जाग्रत आत्मा का चिंतन जारी रखिए

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सुश्री सरोज कंसारी                                             लेखिका एवं कवयित्री                                         नवापारा राजिम,                                                  रायपुर (छ. ग)

 

                    (नया अध्याय, उत्तराखण्ड                                              (w) 6395080071

 

                               आलेख                                                                    _______

           जाग्रत आत्मा का चिंतन जारी रखिए

                        : सुश्री सरोज कंसारी 

 

 

      दुनिया में अधिकतर पीड़ा का कारण आज एक-दूसरे की भावनाओं को नहीं समझ पाने से होता है। किसी की मजबूरी को सुन लीजिए, वक्त पर साथ दीजिए। मीठे बोल से किसी के परेशान मन को उत्साहित कीजिए। आज हर इंसान को मानसिक सहारे की जरूरत है, भीतर से हर कोई किसी न किसी बात से परेशान है। संतुष्ट हो जाइए कभी इस जीवन से और जो है, उसे स्वीकार कर लीजिए।

 

                         निस्वार्थ हो जाने से हर चिंता दूर होती है। जब तक हम सिर्फ अपना लाभ देखेंगे, कभी मन तृप्त नहीं हो पाएगा। औरों की खुशी के लिए भी जीने की आदत रखिए, यह जरूरी है। जीवन में कुछ कठिनाइयों को हम निस्वार्थ होकर सरल कर सकते हैं। स्वार्थ के बिना रिश्ते निभाने से भी मन का बोझ दूर होता है। कई बार हम सोचते हैं कि हम अकेले ही प्रेम-व्यवहार और सहयोग देते हैं, पर बदले में हमें कुछ नहीं मिलता। पर याद रखिए, आपकी अच्छाई आंतरिक सुकून देती है। जितना हम नकारात्मक सोचते हैं, उतना ही मन भटकता है। हर परिस्थिति में सही बने रहने में ही हमारी भलाई है।

 

                           निस्वार्थ रहने में ही असली सुख है। बिना मतलब के भी लोगों से जुड़िए। प्रेम और करुणा बरसाते रहिए हर किसी के लिए। सबकी सोच अपनी जगह है, पर आपकी सोच हमेशा श्रेष्ठ हो, यह याद रखना। प्रेमपूर्ण प्रार्थना की पुकार बेहद शक्तिशाली होती है, दुनिया की कोई शक्ति उसे हरा नहीं सकती। खुद तकलीफ में रहकर दूसरों के लिए मरहम बनिए, आत्मिक आनंद की प्राप्ति होगी। इस संसार में आकर खोने का भय पूरी तरह त्याग दो, मन के हर संदेह दूर हो जाएंगे। बात चाहे कितनी भी उलझी क्यों न हो, बस खुद पर विश्वास रखो।

 

            जब सांसारिक जीवन से मन थक जाए तो अपने भीतर की दुनिया में जाओ, जहां आप निर्भीक होंगे, वहां आपकी सोच और ख्वाहिश होंगी। थोड़ी देर हर दिन शांत होकर संवाद कीजिए। ध्यानमग्न रहिए कुछ देर खुद के साथ, अपनी सोच को नया मोड़ देने के लिए। इस सांसारिक यात्रा से थोड़ी देर विश्राम लीजिए। अंतर्मन में जाकर आत्मबोध करने से व्याकुल मन शांत होता है। मन में हर पल कई विचार आते हैं। ध्यान रखिए, जो विचार योग्य हैं, उस पर सार्थक चिंतन कीजिए। जो विचार आपकी मानसिकता को तनाव से भर दें, उसे जाने दीजिए। रोकिए मत, दिल में किसी दर्द से भरे विचार को, नहीं तो जख्मी हो जाएंगे।

 

          तुम सब कुछ नहीं कर सकते, पर जो कर सकते हो उसे पूर्ण और अच्छी मानसिकता से कीजिए। शिकायत मत कीजिए किसी बात की। जो है आपके पास, उसका सम्मान कीजिए। महत्व समझिए जीवन में मिली हर चीज का। आज के इस पल को व्यर्थ मत कीजिए। स्वयं की शक्ति और सामर्थ्य को पाने के लिए तुम्हें कहीं जाना नहीं है, बस हर पल खुद को जागृत करना है, सुप्त नहीं होना है। जो चाहते हो उसे करना है।

 

          तुम संसार की इस भीड़ में खुशी, सुकून और शांत जीवन को ढूंढने की अक्सर भूल करते हो, जबकि तुम खुद खुशियों के स्रोत हो। बस याद रखो, अपने आत्मबल से तुम जीवन के शोक, संताप और भय से आगे निकल सकते हो।

 

       तुम ब्रह्मांड की इस शक्ति को कभी खुद में महसूस करना, तुम्हें अपने अंतर्मन में एक दिव्य अलौकिक ज्योति दिखेगी। जब मन में कोई बात गहराई तक जाती है तब हम जो सोचते हैं, वह हमें सच करने के लिए नई राह दिखाती है। जब दुख में मन के दरवाजे बंद कर लेते हैं, कुछ सोचना-बोलना, सुनना-समझना नहीं चाहते, तो आप सिमट जाते हैं सिर्फ दर्द में, जो और असहनीय हो जाता है।

 

              तुम्हारे भीतर वह सब है जो पाना चाहते हो, जिसकी कल्पना तुम करते हो। चाहत के सफर की मंजिल तुम्हारे भीतर है। तुम्हारी सोच, कार्य और हिम्मत ही तुम्हें आगे बढ़ने में सहयोगी हैं, बस डरिए मत जीवन की चुनौतियों से। जीवन का यह अमूल्य क्षण है, इसे साकार करो। जितना हो सके जीवन के हर पल को जीने की कोशिश कीजिए। बाधाओं को पार करने का साहस करो। मिटाते चलो नफरतों को, बढ़ाते चलो कदम सहयोग के लिए। थाम लो उन्हें जो लड़खड़ा रहे हैं। रोशन करो उनकी जिंदगी जो अंधेरे में जीने के लिए विवश हैं। मनोबल दो उन्हें जो टूट चुके हैं। कहने का तात्पर्य यही है कि ज्यादा चिंता-बहस और विवाद करने के बजाय स्वतंत्र होकर खुलकर इन लम्हों को खुशनुमा बनाकर रहना चाहिए।

 

 

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