सुल्तान अली गहलोत शिक्षक एवं कवि, पूर्व छात्र, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ उत्तर प्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080072
न जाने तुम — सुल्तान अली गहलोत
जहर का प्याला लबों से लगाए बैठे हो,
किस गम को सीने में तुम छुपाए बैठे हो।
अँधेरों से नाता पुराना है तुम्हारा, फिर भी
जिंदगी में उजाले की आस लगाए बैठे हो।
चराग़ों की सूरत जलाकर खुद को,
हवाओं से अपनी लौ बचाए बैठे हो।
समंदर-ए-उल्फत में उतरकर तुम,
किनारे की उम्मीद लगाए बैठे हो।
किसी की याद में आँखें भिगोकर,
अधूरे से ख्वाब तुम सजाए बैठे हो।
लबों पर हँसी और दिल में दर्द रखकर,
न जाने तुम कितने राज छुपाए बैठे हो।






