बच्चों को मिली कानूनी सुरक्षा की जानकारी।
गुप्तकाशी में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’
के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम।
सिविल जज ने पॉक्सो, ऑनलाइन सुरक्षा और गुड टच-बैड टच पर किया जागरूक, अभिभावकों को भी सतर्क रहने की सलाह।
ऊखीमठः राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा नई दिल्ली के निर्देशों और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रुद्रप्रयाग की ओर से डॉ. जैक्स वीन नेशनल स्कूल, गुप्तकाशी में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तहत विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में सिविल जज संतोष पश्चिमी मुख्य अतिथि रहे। उनके साथ पैरा लीगल वालंटियर शिव सिंह नेगी, थाना गुप्तकाशी के उप निरीक्षक दर्शन कुमार देवली, हेड कांस्टेबल (कोर्ट) मुकेश नेगी, कोर्ट स्टाफ आशुतोष, थाना गुप्तकाशी से मुकेश कुमार और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की सदस्य श्रीमती रजनी शर्मा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएँ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य लखपत सिंह राणा और विद्यालय परिवार ने अतिथियों का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। इसके बाद माता सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम शुरू हुआ। प्रधानाचार्य लखपत राणा ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बच्चों को सही-गलत की पहचान कराने और अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने में उपयोगी है।
नौनिहालों से सीधा संवाद करते हुए
सिविल जज संतोष पश्चिमी ने विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ से बातचीत कर कई बिंदुओं पर जागरूक किया। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि
पॉक्सो अधिनियम, 2012: बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए कठोर कानून है। किसी बच्चे के साथ गलत होने की जानकारी होने पर भी कदम न उठाने वाला व्यक्ति जवाबदेह हो सकता है। कहा कि
ऑनलाइन सुरक्षा: माता-पिता के सोशल मीडिया अकाउंट का असावधानी से उपयोग करने पर बच्चे आसानी से निशाना बन सकते हैं। बैंक खाते या मोबाइल नंबर से जुड़े किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
गुड टच-बैड टच: कोई स्पर्श या व्यवहार असहज लगे तो तुरंत किसी विश्वसनीय बड़े को बताएँ।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चे माता-पिता के मोबाइल या गैजेट पर अनुचित साइट देखते हैं, तो यह अभिभावकों के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। यदि उपकरणों में बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री संग्रहित हो और उसे हटाया या सूचित न किया जाए, तो पॉक्सो अधिनियम की धारा 15 के तहत दंड का प्रावधान है।
उन्होंने विद्यालय से अपेक्षा जताई कि अभिभावकों के काउंसलिंग सत्रों में बच्चों की उपस्थिति में ये बातें साझा की जाएँ। साथ ही विद्यालय स्तर पर यौन उत्पीड़न के निवारण, निषेध और सुधार हेतु कमेटी के सक्रिय संचालन पर जोर दिया।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की सदस्य रजनी शर्मा ने बताया कि फरवरी माह से अब तक कमेटी के पास 13 मामले आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में लड़का-लड़की सभी बच्चे समान हैं। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज न करने की अपील की।
बच्चों को ये हेल्पलाइन नंबर भी बताए गए: साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और नालसा हेल्पलाइन 15100। उन्हें बताया गया कि शिकायत करने पर पहचान गोपनीय रखी जाती है।

कार्यक्रम के बाद न्यायाधीश संतोष पश्चिमी ने प्राचार्य लखपत राणा और अन्य अतिथियों के साथ विद्यालय के लघु संग्रहालय ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत’, पुस्तकालय और विज्ञान प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया।






