केशव शरण
कुंज विहार काॅलोनी, सेंट्रल जेल रोड
सिकरौल, वाराणसी
गजल
आज तक वो काम की यादें रहीं
नाम तेरे शाम की यादें रहीं
तुझ हसीं को, तुझ जवां को छोड़कर
और किसके नाम की यादें रहीं
भूल सकता हूँ नहीं आग़ाज़ मैं
और जो अंज़ाम की यादें रहीं
चाँदनी वाली गली का मोड़ था
चाँद वाले बाम की यादें रहीं
फिर भला उतरे ख़ुमारी किस तरह
जब छलकते जाम की यादें रहीं
हम गए पोशाक ज़ेवर देखने
ख़ूब उनके दाम की यादें रहीं
एक छोटा-सा सफ़र था इश्क़ का
बेतरह हर गाम की यादें रहीं







