राष्ट्रीय गृहिणी दिवस – घर की रीढ़ को नमन

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सौजन्यः बीएल भूरा                                                     चन्द्र शेखर आजाद नगर                                            भाबरा, मध्यप्रदेश

 

                    (नया अध्याय, उत्तराखण्ड                                              (w) 6395080071

 

                     राष्ट्रीय गृहिणी दिवस

                   – घर की रीढ़ को नमन

 

 

 

आज यानी 3 नवम्बर को राष्ट्रीय गृहिणी दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन उन करोड़ों महिलाओं को समर्पित है जो बिना किसी शोर-शराबे के, बिना किसी वेतन और बिना किसी छुट्टी के, अपना पूरा जीवन घर, परिवार और बच्चों के लिए समर्पित कर देती हैं। हम अक्सर सफलता को बाहर की दुनिया में खोजते हैं – ऑफिस में, व्यापार में, नौकरी में। लेकिन उस सफलता की नींव जिस घर में रखी जाती है, उसे संभालने वाली गृहिणी का योगदान सबसे बड़ा और सबसे अनदेखा होता है। गृहिणी होना केवल खाना बनाना नहीं है। यह एक साथ कई भूमिकाओं को निभाना है।

 

           घर का प्रबंधन गृहिणी का पहला और सबसे कठिन कार्य है। सुबह सबके उठने से पहले उठना, समय पर चाय-नाश्ता, टिफिन, भोजन तैयार करना, घर की साफ-सफाई, कपड़ों का ध्यान, राशन-पानी और बजट को संभालना। हर सदस्य की छोटी-बड़ी जरूरत – किसे कौन सी दवाई चाहिए, किसका कौन सा कपड़ा कहाँ रखा है – यह सब उसे याद रहता है। वह घर की मैनेजर, अकाउंटेंट और केयरटेकर एक साथ होती है।

 

       बच्चों का पालन-पोषण उसका दूसरा सबसे बड़ा तप है। बच्चे को केवल जन्म देना माँ बनना नहीं है, उसे संस्कार देना, अच्छी आदतें सिखाना, सुरक्षित माहौल देना और उसके मन में आत्मविश्वास भरना एक गृहिणी ही करती है। पिता बाहर की दुनिया से लड़ता है तो माँ घर के अंदर एक पूरी पीढ़ी गढ़ती है। देश का भविष्य सच में गृहिणी की गोद में पलता है।

 

         यह काम 24/7 बिना थके चलने वाला काम है। किसी ऑफिस में 8 घंटे की शिफ्ट होती है, रविवार को छुट्टी होती है, त्योहार पर बोनस मिलता है। लेकिन गृहिणी के लिए न कोई संडे है, न कोई छुट्टी। बुखार में भी उसे रसोई में जाना पड़ता है, थकान में भी बच्चों को कहानी सुनानी पड़ती है। और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस काम का कोई वेतन नहीं, कोई पीएफ नहीं, कोई प्रमोशन नहीं। समाज इसे काम ही नहीं मानता। इसीलिए राष्ट्रीय गृहिणी दिवस का महत्व है। यह दिन हमें तीन बातें सिखाता है। सराहना करना। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम पति, बच्चे अक्सर माँ की मेहनत को अनदेखा कर देते हैं। यह दिन कहने का अवसर है – थैंक यू, तुम हो तो घर घर लगता है। एक छोटा सा धन्यवाद, एक छोटा सा उपहार, एक दिन रसोई में हाथ बंटाना – यही उसके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

     सम्मान बढ़ाना। समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि घर संभालना किसी छोटी नौकरी से कम नहीं है। यह परिवार की रीढ़ है। अगर गृहिणी एक दिन काम बंद कर दे तो पूरा घर, पूरी व्यवस्था ठप हो जाएगी। इसलिए गृहिणी को ‘सिर्फ हाउसवाइफ’ कहकर कमतर आंकना बंद करना होगा।

                     भावनाओं को समझना। जिस आराम और सुव्यवस्थित घर में हम रहते हैं, उसके पीछे गृहिणी का कड़ा परिश्रम, त्याग और आंसू छिपे होते हैं। उसने अपने सपने, अपनी पढ़ाई, अपनी इच्छाएँ कई बार परिवार के लिए रोकी हैं। उस त्याग को समझना ही सच्चा सम्मान है। अंत में, राष्ट्रीय गृहिणी दिवस केवल कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि एक सोच है। हर घर में अगर गृहिणी खुश है, तो पूरा घर खुशहाल है। आज के दिन अपनी माँ, अपनी पत्नी, अपनी बहन – जो भी घर संभाल रही है – उसे गले लगाइए और कहिए कि उसके बिना आपका घर कुछ भी नहीं। क्योंकि न्याय और शांति की पहली पाठशाला घर ही है, और उसकी पहली शिक्षिका गृहिणी है।

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