गजल

Spread the love

केशव शरण 
कुंज विहार काॅलोनी, सेंट्रल जेल रोड
सिकरौल, वाराणसी

गजल
आज तक वो काम की यादें रहीं
नाम तेरे शाम की यादें रहीं

तुझ हसीं को, तुझ जवां को छोड़कर
और किसके नाम की यादें रहीं

भूल सकता हूँ नहीं आग़ाज़ मैं
और जो अंज़ाम की यादें रहीं

चाँदनी वाली गली का मोड़ था
चाँद वाले बाम की यादें रहीं

फिर भला उतरे ख़ुमारी किस तरह
जब छलकते जाम की यादें रहीं

हम गए पोशाक ज़ेवर देखने
ख़ूब उनके दाम की यादें रहीं

एक छोटा-सा सफ़र था इश्क़ का
बेतरह हर गाम की यादें रहीं

  • Related Posts

    स्मृतियों की राह में कविता.

    Spread the love

    Spread the love  राजकुमार कुम्भज जवाहरमार्ग, इन्दौर               (नया अध्याय, देहरादून) _____________________ स्मृतियों की राह में कविता. _____________________ कविता नहीं है राख का ढ़ेर …

    आशाओं की छतरी

    Spread the love

    Spread the love  डॉक्टर रामबली मिश्र, वाराणसी।                  (नया अध्याय, देहरादून)     आशाओं की छतरी आशाओं की छतरी ले कर। चलते रहना…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    • By User
    • February 5, 2026
    • 2 views
    साथ-साथ चल सकते हैं आर्थिक विकास और वित्तीय अनुशासन

    स्मृतियों की राह में कविता.

    • By User
    • February 5, 2026
    • 11 views
    स्मृतियों की राह में कविता.

    आशाओं की छतरी

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    आशाओं की छतरी

    थोड़ा सा इश्क में

    • By User
    • February 5, 2026
    • 6 views
    थोड़ा सा इश्क में

    वासंतिक छवि(दोहे)

    • By User
    • February 5, 2026
    • 12 views
    वासंतिक छवि(दोहे)

    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?

    • By User
    • February 5, 2026
    • 5 views
    अंजाम-ए- गुलिस्ताँ क्या होगा ?