सुश्री सरोज कंसारी कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका नवापारा/राजिम रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
आलेख
फूल जैसे नाजुक ही नहीं, वज्र बनो!
जिसे कोई तोड़ न पाएं।
दुनिया में अगर अपने आत्म सम्मान के साथ जीना हैं, तो फूल जैसे नाजुक ही नहीं, वज्र बनो! जिसे कोई तोड़ न पाएं। अने मन- वचन और कर्म को दृढ़ता से किजिए, अडिग रहिए अपने इरादों में, सच का की राह बेझिझक चलिए।
कोमलता मनुष्य जीवन का सबसे सुंदर गुण हैं। प्रेम-करुणा, दया -क्षमा और अपनत्व के भाव से एक दूसरे से जुड़ते हैं।आपसी सहयोग से हर कार्य सहजता से होते है।
वज्र बनने का अर्थ हैं -एक अनुशासित जीवन। अपने लक्ष्य औऱ संकल्प के प्रति जागरूक रहना। किसी विपरीत परिस्थिति में भी घबराना नहीं। गलत को सहना नहीं। जीवन के हर क्षेत्रो में मजबूती के साथ खड़े होना। जिसे मजबूरी झुका न पाएं। मेहनत करो। आंधी- तूफान औऱ बारिश का सामना करो। काँटों के बीच भी रास्ते बना लेना। निराशाओ में भी उम्मीद थामे रहना। अनावश्यक विचारों को दिल- दिमाग से निकालिए।
दिल कोमल रखिए,पर दिमाग से काम लिजिए। दूसरों की सलाह अवश्य सुनिए! पर खुद के लिए सही क्या हैं? इस बात पर चिंतन कर फैसला लीजिए। आँख बंद कर विश्वास करने का समय नहीं।
मौन रहकर सदकर्म करिए, बेवजह शोर से बचिए।
हर काम को पूरे मन से किजिए, जो भी जिम्मेदारी हैं उसे निभाइए, अधूरा कुछ भी मत छोड़िए।
अपने अस्तित्व की रक्षा किजिए.मन को कुछ देर बहलाने औऱ विचलित करने वाले कारणों से खुद को दूर करो।
वज्र बन जीवन जीना सीखिए, भागिए मत! डरकर, न खोए रहिए गम में। सांसारिक जीवन एक कठिन मार्ग हैं जहां, संयम _सद्भाव, संस्कारित होने के साथ निर्भीक होना जरुरी हैं.हर तरह के भय से मुक्त रहिए। दुविधा में जीना छोड़िए! जो सही उसे किजिए,जो गलत उसे छोड़िए।
आज जीवन की व्यस्तता के बीच हमें जीने के लिए खुद को मजबूत आधार देना है। आंतरिक औऱ बाह्य परिस्थियों में सामंजसय बनाएं रखने के लिए वज्र बनिए। जीवन के विभिन्न क्षेत्र हैं, जहां_ समस्याओं के बीच हमें जीवन निर्वहन करना होता हैं। भीतर वज्र बनकर ही हम बाहरी चुनौतियों से लड़ सकतें हैं। दुखी होने की कई वजह के बीच भी अपनी छोटी -छोटी खुशियों को पा लेना है। सांसारिक जीवन हर पल एक नई जंग हैं। बाहर शांत होकर भीतर एक तूफान होता हैं,काम- क्रोध, मद- माया, लोभ -मोह ईर्ष्या का। भीतर वर्ज बनो औऱ खुद को मजबूत करो, तभी का सामना कर सकतें हैं इस उलझन से भरी जिंदगी का। खुद से खुद का एक वादा करो, कभी निराश होकर गलत कदम मत उठाना। जीवन आसान नहीं, बस कठिनाइयों से निकलने की कला हमें सीखना हैं। मोम बन पिघलते मत रहिए। वक्त आएं तो पत्थर बना प्रहार भी करना हैं। बस सुनते मत रहो, गलत जो कहे, उन्हें जवाब देने की भी क्षमता रखिए। कम शब्दों में अधिक कहिए। निंदा मत करो गलती को स्पष्ट कहो। जो ठान लिया उसे करके दिखाइए।वज्र बनिए औऱ पूरे जोश -होश औऱ उत्साह से जीना सीखिए।






