सौजन्यः सुनील कुमार
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मीडिया को आजादी के समय की पत्रकारिता से सीखने की जरूरत : राजेन्द्र
– एएस फाउंडेशन के बैनर तले ‘भारतीय मीडिया : सच के कितने पास, तथ्य से कितने परे’ पर विमर्श आयोजित।
मुजफ्फरपुर: आजादी के बाद भारतीय मीडिया का समाजशास्त्र समय के साथ बदलता गया। और इसलिए आज मीडिया की निष्पक्षता व निर्भीकता पर प्रश्न उठने लगे हैं। ये बातें इतिहासकार व लेखक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहीं।
श्री सिंह रविवार को आमगोला स्थित शहनाई बैंक्वेट हॉल में ‘अप्पन समाचार’ पुस्तक के बहाने “भारतीय मीडिया : सच के कितने पास, तथ्य से कितने परे’ विषय पर एएस फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित विमर्श में बोल रहे थे। लेखक व चिंतक डॉ हरिनारायण ठाकुर ने कहा कि मीडिया को अपनी निष्पक्ष भूमिका को कभी भूलना नहीं चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से आज पारंपरिक पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य से विमुख होता हुआ दिख रहा है। उन्होंने अप्पन समाचार के काम की सराहना की। लेखक व संस्कृति अरुण नारायण ने बिहार की पत्रकारिता के इतिहास के आइने में पारंपरिक व वैकल्पिक मीडिया की भूमिका को रेखांकित किया।
दूसरे सत्र में पारंपरिक व वैकल्पिक मीडिया पर पैनल डिस्कशन किया गया, जिसमें पत्रकारिता के हरेक पक्ष पर गहन चर्चा की गयी। पैनलिस्ट डॉ. ज्ञान प्रकाश, डॉ. राजीव कुमार, भूपाल भारती, अशोक भारती, राजा ठाकुर, अमृतांज इंदीवर और संतोष सारंग से श्रोताओं ने पत्रकारिता की गिरते साख पर सवाल उठाए।
इस मौके पर कठपुतली कलाकार सुनील सरला ने कठपुतली शो के जरिए लोकतांत्रिक मीडिया की प्रवृत्ति में आए बदलाव को दिखाया। मंच संचालन डॉ. सुशांत कुमार एवं संतोष सारंग ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ हेम नारायण विश्वकर्मा ने किया।
इस अवसर पर डॉ. रामेश्वर राय, डॉ. ललन भगत, डॉ. विष्णुदेव यादव, डॉ. अविनाश कुमार, सोनू सरकार, मदन प्रसाद, बैजू कुमार, फुलदेव पटेल, नीरज कुमार, अमरेंद्र कुमार, यशोदा कुमारी पासवान,


डॉ. रिंकु कुमारी, अनीता कुमारी सिमरन सहनी, मुन्ना कुमार, लालबाबू पटेल, राकेश रंजन आदि मौजूद थे।






