राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
मैंने अपनी जिंदगी में इतना घटिया IAS ऑफिसर कभी नहीं देखा है भाई?
मतलब जब सरकार ने बोल दिया कि सड़क बनाने के पैसे नहीं हैं, तो नहीं हैं? फिर इस IAS ऑफिसर को क्या जरूरत थी कि ख़ुद अपने पैसों से 100 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की?
ऐसा कौन करता है भाई?
ये है 2009 बैच के IAS ऑफिसर Armstrong Pame। मणिपुर में पोस्टिंग हुई थी,जहाॅं आज़ादी के 60 साल बाद तक एक सड़क नहीं थी। लोग बीमारों को कंधों पर लाद कर 50-50 किलोमीटर पैदल जाते थे।
जब इन्होंने, अर्थात् इन IAS ऑफ़िसर महोदय ने, सरकार से सड़क के लिए फंड माँगा तो सरकार ने साफ मना कर दिया, कहा कि पैसा नहीं है!
भाई अगर एक नॉर्मल बाबू होता तो AC कैबिन में बैठकर शान से सैलरी गिनता, लेकिन इस बंदे की नीयत में कुछ खोट थी ?
ये बंदा सोशल मीडिया पर गया और क्राॅउड फंडिंग की कोशिश से 40 लाख रुपये जमा किए।
फिर गाँव वालों के साथ मिलकर, बिना एक भी सरकारी रुपया खर्च किए, 100 किलोमीटर लंबी सड़क बना दी।
क्या आप जानते हैं कि आज लोग उस सड़क को पीपुल्स रोड़ के नाम से जानते हैं?
एक तरफ देश में वो ऑफिसर्स हैं, जो सड़क बनाने के लिए करोड़ों डकार जाते हैं और डकार तक नहीं लेते हैं!
ऐसे IAS ऑफिसर के लिए कम से कम एक जोरदार सैल्यूट तो बनता है, जो सिर्फ कुर्सी पर ही नहीं बैठता है, बल्कि जमीन पर उतरकर कुछ खास काम भी करता है।
अवधेश प्रताप सिंह, कानपुर, (उ.प्र)






