आर.सूर्य कुमारी
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
क्या सचमुच चालाक नेता हैं राहुल गांधी।
राहुल गांधी आज के समय में सबसे ज्यादा “चालाक” राजनेता माने जाते हैं। लेकिन वह चालाकी कैसी जो जनता की आँखों से छिपे ही नहीं। उनकी हर रणनीति कुछ ही दिनों में सबके सामने आ जाती है।
आज देश एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। चारों तरफ से चुनौतियाँ हैं। खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश की ओर से लगातार भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। दोनों देश चाहते हैं कि भारत अपने सनातन और संवैधानिक मूल्यों से हट जाए। उनकी अपनी आंतरिक स्थिति कमजोर है, फिर भी वे अपनी पूरी ताकत और संसाधन भारत के खिलाफ साजिशों में लगा रहे हैं।
एक तरफ पाकिस्तान आतंकवाद को हथियार बना रहा है तो दूसरी तरफ बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ की समस्या बढ़ रही है। इन साजिशों का शिकार हमारे ही सीधे-सादे युवा हो रहे हैं, जिन्हें बहला-फुसलाकर देश विरोधी गतिविधियों, जैसे पत्थरबाजी, लव जिहाद, आगजनी और हमारी आस्था का अपमान करने के लिए उकसाया जा रहा है। देश के भीतर छिपे कुछ तत्व भी इसी मानसिकता का समर्थन कर रहे हैं।
अब सवाल उठता है कि इसमें राहुल गांधी की भूमिका कहाँ आती है। संबंध यह है कि देश की इन गंभीर चुनौतियों को जानते हुए भी राहुल गांधी उन ताकतों को अनजाने में बल दे रहे हैं जो देश को कमजोर करना चाहती हैं। वे राष्ट्रवाद की भावना को आहत करने वाले बयानों और कृत्यों से बाज नहीं आ रहे हैं।
वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसका सबसे बड़ा कारण है उनका कांग्रेस की पुरानी राजनीति में जकड़ा होना। समय बदल गया है, देश बदल गया है, लेकिन कांग्रेस अपनी पुरानी तुष्टिकरण की नीतियों को छोड़ने को तैयार नहीं है। राहुल गांधी भी उसी पुराने दांव-पेंच से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सच को सच कहने से वे बचते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि ऐसा करने पर उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी।
कांग्रेस का इतिहास भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का रहा है। आज सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्रों में जो भी भ्रष्टाचार दिखता है, उसकी नींव कांग्रेस के शासनकाल में ही पड़ी थी। उसे जड़ से खत्म करने के लिए आज कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है, इसीलिए जब राहुल गांधी को देश की जनता नकारती है तो वे विदेशों में जाकर भारत की छवि को खराब करने और अपनी पार्टी को चमकाने की कोशिश करते हैं। इस प्रयास में वे कई बार ऐसी लक्ष्मण रेखा पार कर जाते हैं जो देशहित के खिलाफ जाती है।
फिर भी उम्मीद बाकी है। उम्मीद है कि राहुल गांधी में जागृति आएगी। जिस सच्चाई से वे आज मुंह मोड़ रहे हैं, उसे वे स्वीकार करेंगे। देश के भीतर मौजूद अराजक तत्वों से खुद को अलग करेंगे। उनकी बहन भी उसी राह पर चल रही हैं, प्रशासन से टकराव और धक्का-मुक्की करके वे अपना ही नुकसान कर रही हैं। (विनायक फीचर्स)






