राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
कविता
शब्द, भाव और विचार
शब्दों के छोटे पाँवों से,
एक गहरा भाव जनमता है,
जैसे मिट्टी के गोदी में,
कोई कोमल बीज पनपता है।
अधरों से निकले शब्द कभी,
बस मौन विसर्जन होते हैं,
पर जब छू लेते हृदय-तल,
तब भाव समर्पण होते हैं।
इक भाव जगाता है भीतर,
करुणा, ममता या प्रेम नया,
फिर उसी भाव की उंगली थाम,
एक सुंदर राह पे चल दिया।
विचारों का यह ताना-बाना,
फिर एक नया रूप लेता है,
एक सुंदर पावन सोच बन,
जग को नई दिशा देता है।
शब्दों से उपजे सुंदर भाव,
विचारों का श्रृंगार बने,
इस जग की सूनी मरुभूमि में,
सच्चाई का आधार बने कविता!






