बीएल भूरा चन्द्र शेखर आजाद नगर भाबरा, मध्यप्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
युवा पीढ़ी जड़ों से दूरी
जड़ से कटी शाखा जैसे, भटकी है युवा पीढ़ी,
मोबाइल की चकाचौंध में, अटकी है युवा पीढ़ी।
दादा-दादी की कहानी, अब किसे सुहाती है,
रील्स और स्टेटस में ही, रातें कट जाती है।
ढोल-ढोलकी की थाप पर, पैर क्यों नहीं थिरकते,
अपनी बोली अपना गीत, क्यों नहीं अब फूटते।
जंगल की पगडंडी भूले, मॉल की राह चले,
अपनी संस्कृति को छोड़, पराई चाल चले।
जिसने जड़ को छोड़ा, वो सूखा ही रह गया,
बिरसा के सपनों को, वो भूला ही रह गया।
अब डीजे के जोर में,वो बात कहां है
संस्कारों की खुशबू,वो रात कहां है।
लौट आओ जड़ों की ओर, पुकारती है माटी,
तभी बचेगी संस्कृति, तभी बचेगी थाती।
परथी भाई भूरा का सपना, फिर से गूंजेगा,
जब युवा अपने गाँव की, ओर ही मुड़ेगा।







