संजय सोंधी (संयुक्त निदेशक) शिक्षा निदेशालय दिल्ली सरकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
लैटिन अमेरिका से ग्लोबल साउथ तक: 2026 के ब्राजीलियाई राष्ट्रपति चुनाव का ऐतिहासिक महत्व और नए राजनीतिक मायने।
अक्टूबर 2026 के ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव का अंतिम परिणाम केवल एक देश का जनादेश नहीं, बल्कि इक्कीसवीं सदी की वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में सामने आया है। चार अक्टूबर को हुए पहले दौर के मतदान में 47 प्रतिशत वोट हासिल कर सीनेटर फ्लेवियो बोल्सनारो ने बढ़त बनाई थी, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला डा सिल्वा 45 प्रतिशत वोटों के साथ पिछड़ रहे थे। हालांकि, 25 अक्टूबर को हुए अत्यंत कड़े और ऐतिहासिक रन-ऑफ मुकाबले में लुला ने अपनी रणनीति बदलते हुए शानदार वापसी की और 6,42,56,232 वोट (51.79%) हासिल कर फ्लेवियो बोल्सनारो के 5,98,26,041 वोटों (48.21%) को मात दी। लगभग 44.3 लाख से अधिक वोटों (3.58%) के स्पष्ट अंतर से मिली इस चुनावी जीत ने ब्राजील के इतिहास में पहली बार यह रिकॉर्ड बनाया कि पहले दौर में पिछड़ने वाला उम्मीदवार दूसरे दौर में बाजी पलटकर राष्ट्रपति पद पर काबिज हुआ है। 80 वर्षीय लुला डा सिल्वा का अपने राजनीतिक जीवन में चौथे कार्यकाल के लिए चुना जाना वैश्विक राजनीति के लिए दूरगामी संकेत संदेश लेकर आया है।
लैटिन अमेरिका के संदर्भ में, यह जीत क्षेत्र में प्रगतिशील और वामपंथी ‘पिंक टाइड’ (गुलाबी लहर) के दूसरे चक्र को स्थापित करती है। ब्राजील पूरे महाद्वीप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और राजनीतिक केंद्र है; इसलिए वहां लुला के नेतृत्व का बना रहना कोलंबिया, चिली, अर्जेंटीना और बोलिविया जैसे पड़ोसी देशों में सामाजिक कल्याण, मजदूरी सुरक्षा और एकीकृत व्यापार नीतियों को नई मजबूती देता है। इसके अलावा, अमेज़ॅन वर्षा वनों का अधिकांश हिस्सा ब्राजील में होने के कारण वैश्विक पर्यावरण संरक्षण और क्लाइमेट एक्शन नीतियों को भी एक निरंतरता और स्थिरता मिली है।
वैश्विक वामपंथ और प्रगतिशील विचारधारा के लिए इस जनादेश का बड़ा महत्व यह है कि इसने साबित कर दिखाया कि दक्षिणपंथी लोकलुभावनवाद और ध्रुवीकरण की राजनीति को केवल जनहितकारी नीतियों, बुनियादी सामाजिक योजनाओं और लोकतंत्र की रक्षा के संगठित अभियानों से सफलतापूर्वक पराजित किया जा सकता है। जब दुनिया के कई हिस्सों में दक्षिणपंथी लहर हावी हो रही थी, तब ब्राजील के मजदूरों, युवाओं और विविध वर्गों ने समावेशी और कल्याणकारी राज्य व्यवस्था के मॉडल को अपनी स्वीकृति दी है।
ग्लोबल साउथ और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दृष्टि से यह परिणाम बेहद रणनीतिक है। लुला हमेशा से ब्रिक्स (BRICS) संगठन को मजबूत करने, विकसित और विकासशील देशों के बीच आर्थिक संतुलन बनाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की जोरदार वकालत करते रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बीच, ब्राजील द्वारा एक स्वतंत्र, गुटनिरपेक्ष और तटस्थ विदेश नीति अपनाना विकासशील देशों को वैश्विक पटल पर एक शक्तिशाली आवाज प्रदान करता है। लुला की यह वापसी यह स्पष्ट करती है कि ब्राजील किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने के बजाय ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा करने में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।






