डॉ. हरि नाथ मिश्र, अयोध्या, (उ.प्र.)
कुण्डलिया
नमन करें हम श्रमिक को, जो करते निर्माण,
हैं विकास के जनक ये, सदा करें कल्याण।
सदा करें कल्याण, सँवरता जीवन सबका,
मिले सभी को त्राण, नीर निर्मल जग बहता।
कहें मिसिर हरिनाथ, करें ये जीवन अर्पण,
श्रम की बूँद बहाय, करें सभी उनको नमन।।
“नया अध्याय” समाचार पत्र
कुण्डलिया
जनता का हित साधना, है प्रतिनिधि का काम,
पर, प्रतिनिधि जाते मुकर, पाले रहते झाम ।
पाले रहते झाम, बदलते हैं ये पाल्हा,
जब पड़ता है काम, अलापते ये आल्हा।
कहें मिसिर हरिनाथ, नेता सदा ही ठगता,
ठगकर छोड़े साथ, बाद में मरती जनता।।







