
सुश्री सरोज कंसारी लेखिका एवं कवयित्री नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
आलेख ———–
इस दीपावली स्वदेशी वस्तुओं से जगमग हो आपकी देहरी।
स्थानीय शिल्पकार, कुम्हार व विक्रेता से सामान खरीदकर आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ाएं कदम।
स्वदेशी सामग्री खरीदकर जलाएं खुशियों की फ़ूुलझड़ी।
कड़ी धूप में चेहरें पर असमंजस के भाव लेकर बैठे कुम्हार, जो कठिन परिश्रम से मिट्टी से पूजन के विभिन्न सामग्री लेकर मन मे उम्मीद के दिए जलाए होते हैं। उन्हें देखकर अनायस ही मन मे खयाल आता हैं, कुछ तो सवाल हैं अंतस की गहराई में। पूरे परिवार के पसीने की बूंद इनके बनाएं सामानों में मिली होती हैं। आर्थिक मजबूती का जो एकमात्र सहारा हैं। एक शिल्पकार व विक्रेता सभी बहुत उम्मीद से दुकान सजातें हैं, आँखों में इंतजार स्पष्ट झलकता हैं। उनकी मजबूरी खामोशी से कुछ तो कहती हैं। अगर अपने लोग ही महत्व न समझें स्थानीय कामगारों की तो बेगानों अर्थात विदेशी सामानों की, खोखली सजावट, लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेगी ही न। वे कहते हैं आत्मनिर्भरता का पाठ तो हम बहुत पढ़ते हैं कि स्वदेशी सामग्री अपनाओ, विदेशी का बहिष्कार नारे सुनने में भी अच्छे लगते हैं लेकिन हकीकत तो कुछ और ही बयां करती हैं। क्या हम अपने घर की सजावट सच में स्थानीय कामगारों के हाथ से बनी सामाग्री से करते हैं ?क्या आपकी पूजा की थाली में रोल, अगरबत्ती, धूपबत्ती चंदन आदि स्वदेशी हैं, क्या आप दृढ़ संकल्पित हैं ? अपनी प्राचीन सभ्यता को सहेजकर रखने के लिए।
त्यौहार जीवन में खुशियों की प्रतीक होती हैं जिसमें हम अपने रीति- रिवाज परम्पराओं से परिचित होते हैं। सभी की अपनी बोली-भाषा तीज-त्यौहार होते हैं जिसका अपना एक अलग ही महत्व होता हैं। भारतीय संस्कृति सदा से ही गौरवशाली रही हैं ।
हम एक ऐसे देश के निवासी हैं जहाँ हर पग पर भारतीय सभ्यता के दर्शन होते हैं,अपनी ऐतिहासिक जीवन मूल्यों के कारण एक उच्च आदर्श स्थापित करती हैं ।मानवीय गुणों की सीख होती हैं, हर तीज- त्यौहार में जो मन मे सदा ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं ।
त्यौहार को मनाने के पीछे भाईचारे के भाव, आपसी सौहाद्र, प्रेम -स्नेह, अपनेपन के गुणों का विस्तार करना ही होता हैं। वैसे भी रीति रिवाज व परंपरा अपने सामान विचारो के बिखरे हुए लोगो को संगठित कर एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य करती हैं ।त्यौहार ही हॄदय की हर तार को झंकृत कर उदासी के अंधकार से निकाल कर आनंद के पल प्रदान करती है। यह सिर्फ परंपरा का निर्वहन नही इसके पीछे एक उद्देश्य और समाहित होता हैं आने वाली पीढ़ी को प्राचीन संस्कृति हस्तांतरित करना।
हमारा देश त्यौहारों का देश हैं जहाँ हर दिन एक त्यौहार होता हैं। दशहरा, होली, मेला, नवरात्र सावन मास, शिवरात्रि, गणेश पूजन, रथयात्रा रक्षाबंधन, मकर सक्रांति आदि। इन सब त्यौहारों से हमारी भावनाएं जुड़ी होती हैं। जिस पर हमें आस व विश्वास होता हैं ।सभी का अपना एक अलग ही महत्व होता हैं सबसे महत्वपूर्ण और धार्मिक पर्व हैं दीपावली। जिसे कार्तिक मास की अमावस्या को पूरे देश में मनाया जाता हैं। जो अंधकार में प्रकाश का पर्व हैं। धार्मिक सौहार्द के भाव जिसमे उजागर होते हैं यह पंच दिवसीय पर्व हैं जिसकी तैयारी सभी एक माह पूर्व करते हैं। अधिक मात्रा में खरीदारी की जाती हैं।
यह पर्व लोगो के रोजगार से भी जुड़ा है इसलिए अपने घर की सजावट का सामान खरीदने से पहले कुछ चिंतन अवश्य करें। विदेशी सामग्री जो बहुत ही आकर्षक होती हैं, लेकिन हमारे देश में भी बहुत ही अच्छे कारीगर हैं जो अपनी मेहनत से बनाते हैं ।विदेशी सामानों का विक्रय कर हम अपने देश की आर्थिक स्थिति कमजोर करते हैं। ऐसा कर अपने देश में बनी वस्तुओं की उपेक्षा करते हैं। सभी बहुत ही विश्वास के साथ मेहनत से दुकान सजाते है, लेकिन उनकी बिक्री ज्यादा नहीं हो पाती उनकी भावनाओं की ठेस पहुंचती हैं।
हम एकता, सहयोग, सामंजस्य की बात जब करते हैं तो यह जरूरी हो जाता हैं कि स्वदेशी वस्तुओं को खरीदकर हम अपने देश के महान शिल्पकारों, कुम्हार कारीगरों दुकानदारों का मनोबल बढ़ाएं और भारतीयता का परिचय दें। दृढ़ संकल्प करें इस दीपावली हम मिट्टी के दिये, झालर कपड़े, गहने, उपहार सामग्री सभी स्वदेशी ही खरीदे। हम यूँ तो त्यौहार प्रतिवर्ष मानते हैं। दिए की जगमगाहट से हर देहरी से अंधकार दूर होता हैं। तो क्यूँ न हर चेहरें की उदासी हटाकर बिखेर दें उमंग _उत्साह की रोशनी सिर्फ कहावत न हो।बहिष्कार करें हर उन सामानों का जिसमें अपने देश की मिट्टी की महक नहीं ।मदद करे स्थानीय विक्रेताओं का जिनके सामानों जिसमें परिश्रम के पसीने की बूंद शामिल हैं।आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करें उन्हें उनके समान खरीदकर कोई भी बेबस ,लाचार और दुखी न हो। गरीब के होठों पर मुस्कुराहट देकर अपनी दीपावली को यादगार बनाएं।
हमारे देश में प्रतिभा की कमी नही हैं ।यहाँ के कारीगर बहुत सुंदर कलाकृति कर आकर्षक वस्तुओं का निर्माण करते हैं ,जो मजबूत और टिकाऊ होता हैं ।पर उनकी कला सामने नही आ पाती ,क्योकि उन्हें अपने ही लोगो का सहयोग नही मिल पाता। जागरूकता की आज भी कमी हैं आज समय तेजी से बदल रहा हैं ।विदेशी भूत सवार हैं सभी मे ,सोशियल मीडिया में विभिन्न कंपनियों के कई प्लेटफार्म हैं ।जहाँ ऑनलाइन शॉपिंग करना एक फैशन बन गया हैं कंपनी के द्वारा कम गुणवत्ता के सामानों को आकर्षक बनाकर दिखाया जाता हैं ।इसके चक्कर में पड़कर कर हम अपने देश की कलाकृति को विदेशो में नही पहुँचा पाते ।लेकिन विदेशी सामानों को खरीदकर उन्हें आर्थिक मदद करते हैं जो गलत हैं ।
आइए !हम सभी आत्मनिर्भर भारत के सपनो को साकार करने में सहयोग करें। विदेशी सामानों को पूर्ण रूप से त्याग दें ।ऑनलाइन शॉपिंग छोड़कर स्थानीय लोगो से अधिक वस्तु खरीदकर एक कदम आगे बढ़ाएं ।जिससे देश का पैसा बाहर न जाएं स्वदेशी सामान खरीदकर हम सभी जलाएं खुशियों की फ़ूलझड़ी।
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