राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
गजल
दर्दे-दिल का, सबब तो बता दीजिये,
हकीम न सही, हमदर्द बना लीजिए।
आंखों में छुपे, आँसुओं को पढ़ लीजिए,
दिल की किताब, कभी तो पढ़ा कीजिए।
जो बात ज़ुबाँ पर, नहीं आ पायी कभी,
आँखों से वो राज, आज बता दीजिए।
मैंने तो सिर्फ, एक सवाल पूछा था कभी,
आप साथ जीने को, जवाब बना लीजिए।
दर्द तो मेरा था, मगर आपने आकर सुना,
अपनेपन का हिस्सा, इसमें मिला लीजिए।
अब चाहे मर्ज बढ़े, या घट जाए ‘रंजन’
नाचीज को अपना, हमराज बना लीजिए।






