमर्श संगोष्ठी आयोजित।

    • By User
    • October 11, 2026
    • 5 views
    आधुनिक गढ़वाली कविता पर विमर्श संगोष्ठी आयोजित।

     शांत रहो, पर कमजोर नहीं

    • By User
    • October 11, 2026
    • 10 views
     शांत रहो, पर कमजोर नहीं

    नवी पिल्ले : न्याय के लिए संघर्ष को मिला नोबल सम्मान।

    • By User
    • October 11, 2026
    • 7 views
    नवी पिल्ले : न्याय के लिए संघर्ष को मिला नोबल सम्मान।

    मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर भाजपा-कांग्रेस की सियासी परीक्षा।

    • By User
    • October 11, 2026
    • 9 views
    मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर भाजपा-कांग्रेस की सियासी परीक्षा।

    सेना के सिपाही से भारतीय प्रेस परिषद तक, संघर्ष और साधना का सफर।

    • By User
    • October 11, 2026
    • 9 views
    सेना के सिपाही से भारतीय प्रेस परिषद तक, संघर्ष और साधना का सफर।

    विगत दिवस सिवट्जर लैंड के सम्मानित राष्ट्रपति के भारत आगमन पर जिम्मेदारी संभालने वाले भारत सरकार के मंत्री  अजय टम्टा

    • By User
    • October 11, 2026
    • 7 views
    विगत दिवस सिवट्जर लैंड के सम्मानित राष्ट्रपति के भारत आगमन पर जिम्मेदारी संभालने वाले भारत सरकार के मंत्री  अजय टम्टा