सौजन्यः डॉ.यल.कोमुरा रेड्डी
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साहित्य की विविध विधाओं का प्रसार ही सामाजिक जागरूकता का आधार :
उप कुलपति प्रो. उमेश कुमार
श्री राजा राजेश्वरा शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में सामाजिक माध्यमों और विभिन्न लेखन शैलियों पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य समापन
करीमनगरः 4 नवंबर 2026 : श्री राजा राजेश्वरा शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय (स्वायत्त), करीमनगर के तेलुगु विभाग तथा शातवाहन विश्वविद्यालय के तेलुगु विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सामाजिक माध्यम और विभिन्न लेखन शैलियाँ’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का समापन बुधवार,4 नवंबर 2026 को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक लेखन, साहित्यिक अभिरुचि तथा सामाजिक माध्यमों के सार्थक उपयोग के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शातवाहन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर यू. उमेश कुमार ने अपने संबोधन में अपने तेलुगु गुरु का भावपूर्ण स्मरण करते हुए विद्यार्थी जीवन की पुरानी स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि वे तेलुगु विषय में प्रथम श्रेणी के विद्यार्थी रहे हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज में विचारों, मूल्यों और जागरूकता का प्रसार करने वाला सशक्त माध्यम है। साहित्य की विभिन्न विधाओं के विकास और विस्तार से ही सामाजिक चेतना को नई दिशा मिलती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस महाविद्यालय के विद्यार्थी अपनी प्रतिभा और परिश्रम से जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर कलवकुंटा रामकृष्ण ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा को भी विकसित करना चाहिए। इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, ताकि विद्यार्थी सामाजिक माध्यमों का सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग करते हुए मौलिक साहित्यिक रचनाओं का सृजन कर सकें। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों में नई सोच, लेखन कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
तेलंगाना उच्च शिक्षा विभाग संयुक्त कार्रवाई समिति के अध्यक्ष एवं राज्य शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. कडारु सुरेंद्र रेड्डी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मातृभाषा में अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करना सबसे सहज एवं प्रभावशाली होता है। वर्तमान युवा पीढ़ी पर सामाजिक माध्यमों का व्यापक प्रभाव है। ऐसे में विद्यार्थियों को इन माध्यमों का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, ज्ञान और रचनात्मक कौशल को अभिव्यक्त करने तथा समाज के लिए उपयोगी साहित्य के सृजन हेतु करना चाहिए।
इस अवसर पर तेलुगु विभागाध्यक्ष डॉ. बूरला चंद्रशेखर ने दो दिवसीय कार्यशाला की गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने लेखन की विविध विधाओं, साहित्यिक अभिव्यक्ति, रचनात्मकता तथा सामाजिक माध्यमों के प्रभावी उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं। इन सत्रों से विद्यार्थियों को लेखन की नई तकनीकों और व्यावहारिक अनुभवों को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में तेलुगु विभाग के प्राध्यापक बूरला वेंकटेश्वरलू, डॉ. प्रकाश, रापर्ती श्रीनिवास, मेट्टू वेंकटेश्वरलू, डॉ. अशोक, डॉ. चैतन्य, डॉ. बोजन्ना, शंकर, तन्नीर सुरेश, कट्टा वेणु, बोगे अशोक तथा प्रसिद्ध गायक पलिगिरी राजेंद्र सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
दो दिवसीय कार्यशाला ने विद्यार्थियों को यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि साहित्यिक सृजन, मातृभाषा का विकास और सामाजिक माध्यमों का सकारात्मक उपयोग एक जागरूक, संवेदनशील एवं रचनात्मक समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।






