ब्यूरो बिहार: कुमार संदीप
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काव्य-साधना और साहित्यिक चेतना के संगम से गुंजायमान हुई नटवर साहित्य परिषद् की मासिक कवि गोष्ठी।
मुजफ्फरपुर: साहित्य, संवेदना और मानवीय मूल्यों के संवर्धन के उद्देश्य से रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट, छोटी सरैयागंज, मुजफ्फरपुर के सभागार में नटवर साहित्य परिषद् के तत्वावधान में मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरे का गरिमामय आयोजन हुआ। वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक की अध्यक्षता तथा डॉ. नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी के संचालन में आयोजित इस साहित्यिक अनुष्ठान में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन-दर्शन, सामाजिक सरोकार, प्रकृति-प्रेम, नारी-सम्मान, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय संवेदनाओं को स्वर प्रदान किया।
गोष्ठी का शुभारंभ आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीत के सस्वर पाठ से हुआ, जिसे वरिष्ठ कवि अंजनी कुमार पाठक ने प्रस्तुत किया। इसके पश्चात काव्यधारा प्रवाहित हुई और उपस्थित श्रोता साहित्य के भावपूर्ण संसार में निमग्न होते रहे।
गोष्ठी के संयोजक डॉ. नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी ने अपनी रचना “शहर में आकर वो गाँव ढूँढ़ता है, अपने आँगन में वो छाँव ढूँढ़ता है” के माध्यम से ग्राम्य जीवन की आत्मीयता और मानवीय जड़ों की स्मृति को अभिव्यक्त किया। कवि ओमप्रकाश गुप्ता ने “आँसू की बुनियाद पर इमारत बन रही है, कफन का भी अच्छा कारोबार हो रहा है” के माध्यम से सामाजिक विडंबनाओं पर प्रहार किया। अध्यक्ष अंजनी कुमार पाठक की पंक्ति “जब तक है जीवन, सुख-दुःख है रहना” ने जीवन की शाश्वत सच्चाई का बोध कराया।
कवि राजीवेंद्र किशोर ने नारी की श्रद्धामयी गरिमा को स्वर दिया, वहीं अरुण कुमार तुलसी ने अल्पज्ञान और महानता के संबंध को अपनी रचना में रेखांकित किया। मोहन कुमार सिंह की पंक्ति “कोई दिल में उतर जाता है, कोई दिल से उतर जाता है” ने मानवीय संबंधों की गहराई को स्पर्श किया।
बाल कवयित्री रिद्धि मोहन ने “भारत हमारा जान से प्यारा है” के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना व्यक्त की, जबकि सिद्धि मोहन की रचना “मौसम है प्रकृति के निराले” ने प्रकृति की विविध छटाओं को सजीव किया। पंडित विट्टर रानदेव ओझा ने माया-मोह में भटके मनुष्य की स्थिति को अपनी रचना में प्रस्तुत किया। हास्य कवि अचानक ईश्वर की रचना “डायमंड बन गया था, अब गोल्ड हो गया” ने हास्य का वातावरण निर्मित किया। कवयित्री मुन्नी चौधरी ने जीवन की अंतिम घड़ियों की संवेदनशील अनुभूति को स्वर दिया, जबकि सतीश चंद्र पटेल की कश्मीर, आतंकवाद और राष्ट्रीय ओज पर केंद्रित रचना ने श्रोताओं में राष्ट्रभावना का संचार किया। सभी रचनाओं को श्रोताओं की भरपूर तालियाँ प्राप्त हुईं।
इस साहित्यिक आयोजन में नागरिक मोर्चा के महासचिव मोहन सिन्हा, नंदकिशोर पोद्दार, सुरेंद्र कुमार, पप्पू निशात, हीरालाल गुप्ता, अजय कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं श्रोता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. नर्मदेश्वर चौधरी ने समस्त कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। तत्पश्चात अध्यक्ष की अनुमति से आगामी आयोजन तक गोष्ठी स्थगित की गई।
यह काव्य-संगम इस भाव का साक्षी बना कि साहित्य केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज की चेतना, संवेदना और आत्मबोध को जागृत करने वाली साधना है। ऐसी साहित्यिक गोष्ठियाँ नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ समाज में मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना की ज्योति प्रज्वलित करती हैं।






