ब्यूरो बिहार: कुमार संदीप
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विषाद से विवेक की यात्रा है गीता :
डॉ. विद्यासागर उपाध्याय
हरिद्वार: पौराणिक दक्ष मंदिर स्थित परमार्थ ज्ञान मंदिर परिसर के कम्युनिटी हॉल में आयोजित आचार्यकुल के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में प्रख्यात दार्शनिक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने श्रीमद्भगवद्गीता एवं अवसाद प्रबंधन विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में व्याख्यान दिया। सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों से आए सर्वोदय विचारकों एवं प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उन्हें आचार्य विनोबा भावे स्मृति सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया।
अपने व्याख्यान में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल मोक्ष का शास्त्र नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, आत्मबोध और जीवन-दृष्टि के परिष्कार का भी महत्त्वपूर्ण दर्शन है। महाभारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन का विषाद मानवीय मानसिक संघर्ष का दार्शनिक रूपक है। भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश अर्जुन को मोह से विवेक, निराशा से कर्तव्यबोध और मानसिक विषाद से कर्मशीलता की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने कहा कि गीता का निष्काम कर्मयोग, समत्वयोग तथा अभ्यास और वैराग्य का सिद्धांत व्यक्ति को जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संतुलित रहने की प्रेरणा देता है। अवसाद प्रबंधन का उद्देश्य केवल मन को प्रसन्न करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को उसके अस्तित्व का बोध कराना, जीवन की सार्थकता को पुनर्स्थापित करना और उसे सकारात्मक कर्म की ओर प्रेरित करना है। डॉ. उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि गीता का दर्शन आधुनिक मनोवैज्ञानिक परामर्श का विकल्प नहीं, बल्कि उसके साथ समन्वित होकर व्यक्ति को आंतरिक शक्ति, संतुलन और जीवनबोध प्रदान करने वाला शाश्वत चिंतन है। उन्होंने कहा कि आचार्य विनोबा भावे की सर्वोदय-दृष्टि भी मानवीय चेतना के इसी विस्तार को अभिव्यक्त करती है, जिसमें व्यक्ति का आत्मकल्याण समाज के कल्याण से जुड़ता है। सम्मेलन में आयोजक मंडल ने डॉ. उपाध्याय के दार्शनिक चिंतन और प्रतिष्ठा के आधार पर आचार्य विनोबा भावे स्मृति सम्मान-2026 प्रदान किया। सत्र का विषय प्रवेश ग्राम टुडे समाचार समूह के संपादक डॉ शिवश्वर दत्त पाण्डेय ने किया। अतिथि परिचय मिथिला क्षेत्र के मुजफ्फरपुर से पधारे विद्वान डॉ विजय कुमार पाठक प्रसून ने किया। आंतरिक वक्ता के रूप में काशी से डॉ विनोद कुमार वर्मा ने सहभागिता की। अध्यक्षता डॉ धर्मेन्द्र कुमार तिवारी एवं संचालन डॉ इंद्रजीत तिवारी ने किया।






