उदय नारायण सिंह मुजफ्फरपुर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
विश्व के प्रथम गणतंत्र बृज्जिसंघ ( बज्जिकांचल) की भाषा बज्जिका में आज शरद- कौमदी पर सादर भेंट हैं मेरा बज्जिका गीत –‘आई अंगना में उतरल हए चान’
– बज्जिका गीत
आई अंगना में उतरल हए चान
आई अंगना में उतरल हए चान,
देखके बुढ़बो के मन भेल जुआन।
हिनकर मुंह हए चानो से सुंदर
हिनका छवि से लजाइअ पुरंदर
हए नऽ कोनो हिनका समान।
आई अंगना में उतरल हए चान।
देह हिनकर महमह करइअ
चलइत हतन हिन तऽ हवा गमकइअ
आई चमेली के गंध भेल पुरान।
आई अंगना में उतरल हए चान।
हिनकर टीका ऐना चमकइअ
बादल में जेना बिजली दमकइअ
ई लेइत हए विरहिनिया के जान।
आई अंगना में उतरल हए चान।
हिनकर वाली ऐना झुलइअ
कली के जेना भौरा चूमइअ
एकर हए हुनका बड़का गुमान।
आई अंगना में उतरल हए चान।
हिनकर डांर ऐना लचकइअ
जेना पोखरी मे कमल डोलइअ
हिन आई बुढ़बो के ले लेथिन जान।
आई अंगना में उतरल हए चान।






